हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के तत्वाधान में युवा साहित्य कला संवाद आयोजित

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा रविवार 9 मई को ऑनलाइन युवा साहित्य कला संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के सचिव कर्म सिंह व रविता चौहान ने किया। कार्यक्रम का आयोजन युवा साहित्य कला संवाद के संपादक हितेन्द्र शर्मा ने किया। युवा साहित्य कला संवाद में हिमाचल के युवा कवि व कवित्रियों ने भाग लिया, जिसमें की रविता चौहान जिला सिरमौर, रेखा ठाकुर जिला शिमला, प्रियंका नेगी जिला किन्नौर, उत्तम सूर्यवंशी जिला चंबा और राजीव डोगरा जिला कांगड़ा से…

करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

कुमारसैन क्षेत्र की प्रतिष्ठित आदि शक्ति कचेड़ी

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पश्चिमी हिमालय के मध्य हिमालय पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत हाटू पर्वत के अंचल में अवस्थित आदि शक्ति कचेड़ी कुमारसैन की प्रतिष्ठित शक्ति स्वरूपा देवी है। राष्ट्रीय मार्ग पाच पर ओडी नामक स्थान के दायीं ओर सघन देवदार के मनोहारी वन के मध्य स्थित देवी का सतलुज शिखर शैली में बना आदि मंदिर कुमारसैन के सलाट क्षेत्र के धर्म-आस्था के केन्द्र में है। समुद्र तल से लगभग साढ़े छ: हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित आदि शक्ति कचेड़ी का देवालय आगन्तुकों के निरन्तर शरणागति…

युवाओं के लिए पथ-प्रदर्शक व मील का पत्थर साबित हो रहे हिमाचल अकादमी के लाईव कार्यक्रम

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी शिमला के तत्वाधान में अकादमी के सचिव डा. कर्मसिंह व साहित्य कला संवाद के सम्पादक हितेन्द्र शर्मा के संयोजन में हिमाचल अकादमी के 326वें लाईव कार्यक्रम के तहत मनोहर सिंह राज्य स्तरीय जयंती समारोह के दौरान 12 अप्रैल 1938 को तत्कालीन क्यूमल रियासत और वर्तमान में शिमला की कुसुम्पटी तहसील के क्वारा गांव में बुद्धि सिंह के पुत्र रूप में जन्में प्रख्यात् रंगकर्मी मनोहर सिंह के सम्बन्ध में कई महान कलाकारों ने वर्चुअल अपने विचार व्यक्त किये। इस…

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी कार्यक्रम के तत्वाधान में संतोष शैलजा जयंती कार्यक्रम आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, शिमला। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा साहित्य कला संवाद कार्यक्रम में संतोष शैलजा की जीवन यात्रा व उनकी साहित्यिक रचनाधर्मिता पर एक वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। इस कार्यक्रम की संकल्पना पालमपुर की चंद्रकांता द्वारा की गई थी, जिसमें हिमाचल अकादमी के सचिव डॉ. कर्म सिंह, तकनीकी सहयोगी एवं सम्पादक हितेन्द्र शर्मा, सतीश धर एवं शांता कुमार और उनकी टीम का अबाध सहयोग…

हिमाचल प्रदेश में नव सम्वतसर का पारम्परिक आयोजन, इसी दिन हुई थी सृष्टि की रचना

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पश्चिमी हिमालय के केन्द्र में अवस्थित हिमाचल प्रदेश को वैदिक, पौराणिक एवम् भूगर्भीय अन्वेषण के आधार पर सृष्टि का उद्भव स्थल माना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भारतीय पंचाग के अनुसार विक्रमी सम्वत कालगणना के अनुसार नव वर्ष का आरम्भ माना जाता है। भारत में नव सम्वतसर को एक पर्व के रूप में मनाने की परम्परा रही है। कश्मीर में नया वर्ष नवरे कहलाता है। नवरे के दिन एक थाली में अन्न, धन-दव्य, फल, दर्पण, कलम और नये वर्ष का पंचांग रखकर…

हिमाचल की कला संस्कृति व इतिहास को संरक्षण की आवश्यकता

डा.हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल पश्चिमी हिमालय में स्थित ऐसा पर्वतीय प्रदेश है, जो आदि मानव की उत्पति से लेकर वैदिक, पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। यहां के लोक साहित्य, मौखिक परम्पराओं और संस्कारों में पुरातन वैदिक संस्कृति की गरिमा को अनुभव किया जा सकता है, परन्तु आज के बदलते परिवेश में हिमाचल के इतिहास और संस्कृति का क्षरण निरन्तर होता जा रहा है, जो घोर चिंता का विषय है। हिमाचल प्रदेश में शैव, शाक्त, नाग व वैष्णव मत प्रचलित हैं। नाग मत प्रागैतिहासिक मत…

हिमाचल के इतिहास पर डा. हिमेन्द्र बाली की शोधपरक पुस्तक है “हिमालय गौरव: हिमाचल प्रदेश”

सुरभि बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश पश्चिमी हिमालय में स्थित ऐसा पर्वतीय राज्य है, जो राष्ट्रीय विकास सूचकांक में सारे देश में अग्रणी राज्यों की पांत में शामिल है। नगाधिपति हिमालय के अंचल में स्थित हिमाचल का प्राकृतिक सौंदर्य अतुलनीय है। यहां के हिमाच्छादित पर्वत, सुरम्य स्थालाकृति और सदानीरा नदियों का कर्णप्रिय निनाद चिताकर्षक है। हिमाचल प्रदेश हिमालय के आगोश में पलता वह क्षेत्र है, जहां आदि मानव का उद्भव हुआ था। डा. हिमेन्द्र बाली पिछले तीन दशकों से हिमाचल की संस्कृति व इतिहास पर निरन्तर शोध कार्य…

रिसर्च का विषय है सतीश कुमार का कविता संग्रह “दरख़्त की छांव में”

राजेश सारस्वत, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश के उभरते युवा कवि सतीश कुमार का कविता संग्रह समीक्षा की कसौटियों से बाहर किसी शोध का विषय हो सकता है। सतीश शर्मा की कविताओं में भिन्न-भिन्न विषयों से संबंधित दर्शनिकता देखने को मिलती है। जैसे- गौर करोगे तो जान लोगे तुम भी सतीश ये दास्ताँ सबकी है बस इक तेरी नहीं है  महसूस तो करो इन लफ़्ज़ों को रूह से महसूस न हो तो ये कोई शायरी नहीं है।  ये पंक्तियाँ सच में आपकी शायरी और कविता की सारभूत है। सतीश…

शक्तियों के भण्डार स्वयंभू देव श्री नाग ढैशंरी करते है भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण, हर समय सुरक्षा में रहते है पंचवीर सहित कई देवी-देवता

टीसी ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी उपमण्डल करसोग से लगभग 42 किलोमीटर रानीकोट के आँचल में समुद्र तल से करीब 5500 फुट की ऊंचाई पर बसा है श्री नाग ढैशंरी जी का भव्य मंदिर। नाग ढैशरी अनेक अलौकिक शक्तियों के स्वामी है। नाग ढैशरी जी को च्वासी क्षेत्र के प्राचीन देवों में से माना जाता है। नाग ढैशरी जी के बारे में जनश्रुतियों, बुद्धिजीवियों तथा बुजुर्गों का मानना है कि किसी समय जैई गांव में दो परिवार रहते थे, उसमें एक व्यक्ति बोल नहीं पाता था…