श्री बालाजी सत्यधाम पीठ में विशाल भण्डारा 3 नवम्बर को

शि.वा.ब्यूरो, गोरखपुर। श्री बालाजी सत्यधाम पीठ के पीठाधीश्वर प्रेमजी महाराज ने श्री बालाजी मंदिर में 3 नवंबर को सुबह 10 से रात्री 10 बजे तक आयोजित होने वाले भंडारे में सभी श्रद्धालुओं को आमन्त्रित करते हुए बताया कि उक्त कार्यक्रम 3 नवम्बर रात 10 बजे या और देर रात्रि जब तक भक्त आते रहेंगे, भण्डारा जारी रहेगा और श्रद्धालु प्रसाद पाते रहेंगे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्र व पड़ोसियों सहित श्रीसत्य बालाजी सर्व संकट मोचन सरकार के दरबार में मत्था टेकने की अपील की है। श्री बालाजी…

दीपावली पर्व

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। यह सर्वविदित है कि भारत त्योहारों का देश है। भारत भूमि पर 36 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं, इसीलिए यहाँ का प्रतिदिन ही नहीं, प्रतिपल भी उत्सवों का पल है। भारत में प्रत्येक उत्सव के आयोजन के लिए निश्चित समय का महत्त्व व कारण मौजूद हैं। प्रत्येक त्यौहार के आयोजन का समय व कारण विज्ञान कि वर्तमान कसौटी पर खरा-परखा है। प्रत्येक वर्ष फागुन माह में होली तथा कार्तिक अमावस्या को दीपावली का आयोजन भारत ही नहीं, विश्व के प्रत्येक भाग में…

टेसू गीत

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मेरा टेसू यहीं अड़ा, खाने को मांगे दही बड़ा, दही बड़े में पन्नी, घर दो बेटा अठन्नी, अठन्नी अच्छी होती तो ढोलकी बनवाते, ढोलकी की तान अपने यार को सुनाते, ‘सेलखड़ी भई सेलखड़ी, नौ सौ डिब्बा रेल खड़ी, एक डिब्बा आरमपार, उसमें बैठे मियांसाब, मियां साब की काली टोपी, काले हैं कलयान जी, गौरे हैं गुरयान जी, कूद पड़े हनुमान जी, लंका जीते राम जी।’ ‘टेसू भैया बड़े कसाई, आंख फोड़ बंदूक चलाई, सब बच्चन से भीख मंगाई, दौनों मर गए लोग लुगाई।’…

ग्वाल समाज और टेसू राजा

डॉ. दशरथ मसानिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। शरद पूर्णिमा टेसू राजा और झेंझी रानी के विवाह का दिन है। महाभारत काल में यह छोटी सी प्रेम कहानी सिर्फ पांच दिन ही चल पाई, लेकिन इसकी गूंज आज भी गीतों के माध्यम से सुनाई देती है। किवदंती है कि भीम के पौत्र बर्बरीक (टेसू) को महाभारत का युद्ध देखने आते समय झांझी से प्रेम हो गया था। उन्होंने युद्ध से लौटकर झांझी से विवाह करने का वचन दिया था, लेकिन युद्ध मे हारने बालो की ओर से लड़ने के निश्चय ये…

श्राध्द पक्ष 20 सितंबर से 6 अक्टूबर तक

नीरज कुमार शर्मा शिक्षा वाहिनी। हिन्दू धर्म में एक अत्यंत सुरभित पुष्प है कृतज्ञता की भावना, जो कि बालक में अपने माता-पिता के प्रति स्पष्ट परिलक्षित होती है। हिन्दू धर्म का व्यक्ति अपने जीवित माता-पिता की सेवा तो करता ही है, उनके देहावसान के बाद भी उनके कल्याण की भावना करता है एवं उनके अधूरे शुभ कार्यों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है। ‘श्राद्ध-विधि’ इसी भावना पर आधारित है। मृत्यु के बाद जीवात्मा को उत्तम, मध्यम एवं कनिष्ठ कर्मानुसार स्वर्ग नरक में स्थान मिलता है। पाप-पुण्य क्षीण होने पर…

पितृपक्ष भारतीय संस्कृति का अद्भुत महापर्व

शि.वा.ब्यूरो, लखनऊ। पितृपक्ष भारतीय संस्कृति का अद्भुत महापर्व है। इसकी महिमा देखिए कि हिंदुओं के प्रमुख त्यौहार जैसे दशहरा, रक्षाबंधन, होली, श्रीराम नवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि इत्यादि पर्व एक दिन मनाए जाते हैं। दीपावली पांच दिन, नवरात्रि नौ दिन, गणेशोत्सव दस दिन का होता है, लेकिन पितृपक्ष पूरे सोलह दिन का उत्सव है। शास्त्रों में इसे महालय कहा गया है। मह – अर्थात उत्सव और आलय – अर्थात घर। यूं समझिये कि सामान्यतः हमारे घरों में किसी अतिथि का आगमन होता है, तो हम कितने प्रसन्न होते हैं। कितनी श्रद्धा…

महावीर स्वामी ने दिया था उत्तम ब्रह्मचर्य से उत्तम क्षमा तक दस नियमों का पालन करने का संदेश

दिलीप भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। महावीर स्वामी ने उत्तम ब्रह्मचर्य से उत्तम क्षमा तक दस नियमों का पालन करने का संदेश सभी श्रावकों को दिया था। पर्यूषण के दस दिनों में भी इनका पालन करने के लिए स्मरण प्रति वर्ष कराया जाता है। पूरी उम्र इनका पालन करना कठिन मानकर कई व्यक्ति मात्र सुन पढ़ लेते हैं। हिंदू महिलाएं सप्ताह में एक दिन सोमवार को शिवजी का व्रत करती हैं। कई हिंदू हनुमानजी की उपासना के लिए मंगलवार शनिवार का व्रत अपनी सुविधानुसार करते हैं। पूर्णिमा एकादशी भी की…

हे लंबोदर

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हे लम्बोदर ! सर्वप्रथम तुमको नमन रिद्धि-सिद्धि प्रदाता खाली झोली भरता । शिव पार्वती नंदन तुम्हारी चरणरज चंदन ।। जय-जय हे गजानन ! तेरी जगगाता महिमा मंडन प्रभु तुम्हारा वंदन-वंदन । उमासुत उर बीच तस्वीर नाम लेत मिटते सर्व क्लेश धर्म के रक्षक पुत्र महेश ‌। गिरिजा के प्रिय लाल शिव के अभिमान बना दो हमारी भी पहचान । ग्राम रिहावली, डाकघर तारौली गुर्जर, फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश

शिवपुराण से……. (301) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… इस प्रकार संध्या को उसके हित का उपदेश देकर देवेश्वर भगवान् शिव वहीं अन्तर्धान हो गये। संध्या की आत्माहुति, उसका अरून्ध्ती के रूप में अवतीर्ण होकर मुनिवर वसिष्ठ के साथ विवाह करना, ब्रह्माजी का रूद्र के विवाह के लिए प्रयत्न और चिन्ता तथा भगवान् विष्णु का उन्हें शिवा की आराध्ना के लिए उपदेश देकर चिन्तामुक्त करना… ब्रह्माजी कहते हैं-नारद! जब वर देकर भगवान्…

शिवपुराण से……. (300) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… संध्ये! जब तुम इस पर्वत पर चार युगों तक के लिए कठोर तपस्या कर रहीं थीं, उन्हीं दिनों उस चतुर्युगी का सत्ययुग बीत जाने पर त्रेता के प्रथम भाग में प्रजापति दक्ष के बहुत सी कन्याएं हुई। उन्होंने अपनी उन सुशीला कन्याओं का यथायोग्य वरों के साथ विवाह कर दिया। उनमें से सत्ताईस कन्याओं का विवाह उन्होंने चन्द्रमा के साथ किया। चन्द्रमा अन्य…