पशु धन व दूध-घी  की रक्षा और वृद्धि के देव हैं चेकुल के गण देव

डा. हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश के ग्राम्य परिवेश की समस्त सामाजिकऔर सांस्कृतिक व्यवस्था देव परम्परा द्वारा  संचालित होती है। यहां वैदिक देव समुदाय के अतिरिक्त पूर्व वैदिक देव परिवार के नाग, यक्ष, बेताल व राक्षस आदि की पूजा पद्धति का प्रचलन व मान्यता भी द्रष्टव्य है। हिमाचल के प्रत्येक गांव में, क्षेत्र व अंचल स्तर के देव हैं। साथ ही साथ अनेकानेक अधीनस्थ देव-देवियां हैं, जिन्हे वस्तु विशेष की रक्षा और अभिवृद्धि का दायित्य सौंपा गया है। जिला शिमला की कुमारसैन तहसील की जंजैली पंचायत…

शिवपुराण से……. (279) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

भगवान् शिव का कैलास पर्वत पर गमन तथा सृष्टिखण्ड़ का उपसंहार गतांक से आगे……….. मुने! तदन्तर श्रीविष्णु के साथ मैं तथा अन्य सब देवता और मुनि मनोवांछित वस्तु पाकर आनन्दित हो भगवान् शिव की आज्ञा से अपने-अपने धाम को चले गये। कुबेर भी शिव की आज्ञा से प्रसन्नतापूर्वक अपने स्थान को गये। फिर वे भगवान् शम्भू, जो सर्वथा स्वतंत्र हैं, योगपरायण और ध्यानतत्पर हो पर्वत प्रवर कैलास पर रहने लगे। कुछ काल बिना पत्नी के ही बिताकर परमेश्वर शिव ने दक्ष कन्या सती को पत्नी रूप में प्राप्त किया। देवर्षे!…

शिवपुराण से……. (278) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

भगवान् शिव का कैलास पर्वत पर गमन तथा सृष्टिखण्ड़ का उपसंहार गतांक से आगे……….. उस समय भगवान् शिव ने विश्वकर्मा को उस पर्वत पर निवास स्थान बनाने की आज्ञा दी। अनेक भक्तों के साथ अपने और दूसरों के रहने के लिए यथायोग्य आवास तैयार करने का आदेश दिया। मुने! तब विश्वकर्मा ने भगवान् शिव की आज्ञा के अनुसार उस पर्वत पर जाकर शीघ्र ही नाना प्रकार के गृहों की रचना की। फिर श्रीहरि की प्रार्थना से कुबेर पर अनुग्रह करके भगवान् शिव सानन्द कैलास पर्वत पर गये। उत्तम मुहूर्त में…

शिवपुराण से……. (277) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

भगवान् शिव का कैलास पर्वत पर गमन तथा सृष्टिखण्ड़ का उपसंहार गतांक से आगे……….. उन्हीं के रूप में मैं कुबेर का मित्र बनकर उसी पर्वत पर विलासपूर्वक रहूंगा और बड़ा भारी तप करूंगा। शिव की इस इच्छा का चिन्तन करके उन रूद्र देव ने कैलास जाने के लिए उत्सुक हो अपनी उत्तम गति देने वाले एवं नादस्वरूप डमरू को बजाया। डमरू की वह ध्वनि, जो उत्साह बढ़ाने वाली थी, तीनों लोकों में व्याप्त हो गयी। उसका विचित्र एवं गम्भीर शब्द आहवान की गति से युक्त था, अर्थात सुनने वालों को…

श्रीसत्य बालाजी सत्यधाम में श्री हनुमत जन्मोत्सव पर हवनोत्सव व भंडारा 27 अप्रैल को

शि.वा.ब्यूरो, गोरखपुर। श्रीसत्य बालाजी सत्यधाम पीठाधीश्वर प्रेमजी महाराज ने बताया है कि श्री हनुमत जन्मोत्सव के पावन पर्व पर 27 अप्रैल 2021 को श्रीसत्य बालाजी सरकार के दरबार धर्मनगर चैकड़ी में हवनोत्सव व विशाल भंडारे का आयोजन होगा। प्रेमजी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि सभी अपने मित्रों व रिश्तेदारों सहित इस पावन अवसर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा है कि इस एक दिन श्रीसत्य बालाजी सरकार के दरबार में की प्रार्थना से आप अपना भंडार अन्न-धन व आध्यात्मिक शक्ति से भर सकते हैं। प्रेमजी…

शिवपुराण से……. (276) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

यज्ञदत्त-कुमार को भगवान् शिव की कृपा से कुबेरपद की प्राप्ति तथा उनकी भगवान् शिव के साथ मैत्री गतांक से आगे……….. इस प्रकार वर देकर भगवान् शिव ने पार्वतीदेवी से फिर कहा-देवेश्वरी! इसपर कृपा करो। तपस्विनी! यह तुम्हारा पुत्र है। भगवान् शंकर का यह कथन सुनकर जगदम्बा पार्वती ने प्रसन्नचित्त हो यज्ञदत्त कुमार से कहा-वत्स! भगवान् शिव में तुम्हारी सदा निर्मल भक्ति बनी रहे। तुम्हारी बांयी आंख तो फूट ही गयी, इसलिए एक ही पिंगलनेत्र से युक्त रहो। महादेवजी ने जो वर दिये हैं, वे सब उसी रूप में तुम्हें सुलभ…

शिवपुराण से……. (275) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

यज्ञदत्त-कुमार को भगवान् शिव की कृपा से कुबेरपद की प्राप्ति तथा उनकी भगवान् शिव के साथ मैत्री गतांक से आगे……….. इसने ऐसा कौन सा तप किया है, जो मेरी भी तपस्या से बढ़ गया है। यह रूप, यह प्रेम, यह सौभाग्य और यह असीम शोभा-सभी अद्भुत हैं। वह ब्राह्मण कुमार बार-बार यही कहने लगा। जब बार-बार यही कहता हुआ वह क्रूर दृष्टि से उनकी ओर देखने लगा, तब वामा के अवलोकन से उसकी बायीं आंख फूट गयी। तदन्तर देवी पार्वती ने महादेव जी से कहा-प्रभो! यह दुष्ट तपस्वी बार-बार मेरी…

हिन्दुस्थान का परिवर्तित नाम है हिंदुस्तान

बृहस्पति आगम के अनुसार “हिमालयात्स मारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥” हिमालय से प्रारम्भ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है। हिन्दू शब्द सिन्धु से बना माना जाता है। संस्कृत में सिन्धु शब्द के दो मुख्य अर्थ हैं – पहला, सिन्धु नदी जो मानसरोवर के पास से निकल कर लद्दाख़ और पाकिस्तान से बहती हुई समुद्र मे मिलती है, दूसरा कोई समुद्र या जलराशि। ऋग्वेद की नदी स्तुति के अनुसार वे सात नदियाँ थीं-सिन्धु, सरस्वती, वितस्ता (झेलम), शुतुद्रि (सतलुज), विपाशा (व्यास), परुषिणी (रावी)…

स्वर्गप्रवास से लौटे कोटगढ़ के चतुर्मुख देवता, प्रजा को सुनाया वर्ष फल

डा. हिमेन्द्र बाली “हिम” शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। शिमला जिले की उप तहसील कोटगढ़ के देव संस्कृति के अधिष्ठाता देव चतुर्मुख कोटगढ़-कोटखाई, खनेटी और करांगला रियासतों के राज परिवार के कुलदेव हैं और इन क्षेत्रों के सांस्कृतिक व धार्मिक जीवन के जीवन प्राण हैं। आज से साढ़े तीन हजार वर्ष पूर्व देव चतुर्मुख के गुरू महान तपस्वी तानुजुब्बल में प्रतिष्ठित खाचली नाग ने नरभक्षी काणा देव का सर्वनाश कर देव चतुर्मुख को ननखड़ी के खड़ाहण से यहां आने के लिए प्रेरित कर प्रतिष्ठित किया। देव चतुर्मुख हर वर्ष माघ संक्राति…

शिवपुराण से……. (274) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

यज्ञदत्त-कुमार को भगवान् शिव की कृपा से कुबेरपद की प्राप्ति तथा उनकी भगवान् शिव के साथ मैत्री गतांक से आगे……….. इस प्रकार उसने दस हजार वर्षों तक तपस्या की। तदन्तर विशालाक्षी पार्वती देवी के साथ भगवान् विश्वनाथ कुबेर के पास आये। वे शिवलिंग में मन को एकाग्र करके ठूंठे काठ की भांति स्थिर भाव से बैठे थे। भगवान् शिव ने उनसे कहा-अलकापते! मैं वर देने के लिए उद्यत हूं। तुम अपना मनोरथ बताओ। यह वाणी सुनकर तपस्या के धनी कुबेर ने ज्यों ही आंखे खोलकर देखा, त्यों ही उमावल्लभ भगवान्…