यूज एंड थ्रो बनते पत्रकार

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पत्रकार जोे सबके बारे में लिखते हैं, पर उनके बारे में सही बात जनता तक कम ही पहुँचती है। स्थिति ये है कि पत्रकार यूज एण्ड़ थ्रो बनकर रह गये हैं। सत्ता व विपक्ष के नेता व कार्यकर्ताओं से लेकर शासन-प्रशासन में बैठे छोटे-बड़े अफसरों की सारी कवायद पत्रकारों को केवल यूज करने भर तक सीमित रहती है। आमजन को भी पत्रकारों से बहुत उम्मीदें रहती हैं, लेकिन वह किसी हाल में है, किसी को जानने की फुर्सत नहीं। कई बार हुआ है…

पागल कौन

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। एक नगर में एक फकीर घूमा करता था। चीथड़ों में लिपटा उसका ढीलाढ़ाला और झुर्रियों से भरा बुढ़ापे का शरीर, कंधे पर पैबन्दों से भरा झोला लिये इधर उधर फिरता रहता। वह बार-बार थैले में से प्लास्टिक से बड़े जतन से लपेटी रंगीन कागज की गड्डियों को खोलता और दोबारा उसी तरह लपेटकर थैले में रख लेता। वह जहाँ से भी निकलता, रंगीन कागज़ देखकर उसे उठकर लेता और बड़ी सावधानी से उसे सीधा करके थैले से गड्डी निकाल कर उसमें उसे भी…

ममता बनर्जी की हेट्रिक और हिंसा से कराहता बंगाल

मोहन लाल वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कोरोना महामारी की भयावह सुनामी में भले ही अस्पतालों में आक्सीजन की कमी के कारण मरीजों की सांसे थम रही हो, मरीजों के परिजन आक्सीजन के लिए दर दर भटक रहे हो, या सरकारें आक्सीजन की किल्लत दूर करने के लिए विदेशी मदद का जुगाड़ कर रही हो, लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी की जीत से सरकार विरोधी लोगों को भरपूर आक्सीजन मिल गयी है। आक्सीजन का आनंद ले रहे तथाकथित बुद्धिजीवी और कार्टूनिस्ट सरकार को कटघरे में खड़ा करने की भरपूर कोशिश…

करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

वोट हमारा राज तुम्हारा कैसे, क्यों और किसलिए

कूर्मि कौशल किशोर आर्य, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। महाराष्ट्र समेत देश के सभी राज्यों के लोगों की हालत खराब है। देश में मंदिर व नये संसद भवन तो बनाये जा रहे हैं, परन्तु अस्पताल, विद्यालय और महाविद्यालय नहीं बन रहे हैं। देश में विभिन्न राज्यों में चुनाव, उपचुनाव तो कराये जा रहे हैं, लेकिन कोरोना से लोगों की जान बचाने के कोई सार्थक प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। बिना सावधानी और सुरक्षा के चुनाव कराये जा रहे हैं, कोरोना के रौद्र रूप धारण करने और फैलने में यह गैर…

भगवान महावीर की शिक्षायें मानव कल्याण के लिए उपयोगी हैं (महावीर जयन्ती (25 अप्रैल) पर विशेष)

डा0 जगदीश गांधी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मानवता के लिए त्याग करने वाला महावीर है महावीर का जन्म वैशाली (बिहार) के एक राज परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशिला था। बचपन से ही वे 23वें तीर्थकर पाश्र्वनाथ की आध्यात्मिक शिक्षाओं से अत्यधिक प्रभावित थे। एक राजा के पुत्र के रूप में युद्ध के बारे में उनका विचार भिन्न प्रकार का था। वे क्रोध, मोह, लालच, विलासिता पूर्ण वस्तुओं आदि पर विजय पाना सच्ची विजय मानते थे। वे आरामदायक और विलासपूर्ण जीवन पसंद…

कोरोना ने मानव को नहीं मानवता को परास्त किया

डॉ. नीलम महेंद्र, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। इस समाज का हिस्सा होने पर हम शर्मिंदा हैं। यह बात बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से महाराष्ट्र में कोरोना के हालात पर कही है, लेकिन कोरोना से उपजी विकट स्थिति से महाराष्ट्र ही नहीं पूरा देश जूझ रहा है। कोरोना की जिस लड़ाई को लग रहा था कि हम जीत ही गए अचानक हम कमजोर पड़ गए। कोरोना की शुरूआत में जब पूरे विश्व को आशंका थी कि अपने सीमित संसाधनों और विशाल जनसंख्या के कारण कोरोना भारत में त्राहिमाम मचा…

‘राम’ को धरती और आकाश की कोई भी शक्ति ‘प्रभु का कार्य’ करने से रोक नहीं सकी (रामनवमी (21 अप्रैल) पर विशेष)

डा0 जगदीश गांधी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जो कोई प्रभु को पहचान लेते हैं उन्हें धरती और आकाश की कोई भी शक्ति प्रभु का कार्य करने से रोक नहीं सकती। मानव सभ्यता के पास जो इतिहास उपलब्ध है उसके अनुसार राम का जन्म आज से लगभग 7500 वर्ष पूर्व अयोध्या में हुआ था। राम ने बचपन में ही प्रभु को पहचान लिया और उन्होंने अपने शरीर के पिता राजा दशरथ के वचन को निभाने के लिए हँसते हुए 14 वर्षो तक वनवास का दुःख झेला, जबकि उनके पिता राजा दशरथ…

ओटीटी प्लेटफार्म पर अंकुश जरूरी

डॉ. नीलम महेंद्र, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आज के युग में तकनीक जिसे टेक्नोलॉजी कहते हैं, वो लगातार और तीव्रता के साथ बदल रही है। इसके व्यवहारिक पक्ष को हम सभी ने कोरोना काल में विशेष तौर पर महसूस किया, जब घर बैठे कार्य करने के लिए वर्चुअल और ऑनलाइन मीटिंग्स, स्कूल की कक्षाओं का संचालन या फिर वर्क फ्रॉम होम जैसे विभिन्न माध्यम आस्तित्व में आए। इतना ही नहीं कल तक जो फिल्में और टीवी विश्व भर में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन थे, आज इंटरनेट और विभिन्न ओटीटी…

महंगाई की मार, लोग है लाचार, कब सुनेगी सरकार

आशुतोष, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। खुदरा बाजार में मँहगाई तो हमेशा से दिखती रही है, लेकिन विवशता तो तब सामने आई जब थोक मँहगाई दर पिछले सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए थोक कीमतो पर आधारित मुद्रास्फीति 7•39 प्रतिशत हो गयी है। मँहगाई की यह ऊँची रफ्तार आम लोगो पर भारी है। फरवरी में यह केवल 4•17 ही थी। 2012 में भी थोक मँहगाई 7•4 प्रतिशत हो गयी थी, जिसका गुस्सा मौजूदा सरकार को भुगतना पडा था। तेल की कीमतों में वेतहाशा वृद्धि का असर थोक मँहगाई पर पडना तो फिक्स…