हिंदी की प्रयोजनमूलकता : विविध आयाम विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी 04 अप्रैल को

डॉ. शैलेश शुक्ला, कर्नाटक।  विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस, डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महु (मध्य प्रदेश) न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी की प्रयोजनमूलकता : विविध आयाम विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी 04 अप्रैल को सुबह 11 बजे (भारत), सुबह 9:30 बजे (मॉरीशस) डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महु (मध्य प्रदेश) की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी। विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र के सान्निध्य में आयोजित वेब संगोष्ठी…

वैदिक इतिहास व परम्पराओं की साक्षी है सुकेत की राजधानी पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पश्चिमी हिमालय की सुरम्य नैसर्गिक आभा से सुशोभित मध्य हिमालय की पीरपंजाल पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसा पांगणा पौराणिक गणराज्य सुकुट् की राजधानी रहा है। वैदिक नदी पर्वतराज हिमालय की पुत्री शतुद्री के दायें तट पर स्थित यह क्षेत्र शाकम्भरी माता शिकारी व महामाया की सहचारिणी चौंसठ योगिनियों के अप्रतिम पर्वत शिखर शिकारी के अंचल में बसा है। पांगणा रावी व सतलुज के मध्य स्थित पौराणिक जालंधर पीठ का लब्धप्रतिष्ठ स्थान रहा है। सतलुज घाटी का यह रमणीय स्थल महाभारतकालीन घटनाओं, शिल्प…

सत्य बोलें, प्रिय बोलें, कम बोलें

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। भीड़ के पीछे चलते हुए हम महज़ भीड़ का हिस्सा बन कर रह जाते हैं। सफलता के लिए जरूरी है कि हम नये रास्तों पर चलें। केवल हमारे भीतर का डर हमें अन्जान रास्तों पर चलने से रोकता है। एक बार जब इस डर को छोड़ देते हैं तो पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ती। लेखक राबर्ट फ्रॉस्ट कहते हैं कि हमेशा दो राहें सामने होती हैं। आप उस राह पर बढे़ं, जिस पर कम लोग चलते हैं। इसी से सब बदल…

होम वर्क कैसे करें…..?

दिलीप भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय तमलाव में विद्यार्थियों को समय के सदुपयोग पर विचार प्रकट करने गया था। वार्ता के बाद एक छात्रा ने कहा कि दिलीप अंकल आपने पढ़ने के बाद पढ़े हुए को लिखने के लिए कहा, ताकि नोट्स बन जाएं, रिवीजन के समय काम आयेंगे। रटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अंकल! किताबें तो सरकार दे देती है, लेकिन हमारे पास कॉपी तो हैं ही नहीं, होम वर्क भी नहीं कर पाती। नोट्स बनाने का तो हम गांव के गरीब बच्चे सोच भी…

यूँ हीं नहीं कोई राजनीति का चाणक्य बन जाता 

आशुतोष झा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बदलते हुए बंगाल की आहट सुनाई दे रही है कि जनसैलाब बदलाव चाहता है। राजनीतिक गलियारे खूब चकाचौंध है, जबकि भूख, गरीबी ,वेरोजगारी व महगाई चरम पर है। नंदीग्राम का रोड शो काफी रोचक रहा है। तृणमूल और बीजेपी की सीधी लड़ाई प्रायः सभी जगहो पर है। एक तरफ बीजेपी अपने दृढ़ विश्वास से लवरेज होकर दमदार काम का बखान अपने शब्दों में करती है। दूसरी तरफ अपने किये गये कार्यो का  व्यौरा देकर बीजेपी को कोसा जाता है, लेकिन विश्वास की कमी साफ…

कान्हा के साथ खेली होली

डॉ.शम्भू पंवार, नई दिल्ली। रंगों का त्योहार होली बड़े उमंग व उत्साह से  मनाया गया। होलिका पूजन के लिए महिलाओं ने नये-नये परिधानो में सज संवरकर होलिका स्थल पर पहुचकर परम्परागत रूप से  होलिका की पूजा अर्चना की। उन्होंने होलिका को धागा बांधकर अपने परिवार की सुख समृद्धि की एवं भारत को वैश्विक महामारी से मुक्त करने की कामना की। करोना के संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के कारण त्योहार की रौनक फीकी रही। होलिका दहन के समय भी महिलाओ एवं पुरुषों की भीड़ कम देखने को मिली। होलिका दहन उत्साह…

आस्ट्रेलिया एवं इंग्लैण्ड के चार विश्वविद्यालयों में सीएमएस की छात्रा अदिति जालान का चयन

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल गोमती नगर द्वितीय कैम्पस की मेधावी छात्रा अदिति जालान ने उच्चशिक्षा हेतु आस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी एवं इंग्लैण्ड की लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी, लाॅफबोरो यूनिवर्सिटी व यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट लंदन में चयनित होकर लखनऊ का गौरव बढ़ाया है। सीएमएस के मुख्य जन सम्पर्क अधिकारी हरि ओम शर्मा ने बताया कि इस वर्ष अभी तक सीएमएस के 45 से अधिक छात्र अमेरिका, इंग्लैण्ड, कैनडा, आस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर, जर्मनी आदि विभिन्न देशों के ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालयों में चयनित हो चुके है, जिनमें से अधिकतर को स्काॅलरशिप प्राप्त हुई है।

मृगतृष्णा

वाणी बरठाकुर “विभा”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हमारी जिन्दगी का आधार मृगतृष्णा सी चाहत है, कि कहीं कुछ मिल जाए। ना जाने चाहत की प्यास बुझाने के लिए उम्र के कितने साल गुजार लिए। अगर हमारे अंदर तृष्णा नही होती तो क्या हम जी पाते ? एक तरफ से देखा जाए तो दुनिया ही मरुस्थल है। हम मनुष्य रोज प्रतियोगिता में उतरते हैं, शायद कुछ मिल जाए। जिन्दगी सुधर जाए, जैसे प्यासे मृग के पीछे भटकते हम कुछ कर दिखाने की तृष्णा बुझाने के लिए हमेशा अपना अस्तित्व भूल जाते…

महादेवी वर्मा चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बालपने से साहित्य रचा, हिन्दी का सम्मान। छायावादी खंब है, महदेवी का गान।। अधुना मीरा जय महदेवी। हिंदी भाषा  तुमने  सेवी।।1 मार्च छब्बीस उन्निस साता। फरुखावादी जन हरषाता।।2 सात पीढ़ि से आस लगाई। सुंदर कन्या घर में आई।।3 बाबा बाबू बांक बिहारी। झूम उठे थे खुशियां भारी।।4 माता हेमा आज्ञा कारी। धरम परायण शाकाहारी।।5 गोविंद वर्मा पिता कहाते।  प्रोफेसर कालेज पढाते।।6 नाना थे ब्रज भाषा ज्ञाता। लिखते पढ़ते रचते गाथा।।7 बेटी को शाला भिजवाया। छठवीं कक्षा पास कराया।।8 बालपने में ब्याह रचाई। छोड़…