करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से, घोड़े पर आरूढ़ होकर आएगी माता हाथी पर होगा प्रस्थान

राज शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आदि शक्ति का सर्वलोकप्रिय महापर्व चैत्र बासंतिक नवरात्रि का शुभारंभ 13 अप्रैल 2021 मंगलवार से होने जा रहा है। अनेकों वर्षों की भांति इस वर्ष भी शुभ एवं दुर्लभ संयोगों से युक्त नवरात्रि का यह महापर्व सभी भक्तों के जीवन को तेजोमय एवं एश्वर्य से युक्त बनाए।  13 अप्रैल को ही घट स्थापना के लिए विशेषत: शुभकारक रहेगा। इस दिन प्रातः काल सर्वार्थ सिद्धि योग 06: 09 मिनट से लेकर दोपहर के 02: 23  मिनट तक रहेगा। इसी दिन राक्षस नामक सम्वत्सर तदनुसार 2078…

हिमाचली भाषा का सोशल मीडिया के माध्यम से संरक्षण और संवर्धन 

कल्पना गांगटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमवाणी संस्था के सभी सदस्य हिमाचली भाषा, लोक साहित्य व संस्कृति के संरक्षण हेतु वचनबद्ध है। अब तक हिमवाणी फेसबुक पेज पर हिमाचली भाषा के पचास एपिसोड पूरे हो चुके हैं, यह कारंवा आगे भी  ज़ारी रहेगा। बहुत से साहित्यकारों ने कविताएं व लेख प्रस्तुत कर  हिमाचल की विभिन्न जिला की बोलियों को  आम जनमानस तक पहुंचाने का प्रशंसनीय कार्य किया है। जिन साहित्यकारों, लेखकों व कवियों ने अपनी उपस्थिति से पटल को गौरवान्वित किया है, उनमें धर्म पाल भारद्वाज कोटगढ़ शिमला, ओम प्रकाश…

हिमाचली लोक संस्कृति का प्रतीक है शिवरात्रि

उमा ठाकुर, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल के आँचल में बसा हिमाचल तपोभूमि है, हिमालय के ऊँचे टीले पर शिव का निवास स्थान है। इसी वजह से यहाँ शिव गौरी के कई उत्सव मनाने की परंपरा हैं, जिसमें गौरी तृतीय, हरितालिका, निर्जला एकादर्शी और शिवरात्रि खास है। वैसे तो हिमाचल के प्रत्येक जिलों में भौगोलिक परिस्थिति के कारण इस त्यौहार को मनाने में थोड़ा बहुत अन्तर जरूर है, लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं है। मण्डी में जहाँ देव परम्परा के मिलन स्वरूप शिवरात्रि मनाई जाती हैं। उपरी शिमला जैसे कि…

बसंत तुम जब

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बसंत तुम जब आते हो । प्रकृति में नव -उमंग,  उन्माद भर जाते हो। बसंत तुम जब आते हो हवाएं चलती हैं सुगंध ले कर। जीवन में खुशबू बिखराते हो। बसंत तुम जब आते हो।  कितने नए एहसास जागते हैं। सृजन की प्रेरणा दे । नित -नूतन संसार सजाते हो। हर तरफ फूलों से बगियाँ तुम सजाते हो।। कहीं पीले -कहीं नारंगी। लाल गुलाब महकाते हो। बसंत तुम जब आते हो। जीवन में उमंग भर जाते हो। नदिया इठला कर चलती है। दिनों…

हिमाचल में बम्पर बर्फवाती से बिछी चांदी सी सफेद चादर

डॉ जगदीश शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी पांगणा चांदी  सा चमक उठा। सर्दी का मौसम आते ही सभी की तमन्ना बर्फ के बिछौने पर अठखेलियां करने की होती है। बर्फ के बाहों का गिरना, बर्फ के गोले बनाकर एक दूसरे पर फेंकना, बर्फ के बुत बनाना, बर्फ पर फिसलने का उल्लास निराला ही होता है। हिमालय प्रदेश के पहाड़ी भागों में किसानों बागबानो के लिए बर्फ खाद के तुल्य है। ऐसे में बर्फ गिरने पर पहाड़ के निवासी किसान बागवान खुशी से फूले नहीं समाते। “हीऊँए…

सुकेती उपबोली का साहित्यिक व सांस्कृतिक अवलोकन

डा. हिमेन्द्र बाली हिम, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सुकेत पूर्ववर्ती सुकेत रियासत का ऐसा भौगोलिक व सांस्कृतिक स्वरूप है, जिसका अधिकत्तर क्षेत्र सतलुज घाटी में अवस्थित है। यहां बोली जाने वाली सुकेती उपबोली को दो भागों में बांटा जा सकता है। सुकेत का उत्तरी भाग जो ब्यास घाटी में है और दूसरा भाग जो सतलुज घाटी में है। वास्तव में सुकेती मण्डयाली बोली की ही शाखा है। मण्डयाली का जन्म 11वीं शताब्दी में शौरसैनी अपभ्रंश से हुआ। सकेती उपबोली में प्रचुर मात्रा में लोक साहित्य बिखरा पड़ा है। सुकेती उपबोली…

कलात्मक है कोटी में कोटेश्वर महादेव का मंदिर

हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कोटश्वर महादेव कुमारसैन तहसील के अधिपति देव माने जाते हैं। एक हजार ईस्वी में गया के कीर्ति सिंह राजा को लौकिक राज्य देकर स्वय महादेव यहां की धर्म संस्कृति के सर्वोच्च सत्ताधीश हैं। कोटेश्वर महादेव को अष्ठ कोटी देव माना जाता है। मान्यता है कि महादेव पाकिस्तान में स्थित हिंगलाज होते हुए हाटकोटी पहुंचे। वहां से कुमारसैन में बटाड़ा गांव के ब्राह्मण को नाग रूप में प्राप्त हुए और कालांतर में मढोली में प्रतिष्ठित हुए। मढोली के समीप कोटी में महादेव का सतलुज…

मण्डी के पांगणा में मिली युगों पुरानी सूर्यदेव की प्राचीन मूर्तियां

डाक्टर हिमेन्द्र बाली’हिम”, डाक्टर जगदीश शर्मा व राज शर्मा आनी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।  सूर्य देव की अद्वितीय प्रस्तर प्रतिमा सुकेत रियासत की ऐतिहासिक राजधानी पांगणा के महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर के परिसर में मिलने से यहाँ के इतिहास की प्राचीनता पर दृष्टिपात होता है। कला पक्ष की दृष्टि से इस मूर्ति को 12वी शताब्दी का माना जा रहा है। सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जन कल्याण मंच के अध्यक्ष डाक्टरा हिमेन्द्र बाली ‘हिम” का कहना है कि भगवान सूर्य हिंदू परंपरा के पंचदेवो में माने जाते हैं। भारतीय देव पूजा…

हिंदी! हिंद की बेटी

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। भारत के उज्ज्वल माथे की। मैं ओजस्वी बिंदी हूँ। मैं हिंद की बेटी हिंदी हूँ। संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश की पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेली हूँ। मैं जन-जन के मन को छूने की। एक सुरीली सन्धि हूँ। मैं मातृभाषा हिंदी हूँ। मैं देवभाषा , संस्कृत का आवाहन राष्ट्र मान हिंदी हूँ। मैं हिंद की बेटी हिंदी हूँ। पहचान हूँ हर, हिन्दोस्तानी की मैं। आन हूँ हर, हिंदी साहित्य के अगवानों की मैं। मां! बोली का मान हूँ…मैं। भारत की, अनोखी शान हूँ मैं। मुझको लेकर चलने…