अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के एकीकरण के लिए आॅनलाईन मीटिंग 21 जुलाई को

शि.वा.ब्यूरो, मुंबई। महासभा के एकीकरण करने के लिए आॅनलाईन गूगल मीट पर 21 जुलाई दिन बुधवार को संध्या 7.00 बजे से 8.30 बजे तक एक अति आवश्यक आॅनलाईन मीटिंग आयोजित की गई है। अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी कूर्मि कौशल किशोर आर्य ने सभी उक्त बैठक में समय से भाग लेने का आहवान किया है। भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ने कहा है कि भारत में कूर्मि समाज के सबसे 127 वर्ष पुराने मातृ संगठन अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा की स्थापना सन…

कुर्मी क्षत्रिय अन्नदाता रथ यात्रा की तैयारी हेतु अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश की मंडल एवं जिला कमेटी की एक बैठक रामाधीन सिंह लॉन में

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश की मंडल एवं जिला कमेटी की एक बैठक कुर्मी क्षत्रिय अन्नदाता रथ यात्रा की तैयारी हेतु रामाधीन सिंह लॉन डालीगंज लखनऊ में 26 जुलाई दिन सोमवार समय 11:00 बुलाई गई है, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश कटियार एवं प्रदेश अध्यक्ष पूर्व सांसद बालकुमार पटेल एवं कई प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन पटेल ने कहा कि सभी मंडल एवं जिला पदाधिकारी अनिवार्य रूप से इस बैठक में समय पर पहुंचकर रथ यात्रा के…

अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा की 17-18 जुलाई को होने वाली आम सभा स्थगित

शि.वा.ब्यूरो, उन्नाव। अंग्रेजी में लिखे सोशल मीडिया पर प्रसारित आरएस कनौजिया के संदेश के अनुसार पूर्व निर्धारित 17-18 जुलाई 2021 को आयोजित होने वाली अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा की आम सभा को स्थगित कर दिया गया है। उक्त पर आने वाली प्रतिक्रियाओं के अनुसार अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के कथित राष्ट्रीय महासचिव आरएस कनौजिया ने इस आम सभा को अपने खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव के मुहिम से भयभीत होकर स्थगित किया है। इसके विपरीत आरएस कनौजिया ने आम सभा को स्थगित करने का कारण प्रशासन द्वारा अनुमति…

समाज के बुद्धिजीवियों से एक अपील

लवकुश पटेल एडवोकेट, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। समाज के पढ़े-लिखे चिंतनशील विद्वान साथियों! कभी आपने विचार किया है कि क्या कारण है कि 26 जनवरी 1950 को समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व व न्याय पर आधारित भारतीय संविधान के लागू होने के 71 साल बाद भी भारत के बहुसंख्यक समाज को उसका हक उसका अधिकार क्यों नहीं मिला? कारण स्पष्ट है, आजादी से आज तक के सत्तासीनों की बेईमानी। इसी बेईमानी के कारण ही संविधान में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था होने के बाद भी आज तक…

बदलाव का वक्त

नागेन्द्र कुमार सिंह कनौजिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। यह सार्वभौमिक सत्य है कि निरंतर बदलते समय से तालमेल बिठाने के लिये जो व्यक्ति, जो संगठन, जो समाज भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने अंदर बदलाव नहीं लाता है, वह निश्चित रूप से पीछे छूट जाता है। सामाजिक संगठनात्मक गतिविधियों से सरोकार होने के कारण बात कुर्मी संगठनों पर केंद्रित है। हम सब बड़ी शिद्दत से महसूस करते हैं कि देश के धार्मिक संगठनों में परिवर्तन स्वीकार न करने की प्रवृत्ति से नकारात्मक जड़ता व्याप्त हो गयी है…

समाज के लिए अभिशाप है दहेज

कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।      दहेज का प्रारंभ कब हुआ इसका सही प्रमाण और कारण अब तक नहीं मिला है। दहेज प्रथा के बारे में अब तक जो भी शोध हुए हैं, वे अधूरे ही है। कुछ लोग कहते हैं कि मिथिला (बिहार) के राजा और सीता के पिता महाराज जनक ने अपने पुत्री सीता को विदा करते समय बहुत से उपहार स्वरुप आभूषण, हीरे -जवाहाराज, हाथी-घोडे़ अपने दामाद राम और समधी राजा दशरथ को दिये थे, वहीं से दहेज की शुरुआत हुई। हो सकता है…

कूर्मि मित्रों के नाम संदेश 

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 127 वर्ष पुराने कूर्मि समाज के प्रमुख संगठन अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा समेत देश के अन्य कूर्मि संगठनों की ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। जब हमारा मातृ संगठन अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी एक बार पद पर आसीन होने के बाद आजीवन पद छोड़ना नहीं चाहते और कूर्मि सेवा करने के नाम पर सिर्फ अधिवेशन करके धन की बर्बादी कर सेवा करने के नाम पर अपना पीठ खुद ही थपथपातें हैं तो देश के अन्य कूर्मि संगठनों के…

बेरोजगारी की समस्या

नरेंद्र कुमार शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।      यूँ तो वर्तमान समय संपूर्ण मानव जाति के सबसे कठिन और चुनौती पूर्ण है।लेकिन उसके बाबजूद आज भारतवर्ष अनेक समस्याओं से जूझ रहा है जिसमें पर्यावरण प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, छुआ-छूत,जाति,धर्म ,घूसखोरी और दहेज़ प्रथा जैसी समस्याएँ हैं, लेकिन अगर इन सभी समस्याओं के निराकरण बात की जाए तो इसका एक ही विकल्प है “हर हाथ के लिए काम “अर्थात उपरोक्त सभी समस्याओं का कारण है, बेरोजगारी।        आज बेरोजगारी विकराल रूप धारण कर चुकी है।बेरोजगारी एक ऐसा दानव बन…

पिता एक छांव (फादर्स डे पर विशेष)

निक्की शर्मा “रश्मि”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। रिश्ते! जिसकी बुनियाद बहुत गहरी होती है। इतनी गहरी, जिसे समझा नहीं, महसूस कीया जा सकता है। नई पीढ़ी शायद रिश्तों की गहराई को समझने में नाकाम हो, पर उनकी खासियत और अनूठेपन को वह भी मानती है। रिश्ते निभाने वह भी इसी बुनियाद से सीखती है। रिश्तों से ही तो बनता है हमारा खूबसूरत सा परिवार, भरा-पूरा परिवार, बस इसी रिश्ते की डोर को थाम कर रखना होता है। रिश्तों की डोर को बांधकर हम सब सुरक्षित महसूस करते हैं, सुकून मिलता…

आदिवासियत नेतृत्व के पर्यायवाची थे बिरसा मुंडा (जन्मदिन विशेष)

अनिल चौधरी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आदिवासियों की विरासत को बचाने के लिए बिरसा मुंडा का योगदान अतुलनीय है। आदिवासियों के सबसे बड़े आदर्श बिरसा मुंडा हैं उन्हें धरती आभा माना जाता है वे आदिवासियों के भगवान हैं। भारतीय जमींदारों और जागीरदारों तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में आदिवासी समाज झुलस रहा था। बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को शोषण के चक्र व्यूह से मुक्ति दिलाने के लिए तीन स्तरों पर उन्हें संगठित करना आवश्यक समझा। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक स्तर पर आदिवासियों में चेतना की चिंगारी सुलगा दी…