मुखाग्नि 

डॉ0आनंद सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। उससे बात करना अच्छा लगता था वह मेरे नज़दीक था जो मैं सोचता था उससे अलग वह सोचता था कहता था, मैं तुझे तराश देता हूँ कुछ अलग सोचकर मुझसे हर बात पर पूछता  था तुम यह क्यों करते हो क्यों सुबह की नींद को नष्ट करते हो कष्ट को क्यों आमंत्रण देते हो क्यों जीवन नहीं जीते हो तुम उसकी बातों का कोई जवाब न था पास मेरे वह मेरा पथ प्रदर्शक था वह मेरी कमियों को जानता था वह मुझसे हर बात…