पांगणा-करसोग-मण्डी में हर्षोल्लास से मनाया गया बकरयाला साजा महापर्व

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश के मण्डी जनपद मे स्थित कमरुनाग झील एक खूबसूरत पावन स्थली है। लगभग आधा किलोमीटर की परिधि में फैली इस झील के तट पर पांडवों के ठाकुर कमरुनाग जी का पहाड़ी शैली में बना लघु लेकिन बहुत सुंदर मंदिर है। कमरुनाग परिसर का सौदर्य अनुपम है। श्रद्धालुओ अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण होने पर पहले कमरुदेव जी के मंदिर मे स्थापित कमरुदेव जी की पूजा-अर्चना करते हैं फिर झील में विराजमान कमरुनाग जी की पूजा कर सोना-चांदी-सिक्कों के रुप में अपनी मन्नौतियां भेंट के…

पांगणा की लीना ने विश्व को दिखाई राह

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी सुकेत रियासत की ऐतिहासिक नगरी पांगणा के पज्याणु गांव की स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त गृहिणी लीना शर्मा ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती में हिमाचल प्रदेश ही नहीं, अपितु विश्व समुदाय को एक नई दिशा प्रदान की है। ऊर्जा, वातावरण एवं जल परिषद, खाद्य एवं भू उपयोग सहित चिरगामी कृषि क्रियाओं के आर्थिक सहकारिता एवं वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के विषय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैबनार प्रसारण में भारत की एकमात्र महिला लीना शर्मा ने भाग लेकर प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र…

नवरात्रि का शुभारंभ शनिवार 17 अक्टूबर से, शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अश्व पर आरूढ़ होकर आएगी, हाथी पर होगा प्रस्थान

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। माँ दुर्गा का परम प्रिय महापर्व महोत्सव नवरात्रि का शुभारंभ इस वर्ष 17 अक्टूबर से होने जा रहा है। नवरात्र शब्द से तात्पर्य ‘नव अहोरात्र’ अर्थात विशेष रात्रियों के बोध का सूचक। माँ दुर्गा को समर्पित इन विशेष दिव्य रात्रियों में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध अनायास ही नष्ट हो जाते हैं। व्यवहारिक दृष्टिकोण से भी अगर देखा जाए तो रात्रि के समय ध्यान करने से शून्य व्यापी तरंगे ब्रह्म का साक्षात्कार करवा देती है। नव रात्रियों में किए गए शुभ संकल्प सिद्ध होते…

कर्मकाण्ड एवं ज्योतिष की मिसाल है हिमाचल के पांगणा का गांव थाच

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की पांगणा उप-तहसील के मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर बसा थाच गांव समुद्र तल से लगभग 1275 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चारों ओर से हरे-भरे पेड़ इसको प्राकृतिक सौंदर्य  प्रदान करते हैं। अपनी इसी खूबसूरती के कारण यह गांव बहुत भव्य लगता है। थाच गांव की आबादी लगभग 200 के आसपास है। गांव में सभी परिवार ब्राह्मणों के हैं। गांव का नाम थाच क्यों पड़ा यह तो किसी को पता नहीँ, लेकिन सुकेत संस्कृति साहित्य एवं …