“मां”

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जब भी थकता हूं, तुम्हे ढूंढता हूं मां। जब भी हारता हूं, तुम्हे पुकारता हूं मां। तुम अब आती नहीं, तुम्हारी याद आती है। तुम अब बुलाती नहीं, तुम्हारी आवाज़ आती है। खोया था दुनियादारी में, पर तुम खास थी मां। न पहचान सका तुम्हारी कीमत, जब तुम पास थी मां। घूमता फिरता हूं, ढूंढ़ता फिरता हूं तुम कहीं दिख जाओ,मिल जाओ मां। हैरान होता हूं, परेशान होता हूं क्यूं रूठ गई हो? एक बार मान जाओ मां। कुछ तो मुझे बताओ मां एक…

मलाल

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बात कई वर्ष पुरानी है, परन्तु आज भी याद आती है तो मन को कचोटती है। दीवाली से चार-पांच दिन पहले छोटी बहन का फोन आया था। दीदी! अम्मा आपको याद कर रही हैं, उनका आपसे मिलने का बहुत मन है। यदि अा सको तो भाई दूज पर घर अा जाना। उनकी तबियत भी कई दिन से ठीक नहीं है। मैंने घर पर फोन मिलाया, अम्मा से बात की। उनको समझाने की कोशिश की, कि इस बार मेरा जाना सम्भव नहीं हो पाएगा। सातवां…

साहित्य की साधना से शब्दों की जादूगर बनी अर्चना त्यागी

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। खेतीहर, लेकिन शैक्षिक पृष्टभूमि के परिवार में जन्मी अर्चना त्यागी द्वारा की जा रही साहित्य की सेवा शायद उनके खून में रची-बसी शैक्षिक अनुवांशिकता ही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद स्थित छोटे गांव महरायपुर में विद्यानंद विद्यार्थी व रामेश्वरी देवी की पुत्री रूप में जन्मी अर्चना त्यागी के दादा पृथ्वी सिंह व ताऊ जयनन्द त्यागी एडवोकेट छपार के जयभारत इंटर कालेज के लम्बे समय तक प्रबन्धक रहे हैं। अर्चना त्यागी के अनुसार पठन-पाठन, लेखन व रचनात्मक कार्यों में उनकी विशेष रूचि रहती…

हालात

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कराह रही है धरती नि शब्द आसमान है। प्रकृति के जुल्म से बेबस हर इंसान है। हर तरफ है चीख पुकार सिसकते लोगों की दरकार। जिसके दर पे होती थी फरियाद तालों में बंद वो भगवान है। चिंतन है जरूरी अब मनन भी ज़रूरी है। क्यों ऐसी हालत हुई ? किन कर्मों की सजा मिली है। छूटी हाथ से अब कमान है। रुकेगी कहां जाकर ये रोग की सुनामी। बस इलाज और दवा ढूंढ रहे सभी जा रही कितनी निर्दोष जान हैं। आओ मिलकर…