कहां है

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अज़ल से तमन्ना हो जिसकी, वो मिलता फिर कहाँ है? दिल में तरबियत हो जिसकी, वो जहाँ में दिखता फिर कहाँ है? अश्कों से हो रुखसत जो, ख्वाबों में फिर वो रहता कहाँ है? जनाज़े कर दे जीते तन को जो, आम से खास फिर वो होता कहाँ है? जाम ए जख्म बेशुमार दिये हों जिसने, ज़हन में फिर वो पलता कहाँ है? तार ए दिल तर-ब-तर किये हों जिसने, मरहम लगाने से भी फिर वो संवरता कहाँ है? अज़ल से तमन्ना हो…