मनुस्मृति में नारी की विस्मृति क्यों

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। इस तथ्य में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय सभ्यता में नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है। नारी का सम्मान सर्वोपरि है। वह सारी सृष्टि की पालक और जीवन दायिनी है। तो ऐसे कौन से कारण रहे होंगे, जिन्होंने नारी के वर्चस्व पर सवाल उठाते-उठाते उसे दीन-हीन और संस्कारों के नाम पर बेडियों चीनू कल-कल पानी पी ले में बंधी हुई एक वस्तु बना दिया। उसके अस्तित्व को नकारते हुए उसे दूसरे दर्जे कि प्राणी घोषित कर दिया कि बुरे…

निःस्वार्थ सेवा

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। दुनिया में सभी लोग कुछ न कुछ सेवा करते हैं, लेकिन अधिकतर लोग सेवा के बदले कुछ न कुछ पाना चाहते हैं, लेकिन भाग्यशाली वह हैं, जो निःस्वार्थ भाव से जरूरतमन्दों की सेवा करते हैं और मानवता की मिशाल बनते हैं। एक राज्य में ऐसा ही एक मंत्री था, जो लोगों की निःस्वार्थ सेवा करता था। एक दुर्घटना में मंत्री की आँखों की रोशनी चली गई। राजा ने उसे आराम के लिए मंत्रीपरिषद से विदाई दे दी। कुछ दिन बाद एक दूसरे राज्य…

क़ाबिल

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।         ग्रीस के स्पार्टा राज्य में पिडार्टस नाम का एक नौजवान रहता था। उसे बचपन से ही पढ़ने और नई-नई चीजें सीखने का बड़ा शौक था। अपने हमउम्र बच्चों की तरह शैतानियों में उसका मन नहीं लगता था। अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर वह कम उम्र में ही बड़ा विद्वान बन गया। एक बार उसे पता चला कि राज्य में प्रशासनिक कार्य हेतु 300 जगह खाली हैं। वह नौकरी की तलाश में था, उसने तुरन्त अर्जी भेज दी।…

सहनशीलता की मिसाल

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जापान के सम्राट यामातो के एक मंत्री ओ-चो-शान का परिवार सौहार्द के लिए बहुत मशहूर था। उनके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे, परन्तु उनके बीच एकता का अटूट सम्बंध था। उसके परिवार के सभी सदस्य साथ साथ ही रहते और एकसाथ ही खाना खाते थे। इस परिवार के किस्से दूर दूर तक फैल गये। इस परिवार के सौहार्द की ये बात जब सम्राट यामातो तक भी पहुँची। सत्य की जाँच के लिए एक दिन सम्राट स्वयं अपने इस बुजुर्ग मंत्री के…

एकता तथा शांति की पौधशाला हैं विद्यालय

डाॅ. जगदीश गाँधी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। विद्यालय शांति की पौधशालाएँ हैं। इन्हीं पौधशालाओं में बच्चों के मस्तिष्क में बचपन से ही शांति रूपी बीज को बोने के साथ ही एकता रूपी खाद और मानवता रूपी पानी से सींचकर उन्हें विश्व नागरिक के रूप में तैयार किया जाता है। हमारा मानना है कि युद्ध के विचार सबसे पहले मनुष्य के मस्तिष्क में पैदा होते हैं, इसलिए मनुष्य को शान्ति की सीख देने के लिए हमें मनुष्य के मस्तिष्क में ही शान्ति के विचार रोपित करने होंगे, जिसके लिए सबसे श्रेष्ठ…

नई रोशनी

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। एक गुरु अपने शिष्यों को प्रत्यक्ष उदाहरणों के माध्यम से ज्ञान की बातें सिखाया करते थे। एक बार उनका एक प्रिय शिष्य उनसे देर रात तक बातें करता रहा। शिष्य जब अपने कमरे में जाने के लिए सीढ़ियों से उतरने को हुआ तो सीढ़ियों पर अंधकार देखकर वह घबरा गया। अंधेरा इतना ज्यादा था कि हाथ को हाथ दिखाई नहीं दे रहा था। सी़ढिया उतारना तो बहुत बड़ी बात थी। शिष्य गुरु से बोला-गुरुजी! अंधेरे के कारण रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है,…

हर कूर्मि को अपने हिस्से की भूमिका सुनिश्चित करें

कूर्मि कौशल किशोर “आर्य”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कूर्मि समाज के विकास और मजबूती के लिए कूर्मि समाज के सबसे पुराने 1894 ई में स्थापित 126 वर्ष पुराने अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा में विभिन्न राज्यों में चलाये जा रहे विभिन्न कूर्मि संगठनों को विलय करके महासभा और कूर्मि समाज एक, संगठित और और मजबूत बनाने की लगातार कोशिश की जा रही है। ऐसे में हर कूर्मि को अपने हिस्से की भूमिका सुनिश्चित करनी चाहिए, क्योंकि एकता और अखंडता, संगठन के बल पर हम सभी तरह की सफलता और हक…

अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा का समापन 28 फरवरी को

शि.वा.ब्यूरो, विदिशा। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा मध्यप्रदेश के तत्वधान मे शिवाजी जयंती सप्ताह समारोह 19 फरवरी से शुरू होकर 28 फरवरी तक पूरे प्रदेश में मनाया जा रहा है। इसका समापन समारोह वाहन रेली के द्वारा त्योंदा में 28 फरवरी को किया जावेगा। कार्यकम के तहत समाज में व्याप्त कुरीतियों रूढ़ीवादी परम्पराओं, अशिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं युवाओ को आत्मनिर्भर बनाने संबंधी एवं समाज मे आपसी मतभेद द्वेष-भावनाओ से ऊपर उठकर सामाजिक एकता एवं सद्भाव के साथ सामाजहित के लिए एक विशाल आमसभा आयोजित की जायेगी। कार्यक्रम में कुर्मी समाज…

बसंत की खोज

डॉ. अवधेश कुमार अवध”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बसंत उल्लास का नाम है। कंगाली बिहु के बाद आये भोगाली बिहु में पूर्ण उदर संतुष्टि का नाम है। ठंड से ठिठुरती अधनंगी देह को मिली धूप की सौगात का नाम है। धरा के सप्तवर्णी श्रृंगार का नाम है। भगवान भास्कर के दिशि परिवर्तन का नाम है। आम के बौर के सँग मन बौराने की मादकता का नाम है। काक और पिक के बीच चरित्र उजागर होने का नाम है। फाग के झाग में डुबकी लगाने का नाम है। पावन प्रकृति के…

ढोंग

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। एक पंडित जी महराज लोगों के बीच धुंआधार तरीके से क्रोध न करने पर भाषण दे रहे थे। वो समझा रह थे कि क्रोध आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन है, क्रोध से आदमी की बुद्धि नष्ट हो जाती है और जिस आदमी में बुद्धि नहीं रहती, वह पशु बन जाता है। लोग बाग बड़ी श्रद्धा से पंडत जी का उपदेश सुन रहे थे। वो बता रहे थे कि क्रोध चाण्डाल होता है, उससे हमेशा बच के रहो। भीड़ में एक ओर एक जमादार…