शिवपुराण से……. (291) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसको तपस्या की विधि बताना………… क्रमशः ………… आगे बताये जाने वाले मंत्र से देवेश्वर शम्भु की आराधना करो। उससे तुम्हें सब कुछ मिल जायेगा, इसमें संशय नहीं है। ‘‘ओईम नमः शंकराय ओईम’’ इस मंत्र का निरन्तर जप करते हुए मौन तपस्या आरम्भ करो और जो मैं नियम बताता हूं, उन्हें सुनो। तुम्हें मौन रखकर ही स्नान करना होगा, मौनालम्बनपूर्वक ही महादेव जी की पूजा करनी होगी। प्रथम दो बार छठे…

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को

शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। सूरज या चंद्रमा पर ग्रहण लगना एक खगोलीय घटना है, जो हर साल अलग-अलग समय पर घटती है। ग्रहण को राशि और लोगों के भाग्य से जोड़कर भी देखा जाता है। इस साल कुल चार ग्रहण लगेंगे। जिसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। साल का पहले ग्रहण 26 मई को लगेगा, जो चंद्र ग्रहण होगा। इस चंद्र ग्रहण को भारत के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्से में देखा जा सकेगा। इसके अलावा इस चंद्र ग्रहण को प्रशांत…

शिवपुराण से……. (290) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. संध्या ने कहा-ब्रह्मन्! मैं ब्रह्माजी की पुत्री हूं। मेरा नाम संध्या है और मैं तपस्या करने के लिए इस निर्जन पर्वत पर आयी हूं। यदि मुझे उपदेश देना आपको उचित जान पड़े तो आप मुझे तपस्या की विधि बताईये। मैं यही करना चाहती हूं। दूसरी कोई भी गोपनीय बात नहीं है। मैं तपस्या के भाव को-उसके करने के नियम को बिना जाने…

शिवपुराण से……. (289) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. उसी तरह सुशोभित हो रहा था, जैसे प्रदोषकाल में उदित हुए चन्द्रमा और नक्षत्रों से युक्त आकाश शोभा पाता है। सुन्दर भाव वाली संध्या को वहां बैठी देखकर मुनि ने कौतूहलपूर्वक उस बृहल्लोहित नाम वाले सरोवर को अच्छी तरह देखा। उसी प्राकारभूत पर्वत के शिखर से दक्षिण समुद्र की ओर जाती हुई चन्द्रभागा नदी का भी उन्होंने दर्शन किया। जैसे गंगा हिमालय…

शिवपुराण से……. (288) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. (तरूणावस्था से पूर्व किसी पर भी काम का प्रभाव नहीं पडेगा, ऐसी सीमा निर्धारित करूंगी)। इसके बाद इस जीवन को त्याग दूंगी। मन ही मन ऐसा विचार करके संध्या चन्द्रभाग नामक उस श्रेष्ठ पर्वत पर चली गयी, जहां से चन्द्रभागा नदी का प्रादुर्भाव हुआ है। मन में तपस्या का दृढ़ निश्चय ले संध्या को श्रेष्ठ पर्वत पर गयी हुई जन मैंने अपने…

करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

शिवपुराण से……. (287) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. वह संध्या, जो पहले मेरी मानस पुत्री थी, तपस्या करके शरीर को त्याग कर मुनिश्रेष्ठ मेधातिथि की बुद्धिमती पुत्री होकर अरून्धती के नाम से विख्यात् हुई। उत्तम व्रत का पालन करके उस देवी ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के कहने से श्रेष्ठ व्रतधारी महात्मा वसिष्ठ को अपना पति चुना। वह सौम्य स्वरूपवाली देवी सबकी वन्दनीया और पूजनीया श्रेष्ठ पतिव्रता के रूप में…

श्रीमद् भागवत चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सप्तदिवस भगवत कथा, सुनिये ध्यान लगाय। परीछित राजा ने सुनि,अंत मोक्ष को पाय।। श्रीमद भगवत कथा विशेषा। करे श्रवण जन जीवन लेखा।।1 मुकुट मणी ग्रंथन कहलाई। जयजयजयति भागवत माई।।2 वेद व्यास नारद ने गाई। शुकदेव परीक्षित सुनाई।।3 भक्ति ज्ञान वैराग्य कहानी। अंतिम मोक्ष कथा बखानी।।4 वेद व्यास संस्कृत मे भाखा। छठी सदी में कविता लेखा।।5 इस्कंद बारह आन बनाये। सहस अठारह श्लोका गाये।।6 जीव सनातन श्रीधर स्वामी। एकनाथ वल्लभ से आनी।।7 सुदेवाचार्य सुदर्शन सूरि। विजयध्वज टीका लेखी भूरि।।8 प्रथम इस्कंद अवतार विचारी। गोकर्णा…

शिवपुराण से……. (286) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. इस प्रकार रति के प्रति भारी मोह से युक्त रति पति कामदेव ने उसे उसी तरह अपने हृदय के सिंहासन पर बैठाया, जैसे योगी पुरूष योगविद्या को हृदय में धारण करता है। इसी प्रकार पूर्ण चन्द्रमुखी रति भी उस श्रेष्ठ पति को पाकर उसी तरह सुशोभित हुई, जैसे श्रीहरि को पाकर पूर्णचन्द्रानना लक्ष्मी शोभा पाती है। सूतजी कहते हैं-ब्रह्माजी का यह कथन…

पवनपुत्र चालीसा (हनुमान जयंती पर विशेष)

  डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।   प्रात: उठ सुमिरण करो, पुण्य नाम हनुमान। राम लखन के लाड़ले, कहत हैं कवि मसान।। जय हनुमाना सब जग जाना। तुम्हराजस सब राम बखाना।।1 पवन पुत्र अंजनि के लाला। लाल नयन अरु भुजा विशाला।।2 बज्र देह दारुण दुख हरता। संतन को तो सब सुख करता।।3 सियाराम के नित गुण गाते। प्रभु की भक्ती में सुख पाते।।4 सुंदर तन मानव कल्याणी। भूत प्रेत भागे सुन वाणी।।5 चैत्र पूर्णिमा को अवतारे। मातु अंजनी राज दुलारे।।6 भक्तों के सब काम संभारे। ले सोटा दुष्टो…