सोच

डाॅ.वाणी बरठाकुर ‘विभा’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सोच में कभी बहार आते जब चारों ओर सब खिल उठें .. सुखों की नदियाँ बहे … सावन की बूँदे गिरें…. दिल भी खुशी से झूम उठे । बादल घिरे …मोर भी नाचे मन – वन महक उठे । हर सोच की हवा परिमल लिए बहने लगे । कभी सोच में तूफान आये । ले जाये मन को उच्च शिखर पर जगा कर कोई जुनून । आविष्कार होता है अनमोल …अजूबा चीज । कभी ध्वंस की कालिमा से कर दे नष्ट ….नासूर ।…

एक चिट्ठी की आवाज़

डाॅ. वाणी बरठाकुर ‘विभा’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। छोटू भुनभुना कर पढ़ रहा है, तभी पैकेट के अंदर से आवाज आयी। ऐ छोटू! इससे आगे भी तो पढ़। मैं हूँ मैं….. इस लिफ़ाफ़े के अंदर। छोटू ने लिफाफे के अंदर हाथ डालकर देखा, एक कागज़ का टुकड़ा मिला और उस कागज़ पर कुछ लिखा हुआ है। उसे समझ में नहीं आ रहा है। कागज बोल उठा-छोटू मैं हूँ मैं। मैं चिट्ठी हूँ। मुझे पता है, तुम मुझे सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा समझ रहे हो और नहीं तो क्या, तुम्हें…

जीवन

वाणी बरठाकुर “विभा”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जीवन को समझो अब तुम भी जीकर हँसते जाना है। चाहे कुछ भी हो जाए पर, अब हर जख्म छिपाना है। आए कोई मुश्किल फिर भी, तुमको आगे आना है। अगर अँधेरा होवे पथ पर, दीपक एक जलाना है।। तल गेरेकी, तेजपुर शोणितपुर, असम

बेटी

वाणी बरठाकुर “विभा”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पायल की छमछम सुनो घर बन जाए धाम । मत बाँधों तुम बेड़ियाँ, बेटी करती नाम ।। बेटी करती नाम, पूर्ण करती हर आशा। देंगे यदि हम साथ, बढ़ेगी भी प्रत्याशा।। बेटी इक उपहार, करो मत उसको घायल। मधुर बजे झंकार, सुनो रे छम छम पायल।। तल गेरेकी, तेजपुर शोणितपुर, असम