…तो ये है अक्षय तृतीया का रहस्य

लक्ष्मी प्रसाद मैंदुली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आज भी लोगों के मन में अक्षय तृतीया के बारे मेें जानने की उत्सुकता है कि आखिर अक्षय तृतीया का इतना महत्व क्या है और क्यों है? तो आईए! जानते है अक्षय तृतीया के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें। बताते हैं कि आज ही के दिन अक्षय तृतीया को ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण हुआ था। आज ही माँ अन्नपूर्णा का भी अवतरण हुआ था। चिरंजीवी महर्षि परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था, इसीलिए इसी दिन परशुराम जन्मोत्सव भी…

सृष्टी के पहले दिन यानी अक्षय तृतीया को सरायकेला के जगन्नाथ मंदिर में निभाई गयी आयोजन की औपचारिकता

कार्तिक कुमार परिच्छा, सरायकेला (झारखंड )। सृष्टी के पहले दिन यानी अक्षय तृतीया को सरायकेला के जगन्नाथ मंदिर में भी इस आयोजन कि औपचारिकता भर निभाई गयी। इस अवसर पर कोई बाहरी भक्त इसमे शामिल नहीं हो सका, केवल अपनों ने ही इसकी औपचारिकता भर निभाई। अक्षय तृतीया को सरायकेला के जगन्नाथ मंदिर परिसर में पुजारी ब्रम्हानंद पंडा ने गर्भगृह में जगन्नाथ पूजन की एवं बाहर रथ चक्के की पूजा अर्चना की। तत्पश्चात रथ के पहिए को जोरडीहा गांव से आये विश्वकर्मा सेवायत ने अपने पूजित कुल्हाड़ी से रथ निर्माण…

हे! परशुराम प्रकटो फिर से

जगदीश चंद्र शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। संकल्प करें द्विज पुत्र सभी, इस धरा धाम पर न्याय करें !  उस दिव्य ऋषि का क्रोध जगे, दुनिया से पापी दूर करें !  ब्रह्मपुत्र हम दिव्य संतति, सब मिलकर आह्वान करें !  हे परशुराम ! प्रकटो फिर से, यह धरती मां चित्कार करें । कोप दृष्टि के प्रचंड प्रहार से, फरसा फिर चमकाना है ! पीड़ित मानव की रक्षा में, फिर से धरती पर आना है !  मातृ हंता का दाग मिटा लो, अवसर यह अनोखा है ! हे परशुराम ! प्रकटो…

पांगणा के पंज्याणु गांव में मिले प्राचीन शिव मंदिर के अवशेष

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सुकेत रियासत की आदि राजधानी पांगणा के दक्षिण-पश्चिम में अवस्थित पौराणिक पंज्याणु गांव में विशाल पीपल वृक्ष के नीचे प्रस्तर के भद्रमुख व अन्य मूर्तियों के मिलने से यह अनुमान लगाना सहज है कि यहां प्राचीन समय में कोई शिव मंदिर रहा होगा। वर्तमान में जो भद्रमुख पीपल वृक्ष के नीचे पुज्य स्थल पर रखा गया है, उसका शिल्प वैभवपूर्ण है। भद्रमुख में भगवान शिव की मुखाकृति योगमुद्रा की है। शिव की मुखाकृति पर तथागत भगवान बुद्ध का रूप निरूपित हो रहा है।…

शिवपुराण से……. (291) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसको तपस्या की विधि बताना………… क्रमशः ………… आगे बताये जाने वाले मंत्र से देवेश्वर शम्भु की आराधना करो। उससे तुम्हें सब कुछ मिल जायेगा, इसमें संशय नहीं है। ‘‘ओईम नमः शंकराय ओईम’’ इस मंत्र का निरन्तर जप करते हुए मौन तपस्या आरम्भ करो और जो मैं नियम बताता हूं, उन्हें सुनो। तुम्हें मौन रखकर ही स्नान करना होगा, मौनालम्बनपूर्वक ही महादेव जी की पूजा करनी होगी। प्रथम दो बार छठे…

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को

शि.वा.ब्यूरो, नई दिल्ली। सूरज या चंद्रमा पर ग्रहण लगना एक खगोलीय घटना है, जो हर साल अलग-अलग समय पर घटती है। ग्रहण को राशि और लोगों के भाग्य से जोड़कर भी देखा जाता है। इस साल कुल चार ग्रहण लगेंगे। जिसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। साल का पहले ग्रहण 26 मई को लगेगा, जो चंद्र ग्रहण होगा। इस चंद्र ग्रहण को भारत के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्से में देखा जा सकेगा। इसके अलावा इस चंद्र ग्रहण को प्रशांत…

शिवपुराण से……. (290) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. संध्या ने कहा-ब्रह्मन्! मैं ब्रह्माजी की पुत्री हूं। मेरा नाम संध्या है और मैं तपस्या करने के लिए इस निर्जन पर्वत पर आयी हूं। यदि मुझे उपदेश देना आपको उचित जान पड़े तो आप मुझे तपस्या की विधि बताईये। मैं यही करना चाहती हूं। दूसरी कोई भी गोपनीय बात नहीं है। मैं तपस्या के भाव को-उसके करने के नियम को बिना जाने…

शिवपुराण से……. (289) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. उसी तरह सुशोभित हो रहा था, जैसे प्रदोषकाल में उदित हुए चन्द्रमा और नक्षत्रों से युक्त आकाश शोभा पाता है। सुन्दर भाव वाली संध्या को वहां बैठी देखकर मुनि ने कौतूहलपूर्वक उस बृहल्लोहित नाम वाले सरोवर को अच्छी तरह देखा। उसी प्राकारभूत पर्वत के शिखर से दक्षिण समुद्र की ओर जाती हुई चन्द्रभागा नदी का भी उन्होंने दर्शन किया। जैसे गंगा हिमालय…

शिवपुराण से……. (288) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

कामदेव के नामों का निर्देश, उसका रति के साथ विवाह तथा कुमारी संध्या का चरित्र-वसिष्ठ मुनि का चन्द्रभाग पर्वत पर उसका तपस्या की विधि बताना………………. गतांक से आगे……….. (तरूणावस्था से पूर्व किसी पर भी काम का प्रभाव नहीं पडेगा, ऐसी सीमा निर्धारित करूंगी)। इसके बाद इस जीवन को त्याग दूंगी। मन ही मन ऐसा विचार करके संध्या चन्द्रभाग नामक उस श्रेष्ठ पर्वत पर चली गयी, जहां से चन्द्रभागा नदी का प्रादुर्भाव हुआ है। मन में तपस्या का दृढ़ निश्चय ले संध्या को श्रेष्ठ पर्वत पर गयी हुई जन मैंने अपने…

करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…