शिवपुराण से……. (290) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. संध्या ने कहा-ब्रह्मन्! मैं ब्रह्माजी की पुत्री हूं। मेरा नाम संध्या है और मैं तपस्या करने के लिए इस निर्जन पर्वत पर आयी हूं। यदि मुझे उपदेश देना आपको उचित जान पड़े तो आप मुझे तपस्या की विधि बताईये। मैं यही करना चाहती हूं। दूसरी कोई भी गोपनीय बात नहीं है। मैं तपस्या के भाव को-उसके करने के नियम को बिना जाने…

शिवपुराण से……. (289) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. उसी तरह सुशोभित हो रहा था, जैसे प्रदोषकाल में उदित हुए चन्द्रमा और नक्षत्रों से युक्त आकाश शोभा पाता है। सुन्दर भाव वाली संध्या को वहां बैठी देखकर मुनि ने कौतूहलपूर्वक उस बृहल्लोहित नाम वाले सरोवर को अच्छी तरह देखा। उसी प्राकारभूत पर्वत के शिखर से दक्षिण समुद्र की ओर जाती हुई चन्द्रभागा नदी का भी उन्होंने दर्शन किया। जैसे गंगा हिमालय…

शिवपुराण से……. (288) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. (तरूणावस्था से पूर्व किसी पर भी काम का प्रभाव नहीं पडेगा, ऐसी सीमा निर्धारित करूंगी)। इसके बाद इस जीवन को त्याग दूंगी। मन ही मन ऐसा विचार करके संध्या चन्द्रभाग नामक उस श्रेष्ठ पर्वत पर चली गयी, जहां से चन्द्रभागा नदी का प्रादुर्भाव हुआ है। मन में तपस्या का दृढ़ निश्चय ले संध्या को श्रेष्ठ पर्वत पर गयी हुई जन मैंने अपने…

शिवपुराण से……. (287) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. वह संध्या, जो पहले मेरी मानस पुत्री थी, तपस्या करके शरीर को त्याग कर मुनिश्रेष्ठ मेधातिथि की बुद्धिमती पुत्री होकर अरून्धती के नाम से विख्यात् हुई। उत्तम व्रत का पालन करके उस देवी ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के कहने से श्रेष्ठ व्रतधारी महात्मा वसिष्ठ को अपना पति चुना। वह सौम्य स्वरूपवाली देवी सबकी वन्दनीया और पूजनीया श्रेष्ठ पतिव्रता के रूप में…