ग्वाल समाज और टेसू राजा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। शरद पूर्णिमा टेसू राजा और झेंझी रानी के विवाह का दिन है। महाभारत काल में यह छोटी सी प्रेम कहानी सिर्फ पांच दिन ही चल पाई, लेकिन इसकी गूंज आज भी गीतों के माध्यम से सुनाई देती है। किवदंती है कि भीम के पौत्र बर्बरीक (टेसू) को महाभारत का युद्ध देखने आते समय झांझी से प्रेम हो गया था। उन्होंने युद्ध से लौटकर झांझी से विवाह करने का वचन दिया था, लेकिन युद्ध मे हारने बालो की ओर से लड़ने के निश्चय ये…

विजय दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजा का महत्व

मोहन लाल वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। विजय दशहरा पर्व पर शस्त्र पूजा करने का प्रचलन है। शस्त्र निष्क्रिय होते हुए भी सक्रिय होता है। मतलब अगर वो कहीं किसी आलमारी में पड़ा पड़ा जंग खा रहा हो तो भी अपना काम करता रहता है। उसकी मौजूदगी ही शत्रुओं के बुरे और कुत्सित विचारों को नष्ट करने के लिए काफी होती है। दुनिया में अशांति इसलिए है, क्योंकि सज्जनों ने शस्त्रों का त्याग कर दिया है और दुर्जन लोग तरह-तरह के शस्त्रों से लैस हो रहें हैं। यही वजह है…

वक्त की मांग है  जातीय आधारित जनगणना

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। 1871 और 1931 के बाद जातीय आधारित जनगणना जानबूझकर कांग्रेस, भाजपा समेत अन्य केन्द्र सरकार ने नहीं कराई है, क्योंकि ये सभी प्रमुख राजनैतिक दल नहीं चाहते हैं कि देश के 90% मूलनिवासी बहुसंख्यक बहुजन समाज को उनकी वास्तविक आबादी का पता चले, क्योंकि जैसे ही संबंधित जातियों को उनकी आबादी का पता चलेगा, वैसे ही वे आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व दिये जाने और अपने हक अधिकार और सुविधाएं के लिए दबाव बनाएंगे। सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की या किसी…

जनसंख्या नियंत्रण मुद्दा ही नहीं ज़रूरत भी

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। यह कहने की बात नहीं है कि बढ़ती आबादी हमारी आज़ादी को सीमित करती आ रही है। इंसानों के बढ़ने से संसाधन कम हो रहे हैं। रोजगार के अवसर घट रहे हैं और अपराध बढ़ रहे हैं। अराजकता का माहौल स्थायी हो गया है। ऐसे में जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए यदि कोई कदम उठाया जाता है तो उसका स्वागत करने के बजाय राजनीति करना कितना दुर्भाग्यपूर्ण है ? सभी विपक्षी दल एक जुट होकर कानून का विरोध कर रहे हैं। उन्हे बढ़ती…

अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के एकीकरण के लिए आॅनलाईन मीटिंग 21 जुलाई को

शि.वा.ब्यूरो, मुंबई। महासभा के एकीकरण करने के लिए आॅनलाईन गूगल मीट पर 21 जुलाई दिन बुधवार को संध्या 7.00 बजे से 8.30 बजे तक एक अति आवश्यक आॅनलाईन मीटिंग आयोजित की गई है। अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी कूर्मि कौशल किशोर आर्य ने सभी उक्त बैठक में समय से भाग लेने का आहवान किया है। भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ने कहा है कि भारत में कूर्मि समाज के सबसे 127 वर्ष पुराने मातृ संगठन अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा की स्थापना सन…

कुर्मी क्षत्रिय अन्नदाता रथ यात्रा की तैयारी हेतु अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश की मंडल एवं जिला कमेटी की एक बैठक रामाधीन सिंह लॉन में

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश की मंडल एवं जिला कमेटी की एक बैठक कुर्मी क्षत्रिय अन्नदाता रथ यात्रा की तैयारी हेतु रामाधीन सिंह लॉन डालीगंज लखनऊ में 26 जुलाई दिन सोमवार समय 11:00 बुलाई गई है, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश कटियार एवं प्रदेश अध्यक्ष पूर्व सांसद बालकुमार पटेल एवं कई प्रदेश पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन पटेल ने कहा कि सभी मंडल एवं जिला पदाधिकारी अनिवार्य रूप से इस बैठक में समय पर पहुंचकर रथ यात्रा के…

अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा की 17-18 जुलाई को होने वाली आम सभा स्थगित

शि.वा.ब्यूरो, उन्नाव। अंग्रेजी में लिखे सोशल मीडिया पर प्रसारित आरएस कनौजिया के संदेश के अनुसार पूर्व निर्धारित 17-18 जुलाई 2021 को आयोजित होने वाली अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा की आम सभा को स्थगित कर दिया गया है। उक्त पर आने वाली प्रतिक्रियाओं के अनुसार अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के कथित राष्ट्रीय महासचिव आरएस कनौजिया ने इस आम सभा को अपने खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव के मुहिम से भयभीत होकर स्थगित किया है। इसके विपरीत आरएस कनौजिया ने आम सभा को स्थगित करने का कारण प्रशासन द्वारा अनुमति…

समाज के बुद्धिजीवियों से एक अपील

लवकुश पटेल एडवोकेट, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। समाज के पढ़े-लिखे चिंतनशील विद्वान साथियों! कभी आपने विचार किया है कि क्या कारण है कि 26 जनवरी 1950 को समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व व न्याय पर आधारित भारतीय संविधान के लागू होने के 71 साल बाद भी भारत के बहुसंख्यक समाज को उसका हक उसका अधिकार क्यों नहीं मिला? कारण स्पष्ट है, आजादी से आज तक के सत्तासीनों की बेईमानी। इसी बेईमानी के कारण ही संविधान में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था होने के बाद भी आज तक…

बदलाव का वक्त

नागेन्द्र कुमार सिंह कनौजिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। यह सार्वभौमिक सत्य है कि निरंतर बदलते समय से तालमेल बिठाने के लिये जो व्यक्ति, जो संगठन, जो समाज भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने अंदर बदलाव नहीं लाता है, वह निश्चित रूप से पीछे छूट जाता है। सामाजिक संगठनात्मक गतिविधियों से सरोकार होने के कारण बात कुर्मी संगठनों पर केंद्रित है। हम सब बड़ी शिद्दत से महसूस करते हैं कि देश के धार्मिक संगठनों में परिवर्तन स्वीकार न करने की प्रवृत्ति से नकारात्मक जड़ता व्याप्त हो गयी है…

समाज के लिए अभिशाप है दहेज

कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।      दहेज का प्रारंभ कब हुआ इसका सही प्रमाण और कारण अब तक नहीं मिला है। दहेज प्रथा के बारे में अब तक जो भी शोध हुए हैं, वे अधूरे ही है। कुछ लोग कहते हैं कि मिथिला (बिहार) के राजा और सीता के पिता महाराज जनक ने अपने पुत्री सीता को विदा करते समय बहुत से उपहार स्वरुप आभूषण, हीरे -जवाहाराज, हाथी-घोडे़ अपने दामाद राम और समधी राजा दशरथ को दिये थे, वहीं से दहेज की शुरुआत हुई। हो सकता है…