करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

मर्यादाओं के अवसान से उपजती हिंसक मानसिकता

डा. हिमेंद्र बाली ‘हिम’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। समाज संस्कति और सभ्यता का समन्वित स्वरूप है। संस्कृति मानव चिंतन का वह प्रवाह है, जो युगों से पीढ़ी दर पीढ़ी धरोहर स्वरूप बहता रहा है। संस्कृति संस्कारों की वह बपौती है, जो संस्कारों से संवरती है और पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखती है। सभ्यता मानव का बाहरी आवरण है, जो संस्कृति की प्राण वायु से जीवित रहती है। आज के द्रुतगामी भौतिक जगत में सामाजिक विघटन की विद्रूपता संस्कति के अवसान की आहट है। आज के तथाकथित विकासवादी…

अकेला सफर (लघु कथा)

डा हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। दरवाजा खोला तो बेटा बहू सामने थे। पिता जी नौकर के साथ आत्मीय संवाद में मशगूल थे। चेहरे पर बरसों बाद चमक लौट आई थी। देखो बेटा! मजबूरी भी आदमी को क्या बना देती है। कभी इसके बाप दादाओं के बास सैकड़ों बीघा जमीन थी। कह रहा है कि हमारी जमीदारी मशहूर थी। ठाकुर लोग भी कतराते थे। समय का फेर है, आज न जमींदारी रही न रुतबा…..। पिता कहे जा रहे थे और बेटा बहू को उनका नौकर के साथ ऐसी…