यह कैसा बैशाख

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जिंदगी की बैसाखियों पर, चलकर यह आज, कैसा बैशाख  आया। न आज भांगड़े हैं। न मेले सजे हैं । फसल कटने -काटने का , किसे ख्याल आया।। ज़िंदगी की बैसाखियों पर, चलकर आज, कितना मजबूर बैशाख आया।  गेहूँ की फसल का ,  घर के, आंगन में आज न ढेर आया । कोरोना विस्फोटक हुआ। मेलों की रौनक का , न किसी को चाव रहा। जिंदगी को , पिछले साल से, कहीं ज्यादा मजबूर पाया। दिहाड़ी -दार अपना दर्द , ढोल की तान पर…

सुदामा चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कृष्ण सुदामा प्रीत को, जाने सब संसार। नाम प्रेम से लीजिए, होवें भव से पार।। मित्रों की जब होती बातें। कृष्ण सुदामा नही भुलाते।।1 जात पांत ना दीन अदीना। खेलत संगे प्रेम अधीना।।2 बाल पने में करी पढ़ाई। सांदीपन के आश्रम जाई।।3 बालक से फिर बन तरुणाई। छोड़ खेल गृहस्थी सिर आई।।4 नाम सुशीला भोली भाली। आज्ञाकारी थी घर वाली।।5 रुखी सूखी रोटी खाती । गीत भजन में समय बिताती।।6 फिर घर में बच्चे भी आये। भक्त सुदामा मांगत खाये।।7 जो भी मिलता…

मंगलमय नव वर्ष रहे

डॉ.अवधेश कुमार “अवध”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। रजत रबी रंजित फसलों से, घर – आँगन  है भरा – भरा। सूर्य – धरा  की समीपता से, मलिन बदन भी हरा – हरा। मंजरियों  से  लदे  आम्र  में, नव कोंपल उत्कर्ष रहे। मंगलमय नव वर्ष रहे।। वर्षा – जाड़ा  से उत्तम ऋतु, चैत्र   मास    में     आई  है। दीन-दुखी  का तरुवर नीचे, भी  जीवन     सुखदाई  है। सकल सृष्टि के सचराचर में, कहीं न कलुष अमर्ष रहे। मंगलमय  नव  वर्ष  रहे।। मातृ  शक्तियाँ  पूजी  जातीं, घर – घर   होता   आराधन। सभी…

नव संवत् मंगल भवः (गुड़ी पड़वा 2078)

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। चैत्र शुक्ला प्रतिपदा, शुभदिन का सम्मान। प्रातः मंगल गाइये, कहत हैं कवि मसान।।1 संवत सत्तर आठ में, दो का होता आन। विक्रम तेरे राज का, पंछी करते गान ।। 2 सत्य धरम सुख न्याय का, दुनिया करे बखान। पुरी अवंती देश का, राजा था बलवान ।।3 होली की पिचकारियां, पिया मिलन की आस। फसले खेत बहार है, मास चैत बेसाख ।। 4 नये साल के आवते, फूले फूल पलाश। पतझड़ से कोपल चली, नव पल्लव कीआस ।। 5 आमों की बगियां फली, कोयल…

बार्डर v/s कोरोना

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ओह! ओह! ओह! क्वारंटाइन हुए जाते हैं। टेस्ट डराते हैं । रिपोर्ट जब आती है । पोजिटिव कर जाती है। कि कोरोना कब जाओंगे । कोरोना कब जाओंगे ।। लिखो क्या वैक्सीन से जाओंगे।। तेरे साथ हर घर सूना -सूना है । अस्पताल के डॉक्टर ने , वहां की नर्सों ने, हमें रिपोर्ट में लिखा है । कि हमसे पूछा है….. किसी की हाफ़ती सांसों ने, किसी की खांसी ने , किसी की छीकों ने, किसी के इंफेक्शन ने , किसी के कचरे…

चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से, घोड़े पर आरूढ़ होकर आएगी माता हाथी पर होगा प्रस्थान

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आदि शक्ति का सर्वलोकप्रिय महापर्व चैत्र बासंतिक नवरात्रि का शुभारंभ 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से होने जा रहा है। अनेकों वर्षों की भांति इस वर्ष भी शुभ एवं दुर्लभ संयोगों से युक्त नवरात्रि का यह महापर्व सभी भक्तों के जीवन को तेजोमय एवं एश्वर्य से युक्त बनाए।  13 अप्रैल को ही घट स्थापना के लिए विशेषत: शुभकारक रहेगा। इस दिन प्रातः काल सर्वार्थ सिद्धि योग 06: 09 मिनट से लेकर दोपहर के 02: 23  मिनट तक रहेगा। इसी दिन राक्षस नामक सम्वत्सर तदनुसार 2078…

कोशिश जारी रहेगी

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हम होंगे कामयाब एक दिन। अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के दोनों गुटों में सुलह समझौता करके मजबूत बनाने की कोशिश जो हमने करीब ढाई वर्ष पहले राष्ट्रीय समता महासंघ के संस्थापक के रूप में शुरू की थी उसमें अब तक भले ही हमें सफलता नहीं मिल पाई है, पर इन वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों के कूर्मि मित्र मेरे विभिन्न लेखों, पोस्ट से जागरूक और सावधान अवश्य हुए हैं। आने वाले समय में यह और ज्यादा धारदार रूप लेंगे ऐसा…

क्षेत्रवाद

सलिल सरोज, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। क्षेत्रवाद एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगों के एक वर्ग के बीच एक अनूठी भाषा, संस्कृति आदि की विशेषता है, जो कि वे मिट्टी के पुत्र हैं और उनकी भूमि में हर अवसर बाहरी लोगों के वनिस्पत पहले उन्हें दिया जाना चाहिए। ज्यादातर मामलों में यह समीचीन राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जाता है, लेकिन यह हमेशा जरूरी नहीं। भारत में तमिलनाडु में शुरू किए गए द्रविड़ आंदोलन से क्षेत्रवाद का पता लगाया जा सकता है। आंदोलन ने शुरू में दलितों, गैर-ब्राह्मणों…

अतीत का अंश

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कल कोई बचपन मरा है” तब खडा है आदमी वक्त के अहसान में जिंदा पडा ये आदमी। कब्रे मंजिले की फकत, निर्माण की भट्टी में तप किस सिलसिले की फिक्र में किसने गढा ये आदमी। दर्द,सोहरत आंसुओं के बारिशों में भींगता सदियों से लेकर अब तलक क्यों चलता रहा ये आदमी? धर्म का ओढे कफन और कर्म की चादर लिये जज्बात की इन आंधियों में ढलता रहा ये आदमी। सत्य की इसे फिक्र है? पर झूठ की इसको जरुरत पेट की भीषण तपन…

बदलते इंसान

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जब सब समझाए तो समझ जाना चाहिए, जो छोड़ चुके हैं अब उनको छोड़ ही देना चाहिए। उतर चुके हैं जो दिल से उनको जीवन से अब उतार फेंकना चाहिए। जो जाना चाहते हैं जीवन से उनको अब जाने ही देना चाहिए। बदलते मौसम के रंगों की तरह जो बदलते है अब उनको बदलने देना चाहिए। युवा कवि और लेखक कांगड़ा हिमाचल प्रदेश