तड़पते लोग बिलखते परिजन, जिम्मेदार  कौन ?

आशुतोष झा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। भारतीय संविधान में मूल अधिकारों का हनन उस समय एक संगीन मामला बन जाता है, जब परिवार में किसी की मौत हो और उसके अंतिम दर्शन तक न हो। मीडिया और सोशल मीडिया पर दर्द विदारक रिपोर्टो ने क्रूरतापूर्ण रवैये के इस प्रचंड रूप का आये दिन वर्णन किया है, लेकिन सिस्टम का इसपर भी कोई प्रभाव पड़ता नही दिखता। वैसे देखा जाय तो ऐसे कितने परिवार होगे, जिनके अपने अस्पताल गये तो फिर उनसे पुनः भेंट तक नही हुई। यह कैसी व्यवस्था और…