शिवपुराण से……. (301) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… इस प्रकार संध्या को उसके हित का उपदेश देकर देवेश्वर भगवान् शिव वहीं अन्तर्धान हो गये। संध्या की आत्माहुति, उसका अरून्ध्ती के रूप में अवतीर्ण होकर मुनिवर वसिष्ठ के साथ विवाह करना, ब्रह्माजी का रूद्र के विवाह के लिए प्रयत्न और चिन्ता तथा भगवान् विष्णु का उन्हें शिवा की आराध्ना के लिए उपदेश देकर चिन्तामुक्त करना… ब्रह्माजी कहते हैं-नारद! जब वर देकर भगवान्…

शिवपुराण से……. (300) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… संध्ये! जब तुम इस पर्वत पर चार युगों तक के लिए कठोर तपस्या कर रहीं थीं, उन्हीं दिनों उस चतुर्युगी का सत्ययुग बीत जाने पर त्रेता के प्रथम भाग में प्रजापति दक्ष के बहुत सी कन्याएं हुई। उन्होंने अपनी उन सुशीला कन्याओं का यथायोग्य वरों के साथ विवाह कर दिया। उनमें से सत्ताईस कन्याओं का विवाह उन्होंने चन्द्रमा के साथ किया। चन्द्रमा अन्य…

शिवपुराण से……. (299) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… जिससे देहधारी जीव जन्म लेते ही कामासक्त न हो जायें। तुम भी इस लोक में वैसे दिव्य सतीभाव को प्राप्त करो, जैसा तीनों लोकोें में दूसरी किसी स्त्री के लिए सम्भव नहीं होगा। पाणिग्रहण करने वाले पति के सिवा जो कोई भी पुरूष सकाम होकर तुम्हारी ओर देखेगा, वह तत्काल नंपुसक होकर दुर्बलता को प्राप्त हो जायेगा। तुम्हारे पति महान् तपस्वी तथा दिव्यरूप…

दक्ष प्रजापति चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ब्रह्म कमल से ऊपजे,प्रजापति महाराज। चार वरण शोभित किया,करता नमन समाज।। जय जय दक्ष प्रजापति राजा। जग हित में करते तुम काजा।1 वेद यज्ञ के तुम रखवारे। कारज तुमने सबके सारे।।2 दया धरम का पाठ पढाया। जीवन जीनाआप सिखाया।3 प्र से प्रथम जा से जय माना। अति पावन है हमने जाना।4 पूनम गुरू असाड़ी आना। जा दिन को प्रगटे भगवाना।5 पीले पद पादुका सुहाये। देह रतन आभूषण पाये।।6 रंग गुलाबी जामा पाई। पीतांबर धोती मन भाई।।7 कनक मुकुट माथे पर सोहे। हीरा मोती…

शिवपुराण से……. (298) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… तुम्हारा कल्याण हो। मैं तुम्हारे व्रत-नियम से बहुत प्रसन्न हूं। प्रसन्नचित्त महेश्वर का यह वचन सुनकर अत्यन्त हर्ष से भरी हुई संध्या उन्हें बारंबार प्रणाम करके बोली-महेश्वर! यदि आप मुझे प्रसन्नतापूर्वक वर देना चाहते हैं, यदि मैं वर पाने के योग्य हूं, यदि पाप से शुद्ध हो गयी हूं तथा देव! यदि इस समय आप मेरी तपस्या से प्रसन्न हैं तो मेरा मांगा…

शिवपुराण से……. (297) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… यस्य ब्रह्मादयो देवा मुनयश्च तपाधनाः। न विपृण्वन्ति रूपाणि वर्णनीय कथं स मे।। स्त्रिया मया ते किं ज्ञेया निर्गुणस्य गुणाः प्रभो। नैव जानन्ति यद्रूपं सेन्द्रा अपि सुरासुराः।। नमस्तुभ्यं महेशान नमस्तुभ्यं तपोमय। प्रसीद शम्भो देवेश भूयो भूयो नमोअस्तु ते।। (शि.पु.रू.सं.स.खं.6।24-26) ब्रह्माजी कहते हैं-नारद! संध्या का यह स्तुतिपूर्ण वचन सुनकर उसके द्वारा भली-भांति प्रशंसित हुए भक्तवत्सल परमेश्वर शंकर बहुत प्रसन्न हुए। उसका शरीर वल्कल और मृगचर्म…

जाग्रत शक्तिपुंज है अरण्यवासिनी देरठू भगवती

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पर्वतराज हिमालय के मध्योत्तर खण्ड के अंतर्गत पौराणिक जालन्धरपीठ में अवस्थित काली भगवती देरठू का मंदिर शिमला जिले की कुमारसैन तहसील में लगभग नौ हजार फुट की ऊंच्चाई पर सुरम्य पर्वत शिखर पर विराजमान है। मध्य हिमालय की अप्रतिम पर्वत श्रृंखला शिमला पहाड़ियों के पश्चिम में स्थित देरठू भगवती का मंदिर राष्ट्रीय मार्ग पांच पर नारकण्डा से आठ किमी पश्चिम की ओर सघन वन राशि के मध्य में नयनाभिराम भूस्थल पर स्थित है। एकान्तवासिनी देरठू देवी छबीशी क्षेत्र की अधिष्ठात्रि देवी है, जिसकी…

कार्य के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते हैं युवाओं के प्रेरणास्रोत ध्यान सिंह ठाकुर

टीसी ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हौंसले जिसके बुलंद हो और मन में कुछ नया करने का जुनून हो तो फिर कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। जी हाँ!  हम बात कर रहे हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी उपमण्डल करसोग में सिद्ध नाथ पीठ चवासीसिद्ध मंदिर कमेटी महोग के प्रधान ध्यान सिंह ठाकुर की। ध्यान सिंह ठाकुर की एक बड़ी विशेषता है कि वो मंदिर से जुड़े हर कार्य क्षेत्र में सबको साथ लेकर कार्य करते है, चाहे महोग मंदिर जीर्णोद्धार हो या फिर च्वासीगढ़ की कोई अन्य बात हो। वर्तमान…

धरती के देव है़ं सुकेत के  धार गांव में विराजित महीदेव

ङा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मण्डी जिले की सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि सैंधव व वैदिक कालीन रही है। पुरात्तात्विक व साहित्यिक स्रोतों के आधार पर यह निष्कर्ष रूप में सामने आया है कि माण्डव (मण्डी) व सुकुट (सुकेत) क्षेत्र में मानव सभ्यता के उषाकाल में सांस्कृतिक व सामाजिक व्यवस्था प्रचलित थी। सैंधवकाल में धरती पूजा का आविर्भाव व प्रचलन पुरातात्विक खोजों से प्रमाणित हो चुका है। हिमाचल में अच्छी फसल व तत्सम्बंधी बीमारियों के निवारण के लिये भूमि देव खेत्रपाल, खोड़ू व वन देवी की पूजा की जाती…

शिवपुराण से……. (296) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… यो बह्मा कुरूते सृष्टि यो विष्णुः कुरूते स्थितिम्। संहरिष्यति यो रूद्रस्तस्मैं तुभ्ये नमो नमः।। नमो नमः कारणाकारणाय दिव्यामृतज्ञानविभूतिदाय। समस्त लोकान्तरभूतिदाय प्रकाशरूपाय परात्पराय।। यस्यापरं नो जगादुच्यते पदात् क्षितिर्दिशः सूर्य इन्दुर्मनोजः। बर्हिमुखा नाभितश्चान्तरिक्षं तस्मै दुभ्यं शम्भवे मे नमोअस्तु।। त्वं परः परमात्मा च त्यं विद्या विविधा हरः सद्ब्रह्म च परं ब्रह्म विचारणपरायणः।। यस्य नादिर्न मध्यं च नान्तमस्ति जगद्यतः। कथं स्तोष्यामि तं देवमवांगमनसगोचरम्।। (शि.पु.रू.सं.स.खं.6।18-23) ब्रह्मा आदि देवता…