कार्य के प्रति निष्ठा के लिए जाने जाते हैं युवाओं के प्रेरणास्रोत ध्यान सिंह ठाकुर

टीसी ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हौंसले जिसके बुलंद हो और मन में कुछ नया करने का जुनून हो तो फिर कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। जी हाँ!  हम बात कर रहे हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी उपमण्डल करसोग में सिद्ध नाथ पीठ चवासीसिद्ध मंदिर कमेटी महोग के प्रधान ध्यान सिंह ठाकुर की। ध्यान सिंह ठाकुर की एक बड़ी विशेषता है कि वो मंदिर से जुड़े हर कार्य क्षेत्र में सबको साथ लेकर कार्य करते है, चाहे महोग मंदिर जीर्णोद्धार हो या फिर च्वासीगढ़ की कोई अन्य बात हो। वर्तमान…

कोरोना के भेंट चढ़ रहे देव परम्परा की प्राचीन रीति रिवाज, सूक्ष्म रीति से मनाना पड़ा गढ़पति नाग देवता जी का जन्मोत्सव

शि.वा.ब्यूरो, कारदार च्वासीगढ़, करसोग (मण्डी) हिमाचल प्रदेश। क्षेत्र के अराध्य देव व च्वासी क्षेत्र के गढ़पति श्री नाग च्वासी सिद्ध जी का जन्मदिन हर वर्ष की भान्ति इस बर्ष भी आषाढ़ 03 को उनके जन्म स्थान शगाच में मनाया गया। इस बर्ष कोरोना महामारी के चलते प्राकट्य दिवस सूक्ष्म विधि विधान से मनाया गया। मंदिर कमेटी के प्रधान श्री ध्यान सिंह ठाकुर युवा कारदार टीसी ठाकुर ने बताया कि इस बर्ष श्री नाग च्वासी सिद्ध जी के जन्मदिन मंदिर के चुनिंदा लोगों ने विधि विधान से रस्म निभाई। उन्होंने ने…

बाहरी सराज की अधिष्ठात्री देवी कुसुम्भा भवानी

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जिला कुल्लू के दक्षिण में स्थित आनी उपमण्डल का सम्पूर्ण क्षेत्र बाहरी सराज क्षेत्र के अंतर्गत आता है। बाहरी सराज क्षेत्र की सदानीरा शवाड़, काण्डूगाड़  व बुछैर सरितायें पीरपंजाल की धौलाधार पर्वत श्रृंखला से निकलकर आनी घाटी का श्रृंगार करती है। काण्डूगाड़ व बुछैर का संगम आनी के प्रतिष्ठित देव महादेव शमशरी के पावन स्थल शमशर में होता है। आगे यही सरिता आनी खड्ड के नाम से प्रवाहमान होती है। सरिता थोड़े आगे बहती हुई आनी खड्ड में विलीन हो जाती है। अंतत:…

पांगणा-करसोग-मण्डी में हर्षोल्लास से मनाया गया बकरयाला साजा महापर्व

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश के मण्डी जनपद मे स्थित कमरुनाग झील एक खूबसूरत पावन स्थली है। लगभग आधा किलोमीटर की परिधि में फैली इस झील के तट पर पांडवों के ठाकुर कमरुनाग जी का पहाड़ी शैली में बना लघु लेकिन बहुत सुंदर मंदिर है। कमरुनाग परिसर का सौदर्य अनुपम है। श्रद्धालुओ अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण होने पर पहले कमरुदेव जी के मंदिर मे स्थापित कमरुदेव जी की पूजा-अर्चना करते हैं फिर झील में विराजमान कमरुनाग जी की पूजा कर सोना-चांदी-सिक्कों के रुप में अपनी मन्नौतियां भेंट के…

ऑनलाइन पढ़ाई एक मजबूरी है

नीता भारद्वाज “नीतु “, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ऑनलाइन पढ़ाई एक मजबूरी है, पर बिना स्कूल पढ़ाई बिल्कुल अधूरी है। दुखी हो गए हैं अभिभावक इस ऑनलाइन पढ़ाई से। खत्म होने लगी है जैसे शिक्षा प्राणाली इस फोन की पढ़ाई से। मासूम बच्चे अब घर पर ही बोर हैं, नहीं सुनाई देता अब उनका शोर है। बच्चे के तन-मन पर देखो अब ऑनलाइन का पहरा है, किसको अपना दर्द बताएं, जख्म बहुत ही गहरा है। ऑनलाइन पढ़ाई के दुष्परिणामो को झेल नहीं पाएंगे हम, अपने ही बच्चों के संघ खेल…

हिमाचली भाषा श्रृंखला 130 (विश्व पर्यावरण दिवस विशेष)

पौमिला सिंह ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पर्यावरण बचाने का अर्थ आज एक पौधा लगाते हुए फ़ोटो खिंचवाने का और उसे सोशल मीडिया पर प्रचारित प्रसारित करने तक ही रह गया है। पर्यावरण बचाये रखने का मेरा तरीका यह है कि प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पौधों से उपजे फल और फूलों से खाद्य पदार्थ, जैसे-अचार मुरब्बे बनाने के प्रति महिलाओं को जागरूक किया जाए, ताकि वे इनकी महता जानकर इनका संरक्षण व संवर्धन करें। आजकल लिंगड़ी, प्लम, आड़ू, टमाटर, बैंगन, आलू का सीजन है।  इन सबका अचार बनाकर…

करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से, घोड़े पर आरूढ़ होकर आएगी माता हाथी पर होगा प्रस्थान

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आदि शक्ति का सर्वलोकप्रिय महापर्व चैत्र बासंतिक नवरात्रि का शुभारंभ 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से होने जा रहा है। अनेकों वर्षों की भांति इस वर्ष भी शुभ एवं दुर्लभ संयोगों से युक्त नवरात्रि का यह महापर्व सभी भक्तों के जीवन को तेजोमय एवं एश्वर्य से युक्त बनाए।  13 अप्रैल को ही घट स्थापना के लिए विशेषत: शुभकारक रहेगा। इस दिन प्रातः काल सर्वार्थ सिद्धि योग 06: 09 मिनट से लेकर दोपहर के 02: 23  मिनट तक रहेगा। इसी दिन राक्षस नामक सम्वत्सर तदनुसार 2078…

हिमाचली भाषा का सोशल मीडिया के माध्यम से संरक्षण और संवर्धन 

कल्पना गांगटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमवाणी संस्था के सभी सदस्य हिमाचली भाषा, लोक साहित्य व संस्कृति के संरक्षण हेतु वचनबद्ध है। अब तक हिमवाणी फेसबुक पेज पर हिमाचली भाषा के पचास एपिसोड पूरे हो चुके हैं, यह कारंवा आगे भी  ज़ारी रहेगा। बहुत से साहित्यकारों ने कविताएं व लेख प्रस्तुत कर  हिमाचल की विभिन्न जिला की बोलियों को  आम जनमानस तक पहुंचाने का प्रशंसनीय कार्य किया है। जिन साहित्यकारों, लेखकों व कवियों ने अपनी उपस्थिति से पटल को गौरवान्वित किया है, उनमें धर्म पाल भारद्वाज कोटगढ़ शिमला, ओम प्रकाश…

हिमाचली लोक संस्कृति का प्रतीक है शिवरात्रि

उमा ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल के आँचल में बसा हिमाचल तपोभूमि है, हिमालय के ऊँचे टीले पर शिव का निवास स्थान है। इसी वजह से यहाँ शिव गौरी के कई उत्सव मनाने की परंपरा हैं, जिसमें गौरी तृतीय, हरितालिका, निर्जला एकादर्शी और शिवरात्रि खास है। वैसे तो हिमाचल के प्रत्येक जिलों में भौगोलिक परिस्थिति के कारण इस त्यौहार को मनाने में थोड़ा बहुत अन्तर जरूर है, लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं है। मण्डी में जहाँ देव परम्परा के मिलन स्वरूप शिवरात्रि मनाई जाती हैं। उपरी शिमला जैसे कि…