बैल पूजा से जुडा़ है जाच्छ काण्डा का शकूरा देवोत्सव

डा. हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सुकेत की प्राचीन राजधानी पांगणा के पर्वोत्तर में जाच्छ-चरखड़ी सड़क पर छोल गढ़ के अंचल में  काण्डा नामक स्थान पर नृसिंह भगवान का मंदिर सम्पूर्ण मण्डी-सुकेत क्षेत्र में पशु धन वृद्धि, रोग निवारण, भूत बाधा निवारण और फसलों की वृद्धि के लिए विख्यात है। नाचन निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत इस गांव का सांस्कृतिक परिदृश्य सनातन परम्परा का जीवंत उदाहरण है। काण्डा गांव में नृसिंह भगवान का पैगोडा मण्डपीय शैली का मंदिर बना है। मंदिर के समीपस्थ नृसिंह भगवान के वृषभ रूप गण…

मर्यादाओं के अवसान से उपजती हिंसक मानसिकता

डा. हिमेंद्र बाली ‘हिम’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। समाज संस्कति और सभ्यता का समन्वित स्वरूप है। संस्कृति मानव चिंतन का वह प्रवाह है, जो युगों से पीढ़ी दर पीढ़ी धरोहर स्वरूप बहता रहा है। संस्कृति संस्कारों की वह बपौती है, जो संस्कारों से संवरती है और पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखती है। सभ्यता मानव का बाहरी आवरण है, जो संस्कृति की प्राण वायु से जीवित रहती है। आज के द्रुतगामी भौतिक जगत में सामाजिक विघटन की विद्रूपता संस्कति के अवसान की आहट है। आज के तथाकथित विकासवादी…

अकेला सफर (लघु कथा)

डा हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। दरवाजा खोला तो बेटा बहू सामने थे। पिता जी नौकर के साथ आत्मीय संवाद में मशगूल थे। चेहरे पर बरसों बाद चमक लौट आई थी। देखो बेटा! मजबूरी भी आदमी को क्या बना देती है। कभी इसके बाप दादाओं के बास सैकड़ों बीघा जमीन थी। कह रहा है कि हमारी जमीदारी मशहूर थी। ठाकुर लोग भी कतराते थे। समय का फेर है, आज न जमींदारी रही न रुतबा…..। पिता कहे जा रहे थे और बेटा बहू को उनका नौकर के साथ ऐसी…

क्या ढूंढ रहे हैं

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जो जीवन की,साथर्कता बतलायें।मानव जीवन के ,सोपानों को,सिद्ध कर जायें ।नई सोच से,नई लग्न से,जीवन के आयाम बनायें । ऐसा ही कुछ ढूंढ रहे है। हर मुश्किल से जा टकरायें।हिम्मत बांध खडा हो जायें। झूठ के सौ पैर हुए,….तो क्या?सच के साथ अडिग रह जायें। सच्चा प्यार हो दिलों में,ढोंग न दिखावा हो । चेहरों के अनगिणत मुखौटों में,जो चेहरा एक चेहरे वाला हो। ऐसा ही कुछ ढूंढ़ रहें है। नालागढ़, हिमाचल प्रदेश