ईश्वर तेरे नाम पर

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ईश्वर तेरे नाम पर , कितना व्यापार चलता है । सुख की आस में, हर इंसान दुःख के मझधार में पलता है। ईश्वर तेरे नाम पर , कितना व्यापार चलता है । कौन ……सुखी हैं? इस प्रश्न का उत्तर ही नहीं मिलता है।  यह कौन -से कर्मों का फल है । जिसका लेखा-जोखा फलता है। ईश्वर तेरे नाम पर , कितना व्यापार चलता है । दुनिया  भी तूने बनाई।  इंसान भी तेरे सभी। फिर कहां से बुरे कर्मों की,  पहेलियाँ तुमने घड़ी।  हर…

असीम! तुम्हारी कविता (एक संस्मरण)

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आज तुम्हारी फाइलों को तुम्हारे जाने के बाद लोगों को वापस देने के लिए कुछ किताबों के पन्नों में से एक डायरी का पन्ना निकला। मेरे छोटे भाई अनुज ने वह पेज उठाया और कहा दीदी आपकी कविता।  मेरी कविता! मुझे हैरानी हुई कि असीम की फाइलों में मेरी कविता, लेकिन जब मैंने देखा तो मैंने उसे लिखावट देख कर बताया कि यह मेरी नहीं उनकी (असीम) कविता है। शीर्षक लिखा था….दर्द दिल में ऐसा क्या होता है। खून के आंसू क्यों रोता…

खुद को गढ़ना होगा

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। खुद को गढ़ना होगा अपनी तकदीर से , अब तुम को, खुद ही लड़ना होगा। तुम हाथों की , कठपुतली नही। अपने अस्तित्व को, खुद ही गढ़ना होगा। खुद ही लड़ना होगा। अपनी तकदीर से , अब तुम को, युगों- युगों से , हाथों के कारागृह बदलते आये है। तुम को कैसे जीना है। यह सीखाने वाले, बस नाम बदलते आयें है। अपने नाम को, नारी तुम…. आयाम नये भर दो। खोखले आडंबरों पर  , पलट अब वार जरा कर दो। खुद को…

मिट्टी के घर

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जिंदगी खेल- खेल में , मिट्टी के घर बनाती है। और दूसरे ही पल , गिरते ही, जिंदगी बदल जाती है । जिंदगी  खेल -खेल में , मिट्टी के घर बनाती है। कितनी हसरतों से, सहेज कर सपनों को, महलों को धीरे -से थपथपाती है। नन्ही -सी एक ठेस से, रेत -सी जिंदगी की  तस्वींरें बदल जाती है। जिंदगी खेल- खेल में,  मिट्टी के घर बनाती है। हर बार बिखर के,  फिर से , सपने सहेजती है। जिंदगी के खेल में, रेत- सी…

क्या ढूंढ रहे हैं

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जो जीवन की,साथर्कता बतलायें।मानव जीवन के ,सोपानों को,सिद्ध कर जायें ।नई सोच से,नई लग्न से,जीवन के आयाम बनायें । ऐसा ही कुछ ढूंढ रहे है। हर मुश्किल से जा टकरायें।हिम्मत बांध खडा हो जायें। झूठ के सौ पैर हुए,….तो क्या?सच के साथ अडिग रह जायें। सच्चा प्यार हो दिलों में,ढोंग न दिखावा हो । चेहरों के अनगिणत मुखौटों में,जो चेहरा एक चेहरे वाला हो। ऐसा ही कुछ ढूंढ़ रहें है। नालागढ़, हिमाचल प्रदेश