शिवपुराण से……. (300) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

संध्या की तपस्या, उसके द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उससे संतुष्ठ हुए शिव का अभीष्ट वर दे मेधातिथि के यज्ञ में भेजना ……….. गतांक से आगे…………… संध्ये! जब तुम इस पर्वत पर चार युगों तक के लिए कठोर तपस्या कर रहीं थीं, उन्हीं दिनों उस चतुर्युगी का सत्ययुग बीत जाने पर त्रेता के प्रथम भाग में प्रजापति दक्ष के बहुत सी कन्याएं हुई। उन्होंने अपनी उन सुशीला कन्याओं का यथायोग्य वरों के साथ विवाह कर दिया। उनमें से सत्ताईस कन्याओं का विवाह उन्होंने चन्द्रमा के साथ किया। चन्द्रमा अन्य…

दर्द की सज़ा

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हुआ न दर्द मुझे भी हुआ करता था, जब तुम बेमतलब मुझे तकलीफ देते थे। आए न आंखों में आंसू मेरी आंखों में भी आते थे, जब तुम बिना मेरे कुछ बोले मुझे दर्द दिया करते थे। टूटा न दिल मेरा भी टूट जाता था, जब तुम पास होकर भी अनजान बन निकल जाते थे। हुई न तकलीफ मुझे भी हुआ करती थी, जब तुम औरों के लिए मुझे छोड़ चले जाते थे। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

गुरु

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जीवन को , जो उत्कृष्ट बनाता है। मिट्टी को , जो छूकर मूर्तिमान कर जाता है । बाँध क्षितिज रेखाओं में, नये आयाम बनाता हैं । जीवन को, जो उत्कृष्ट बनाता हैं । ज्ञान को, जो विज्ञान तक ले जाता है । विद्या के दीप से , ज्ञान की जोत जलाता है | अंधविश्वास के , समंदर को चीर, नवीन तर्क के , साहिल तक ले जाता है | मानवता की पहचान से , जो परम ब्रह्म तक ले जाता है । सत्य…

विरह

अ कीर्ति वर्द्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। विरह भरी है इन गीतों में, क्यों सावन में आग लगाते हो, परदेशी बलमा फुनवा से, क्यों हिया में आग लगाते हो। बरखै बरसा झिहिर झिहिर, मन पुलकित होता जाता है, नैन बिछाये राह निहारूं, क्यों पानी में आग लगाते हो।। 53 महालक्ष्मी एंक्लेव मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

होमवर्क

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। स्टाफ रूम से डायरेक्टर साहेब के कमरे की और बढ़ते हुए दिनेश सर बस यही सोच रहे थे कि आज़ स्कूल का आखिरी दिन है। सभी टीचर उनके लिए दुआ कर रहे थे, लेकिन वो अपने मन को लगभग आश्वस्त कर चुके थे कि उनका स्कूल से निकलना अब तय है। अपना त्यागपत्र भी उन्होंने लिख कर जेब में डाल रखा था। प्रिंसिपल ने उन्हें अपने कमरे में बुलाने के बजाय डायरेक्टर के कमरे में ही जाने का संदेश भेजा था। दिनेश सर खुद…

सीख

अ कीर्ति वर्द्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। दर्द दिल में छिपाना सीख लिया है, मैने अब मुस्कुराना सीख लिया है। लोग कुरदते जख्म, देखने के बहाने, खुद मरहम लगाना, सीख लिया है। 53 महालक्ष्मी एंक्लेव मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

आया सावन

वाणी बरठाकुर ‘विभा’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। चमक चमक कर दमक दमक कर लचक लचक कर बरस रहा है घन ।। मौसम मनभावन आ गया देखो सावन आओ रे मेरे साजन तुझे पुकारे ये मन ।। ये चंचल चितवन तरसे मेरा बदन ये है प्यार की अगन मेरा मन है मगन ।। है ये मन में ललक देख लूँ इक झलक झुकें नहीं ये पलक बुला उसे ऐ- पवन ।। तेजपुर, असम

देह यात्रा

अ कीर्ति वर्द्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। वह करता है अक्सर देह से देह तक की यात्रा बिना उसकी मर्जी के और शायद बलात्कार भी उसकी आत्मा का, जिसे समझता है वह अपना संविधानिक अधिकार पति होने के कारण। और वह भी शायद यही समझती है कि उसका दायित्व है पति को खुश रखना। अपने अधिकार को भुलाकर, दायित्व की धूरी पर नाचते रहना ही शायद उसकी नियति है। इसीलिए वह सहती है हर दुःख,दर्द और अपमान बिना उफ़ किये हंसते-हंसते एक थोथी मुस्कान। 53 महालक्ष्मी एंक्लेव मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

प्रकृति के अजेय स्पर्श

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मेरी गजल है सुबह” इसको शाम तुम कहोगे अमृत पिलाऊंगा तुम्हें पर जाम तुम कहोगे। ये दरिया है कारवाँ का है डूबना सभी को” मेरी आईना को अक्सर इल्जाम तुम कहोगे। नंगे मचलते सड़क को बचपन की आड़ देकर रंगरेलियों की शोर को बस शाम तुम कहोगे। मैं नीरज हूँ”शोर करना मेरा नहीं है काम सूरज के साथ मुझको एक दिन सलाम तुम करोगे।। -महाकवि नीरजजी”को  समर्पित मेरी कविता।। मझवार, चन्दौली