मेरे देश में क्या हो रहा है ?

राजेंद्र कुमारी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मेरे देश में क्या हो रहा है ? छा गया है मातम और वक्त रो रहा है। अरे देखिए जनाब मेरे देश में क्या हो रहा है ? अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता पीछे छोड़ चला आज इंसानl पाश्चात्य संस्कृति की अंधी दौड़ में संस्कार भूल बना शैतान होली दिवाली छोड़ क्रिसमिस का हो रहा प्रचार है। अरे देखिए जनाब मेरे देश में क्या हो रहा है ? चारों ओर भ्रष्टाचार और महंगाई है । आम जनता फुटपाथ पर आज सोई है। फिर भी राजनेताओं…

चंद्रशेखर आज़ाद

प्रीति शर्मा “असीम” शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अपना नाम आजाद पिता का नाम स्वतंत्रता बतलाता था।  जेल को , अपना घर कहता था। भारत मां की, जय -जयकार लगाता था। भाबरा की , माटी को अमर कर। उस दिन भारत का , सीना गर्व से फूला था । चंद्रशेखर आज़ाद के साथ , वंदे मातरम् भारत मां की जय देश का बच्चा-बच्चा बोला था। जलियांवाले बाग की कहानी, फिर ना दोहराई जाएगी । फिरंगी को , देने को गोली आज़ाद ने , कसम देश की खाई थी । भारत मां…

किसी ओर से

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मुझे किसी ओर से इश्क करने की जरूरत नहीं है मैं तुमसे ही मोहब्बत करता रहूंगा। मुझे किसी ओर के जिस्म को छूने की तलब नहीं है मैं तेरी रूह को छूकर ही सकून लेता रहूंगा। मुझे किसी ओर से दिल लगाने की जरूरत नहीं अपने सीने में ही तुम्हारी धड़कनों को सुन मुस्कराता रहूंगा। युवा कवि लेखक कांगड़ा हिमाचल प्रदेश 

फूल

राजेंद्रा कुमारी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बागों में झूल झूल कर लहरा रहा है फूल। खिल खिल कर सभी को मुस्कुराना सिखा रहा है फूल। माली बाग में जाता है, फूलों को देखकर मुस्कुराता है। सुंदर सुंदर फूलों को तोड़कर, बेचने चला जाता है l फिर भी माली की खुशी को दिल से लगा रहा है फूल।l एक प्रेमी आया ,फूल देखकर उसे तोड़ लाया l प्रेमिका के हाथों में थमा कर उसे अपना बनाया। दो दिलों को जोड़ कर मुस्कुराता जा रहा है फूल l खिल खिल कर सभी…

संत रैदास चालीसा (जयंती पर विशेष)

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मां गंगा ने कृपा करि, कंगन दे सम्मान। मानवता की साधना, भक्त रैदास महान।। जयजयजय सद्गुरु रैदासा। सद्गुण ज्ञानी विश्व समाजा।१ माघ मास पूनम उजियारी। चन्द्र ग्रहण भी लागा भारी।।२ रविवासर दिन शुभ था आई। संवत चौदह तैंतिस भाई।।३ काशी के ढिंग मांडुर ग्रामा। जन्मे सदगुरु पावन धामा।।४ राघू दास पिता कहाये। करमा देवी कोंख सु आये।।५ धरम संगिनी देवी लोना। पूत दास विजय सलोना।।६ रवि रैदासा नाम तुम्हारा। नाम सुमिरता सब संसारा।।७ सात बरस की उमर कहाई। नवधा भक्ति आपने पाई।।८ कागज…

जख्म

कल्पना गांगटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। भरे नहीं कभी जो जख्म अपनों ने ही तो दिए हैं… शिकवा किसी से क्या करे वो सपनों में ही जो जीए हैं। दिल दुखे न किसी का हमसे तभी  होंठ भी सी लिए हैं। भरे नहीं कभी जो जख्म…………. भीगे- भीगे से नयन भी अब अश्क छुपाए हुए हैं, खोले क्या अब राज वो दिल में जो दबाए हुए हैं, भरे नहीं कभी जो जख्म…………. उन यादों को करे दूर कैसे मन में जो डेरा बसाए हुए हैं… छीन रहे हैं पंख वही…

विश्वकप के दोहे 2015

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पहला मेच पाक से, कोहलि बने विराट । धोनी मोहित छा गये, शिखर धवन सम्राट । । अफ्रिका भी हार गया, भारत मारे तीर । शिखर सैंकड़ा मारके, बने टीम के पीर।। संयुक्त अमीरांत मे, रोहित बने महान । नौ विकेट से जीतके,शमी देश की शान।। चौथा वेस्टइण्डीज से, जीते चार विकेट। धन धन बेटा आपको, बल्ले से आखेट ।। आयरलैंड आठ से, भारत से थी हार। शिखरधवन की शतकसे, आया रंग बहार ।। सुरेश रैना सैकड़ा, जिम्बाबे की हार । छै विकेट…

बसंत समया जाके

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। गौरी प्रीतम आस मे, निशिदिन करे विचार। कामबाण हिय मे लगो, करती हा हा कार।। 1 सिसक सिसक के रोरही, अंसुअन बहती धार।  हिरदे धड़कन धड़कती, रोम रोम इजहार।। 2 केश बाँध चोटी करी, नागिन सी दिखलाय। उदर झरोखा नाभि का, सबका मन भरमाय।। 3 मन्द मन्द मुस्कात हैं, नैना बने कटार । बागन मे संगत करे, कलिया कहे पुकार।। 4 पान खाय अधरा चलें, भौहन से बतराय । कानन की लटकन हलें, नथनी झोका खाय।। 5 हाथन झाला साधके, नैन रही मटकाय।…

मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है

अतुल रघुवंशी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बोल कड़वे हैं, तीखी ज़बान है। मगर दिल में गहरी मिठास है। गंगा जमुनी तहजीब शान इसकी। ना कोई पर्दा, ना बनावट का लिबास है। मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है। दोआब की उपजाऊ माटी, सरवट पुराना नाम है। हड़प्पा के निशान बाकी आज भी। इतिहास के पन्नों में जगह इसकी खास है। मुजफ्फरनगर बस एक शहर नहीं, ये एक एहसास है। जड़ें कितनी पुरानी इसकी… शुक्रतीर्थ वट वृक्ष जितना पुराना शिव चौक है केंद्र बिंदु… जिसकी परिधि में सबका वास…

बढ़ेगा आगे भारत 4

डॉ.ममता बनर्जी “मंजरी”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अकबर शासन काल, किया भारत का खंडन। भू अफगानिस्तान, हुआ इस्लामिक मंडन। मुगल वंश का दंश, झेलकर भारत डोला। हार गया था युद्ध, नबाब सिराजुद्दोला। यथा हुई शुरुआत, गुलामी भारत गाथा। भारत को दे मात, उठाया क्लाइव माथा। चली कंपनी राज, देश भी रहा न अपना। चढ़ गया ब्रिटिश ताज, हुआ पूरन हर सपना। अलग हुआ नेपाल, हमें इतिहास बताए। तिब्बत अरु भूटान, अलग ध्वज थे फहराए। इसी तरह यह देश, हुआ कई बार खंडित। फिर भी था यह देश, परम् महिमा से…