बीते हुए कल  

अमित डोगरा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत घूम। तुमसे अपने हर दर्द का हिसाब लूंगा । अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत हंस तुमसे अपने हर आंसू का हिसाब लूंगा। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत सो तुमसे अपनी हर नींद का हिसाब लूंगा। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर अपनी झूठी शान पर मत इतरा, तुमसे अपने हर अपमान का हिसाब लूंगा। कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश