सामंती लाठी से पिटता लोकतंत्र

प्रभाकर सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। लोकतंत्र और सामंत जब आमने -सामने आते हैं तो दोनों में टकराहट स्वाभाविक है। लोकतंत्र कहता है समानता और सामंत कहता है साम या समानता का अंत। लोकतंत्र कभी हिंसा में विश्वास नहीं करेगा, वह मत को बहुमत बनाकर फ़ैसले लेना चाहेगा तो वहीं सामंत कभी नहीं चाहेगा कि समानता हो और असामनता स्थापित करने के लिए अपनी लाठी भाँजता रहेगा। सामंतवाद डरा धमकाकर लोकतंत्र के चारों पायदानों के सिर पर बैठकर लोकतंत्र को सामंती हथियारों से चलाता रहता है। मतलब गाड़ी है लोकतंत्र की,…

प्रतापगढ़, हाथरस मामला: विश्वसनीयता खो चुकी है उत्तर प्रदेश सरकार, लोगों को सरकार पर, सरकार को न्यायपालिका पर भरोसा नहीं

प्रभाकर सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हाथरस की भोर का शोर आप सब सुन रहे है। ब्रम्हमुहूर्त में उठा धुआँ कई आँखों में पानी लाया। कुछ आँखों में सम्वेदना का पानी था। कुछ आँखों में किरकिरी से उठा पानी था। पता नहीं किस बात की जल्दबाज़ी थी। कि एक साधारण स्थिति को असाधारण बना डाला। गाँव को क़िला बना दिया। ज़ाहिर है कुछ छिपाने की कोशिश में। गलती मानी नहीं गयी छिपाने की कोशिश हुई, एक घटना को दूसरी घटना जा दृष्टांत देकर टालने की कोशिश सम्वेदनहीनता की पराकाष्ठा है।सिलसिलेवार लोकतांत्रिक…