दोहे

डॉ.ममता बनर्जी “मंजरी”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। दुनिया मायाजाल है, हम हैं मीन समान। फँसना तय है जाल में, बनें अगर अनजान।। मछुआरा तैयार है, फैलाने को जाल। रहना चौकन्ना हमें, लाख चले वह चाल।। यश-वैभव धन धान्य का, होवे लोभ हजार। मन में संयम बाँध कर, बने रहो अविकार।। हम आए जिस हाल में, जाना है उस हाल। मद माया अरु मोह है, निरा एक जंजाल।। आए हम परदेश में, यहाँ न अपना धाम। जबतक तन में साँस है, कर्म करें अठ याम।। मातु-पिता के चरण में, रहे सदा…