विधानसभा चुनाव में 150 विधायकों के टिकट कटने की चर्चा से भाजपा में खलबली

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ये कोई नई बात नहीं है कि जब-जब चुनाव की सुगबुगाहट होती है, नेता अपने लाभ-हानि का गणित बैठाते हुए पार्टियों की अदला-बदली के लिए उछलकूद करने लगते हैं, ऐसा ही कुछ नजारा वर्तमान में भी दिखने लगा है। केन्द्र व राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा में इस समय अफरा-तफरी का माहौल है, क्योंकि कहीं से उड़ती-उड़ती खबर आयी है प्रदेश में लगभग 150 वर्तमान विधायकों का टिकट कट सकता है। चर्चा तो ये भी है कि मुजफ्फरनगर जिले के तीन या चार विधायकों…

श्री बालाजी सत्यधाम पीठ में विशाल भण्डारा 3 नवम्बर को

शि.वा.ब्यूरो, गोरखपुर। श्री बालाजी सत्यधाम पीठ के पीठाधीश्वर प्रेमजी महाराज ने श्री बालाजी मंदिर में 3 नवंबर को सुबह 10 से रात्री 10 बजे तक आयोजित होने वाले भंडारे में सभी श्रद्धालुओं को आमन्त्रित करते हुए बताया कि उक्त कार्यक्रम 3 नवम्बर रात 10 बजे या और देर रात्रि जब तक भक्त आते रहेंगे, भण्डारा जारी रहेगा और श्रद्धालु प्रसाद पाते रहेंगे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्र व पड़ोसियों सहित श्रीसत्य बालाजी सर्व संकट मोचन सरकार के दरबार में मत्था टेकने की अपील की है। श्री बालाजी…

नही आता

प्रज्ञा पांडेय “मनु”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जो दिल का हाल सुनाए ऐसा अख़बार नहीं आता। क्यों औरत के हिस्से में उसका इतवार नही आता। बचपन में मासूमियत का प्रतिशत हो रहा कम। किसी भी चैनल पर ऐसा कोई समाचार नही आता। बढ़ती कीमतों पर सब  वाद विवाद बहुत करते  हैं। गिरती इंसानियत पर प्रश्न करने कोई पत्रकार नही आता। सुकून के निवाले खा सके, शाम ढले घर आ सके। जाने क्यों आज कल ऐसा कोई रोज़गार नही आता। रोज़ ही सब से  मिलती हूं बात चीत भी करती हूं…

आगाज़

राजीव डोगरा “विमल”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। इन अंधेरों को बोलिए रोशनी का आगाज़ करें। इन नफरतों को बोलिए मोहब्बत का इजहार करें इन दुखों को बोलिए सुखों का आगाज़ करें। इन ग़मो को बोलिए इश्क का थोड़ा इजहार करें। इन तारों को बोलिए हमारे चांद का आगाज़ करें। इन परवानों को बोलिए जलने से पहले आपने राग को अनुराग करें। इन मुर्दों को बोलिए जलने से पहले नफरत को छोड़कर मोहब्बत का आगाज़ करें। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा, (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश

पुस्तक

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ज्ञान है विज्ञान है, अध्यातम है पुस्तक, सृष्टि के कण- कण का प्राण है पुस्तक। देव दानव, किन्नरों की पहचान है पुस्तक, माँ बहन, बेटी पत्नी का सम्मान है पुस्तक। मंदिर मे गीता रामायण, पुराण है पुस्तक, मस्जिद गुरूद्वारे, चर्च की शान है पुस्तक। बीते हुए युगों की शान, दास्तान है पुस्तक, अतीत है भविष्य है, वर्तमान है पुस्तक। कर्मों का लेखा जोखा, निदान है पुस्तक, जीवन के पल-पल का, विधान है पुस्तक। इज्जत है आबरू है, मेरा ईमान है पुस्तक, पूजा पाठ,…

विडम्बना

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। महिलाओं से ही घर है समाज है। मगर ताना एक ही है यह कि पुरूष प्रधान समाज है। परिवार के सभी कार्य स्त्री की सहमति से मगर आरोप “करेंगे तो अपने मन की”। पुरूष भी दिन रात मेहनत करें तो यह उसकी जिम्मेदारी और औरत काम करेगी तो कहेगी “नौकरानी बना दिया”। स्त्री के पास अपने पैसे होते हैं और होता है स्त्री धन और पुरुष सब कमाकर भी उसका अपना कुछ नहीं। क्योंकि वह समझता है पैसे पर पहला हक परिवार का…

मुमताज कि व्यथा

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बना कर कब्र मेरी, जहाँपनाह ने मोहब्बत का हसीन तोहफा दिया, जीते जी मैं महारानी थी मरने पर कातिल बना दिया। कब्र पर मेरी आने वाले सजदे में फूल नहीं लाते हैं, डाल कर चंद सिक्के वहां मेरी बेबशी का मजाक उड़ाते हैं। बनाकर नायब ताजमहल जहाँपनाह ने, अपनी मोहब्बत को ज़माने को दिखलाया। पर कलम करके हाथ हुनरमंदों के, मुझे कातिल बना डाला। सुला कर ‘ताज’ में मुझको, मेरे मालिक ने नींद से भी बेदखल कर डाला, अच्छा सिला दिया मेरी मोहब्बत…

जब तलक कानून का डर न था

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जब तलक कानून का डर न था, नेता सत्ता अधिकारी लूटता था। काट कर वन वृक्ष सब बेच डाले, नदियों के गर्भ को भी खोदता था। था नहीं कर तब कोई पानी हवा पर, फूल पत्ती परिंदों के पर नोंचता था। उजाड़ डाला सारा गुलशन स्वार्थ में, खुश्बूओं को बाजार में बेचता था। थी खबर हमको कहां क्या हो रहा था, कौन लूटे मुल्क को या धरा बेचता था? सो रहे थे तान चादर निर्लिप्त होकर, कोई बेटियों की अस्मतों को नोंचता था।…

दीपावली पर्व

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। यह सर्वविदित है कि भारत त्योहारों का देश है। भारत भूमि पर 36 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं, इसीलिए यहाँ का प्रतिदिन ही नहीं, प्रतिपल भी उत्सवों का पल है। भारत में प्रत्येक उत्सव के आयोजन के लिए निश्चित समय का महत्त्व व कारण मौजूद हैं। प्रत्येक त्यौहार के आयोजन का समय व कारण विज्ञान कि वर्तमान कसौटी पर खरा-परखा है। प्रत्येक वर्ष फागुन माह में होली तथा कार्तिक अमावस्या को दीपावली का आयोजन भारत ही नहीं, विश्व के प्रत्येक भाग में…

मुक्ति

डॉ. अ. कीर्तिवर्धन, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मुक्ति सम्भव नहीं वर्तमान से अतीत से और भविष्य से भी। बन्धनों में रहकर भी मुक्त रहना साधना है। अच्छे वस्त्र आभूषण अथवा माला कंठी धारण कर भी उसमें लिप्त न होना मुक्ति है। मुक्त होने के लिए बनना पड़ता है अपरिग्रही राजा जनक सा। मां अपमान यश अपयश पद प्रतिष्ठा सबको तज कर स्व को मिटाना पड़ता है। दायित्व का निर्वहन बिना आशक्त हुए मुक्ति है। मुक्ति आखिर किससे और क्यों? विचारना कहीं पलायन तो नहीं सामाजिक दायित्वों से अथवा किसी कोने…