कोरोना

आकृति व सोनाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। न जाने यह कहां से आया पूरे देश में डर है छाया। आना जाना बंद करवाया सभी लोगों को घर पर बिठाया। स्कूल की है याद  सताए दोस्तों के बिन रहा न जाए। कोरोना वायरस सबको डराए सभी के मुंह पर मास्क लगाए। लोग बाहर निकलने से भी घबराए घर पर बैठे बोर हो जाए। स्कूल कॉलेज बंद करवाए कोरोना वायरस बढ़ता जाए। इसका इलाज समझ ना आए इसलिए हम सब को खूब सताए। आओ,हम सभी नियम अपनाएं पूरे देश को इस बीमारी…

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के तत्वाधान में युवा साहित्य कला संवाद आयोजित

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा रविवार 9 मई को ऑनलाइन युवा साहित्य कला संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के सचिव कर्म सिंह व रविता चौहान ने किया। कार्यक्रम का आयोजन युवा साहित्य कला संवाद के संपादक हितेन्द्र शर्मा ने किया। युवा साहित्य कला संवाद में हिमाचल के युवा कवि व कवित्रियों ने भाग लिया, जिसमें की रविता चौहान जिला सिरमौर, रेखा ठाकुर जिला शिमला, प्रियंका नेगी जिला किन्नौर, उत्तम सूर्यवंशी जिला चंबा और राजीव डोगरा जिला कांगड़ा से…

प्रलय

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सुधरो मानव सुधरो अब भी प्रलय बाकी है, गूँज रहा है जो नाद महाकाली का, उसमें काल का अब भी नृत्य करना बाकी है। बहुत तोड़ी है अहम में लोगो की नसें, अभी काल के द्वारा तुम्हें तोड़ना बाकी है। समझते थे तुमको सब मानव, मगर बनकर रह गए तुम एक दानव। तभी रण चंडी का हुंकार भर संहार करना अभी बाकी है। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश

हिमाचल के युवा कवि राजीव डोगरा ‘विमल’ को मिला साहित्य श्री सम्मान

शि.वा.ब्यूरो, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश के युवा कवि और भाषा अध्यापक राजीव डोगरा ‘विमल’ को दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के न्यूज़ वेब पोर्टल पर नियमित रचना प्रकाशन हेतु साहित्य श्री सम्मान देकर सम्मानित किया गया।सम्मान मिलने पर उनके पिता हंसराज माता सरोज कुमारी और बड़े भाई पीएचडी शोधकर्ता अमित डोगरा तथा स्कूल के मुख्याध्यापक प्रवेश शर्मा,रविंदर नरयाल खण्ड स्त्रोत केंद्रीय समन्वयक खण्ड कांगड़ा के बीआरसी कुल्लू के साहित्यकार तथा संस्कृति के संरक्षक राज शर्मा और शिमला के साहित्यकार रोशन जसवाल ने अत्यंत खुशी व्यक्त की तथा राजीव को…

मेरा भाई

सोनाल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मेरा भाई सबसे प्यारा सबका है वो राज दुलारा। वो मेरी जान है उस पर सबको गुमान है। जितना लड़ता है मुझसे उतना ही प्यार करता है मुझसे। उम्र में मेरे से छोटा  है अकल में थोड़ा खोटा है। इतना भी डराऊँ उसको मुझे न बिल्कुल भी डरता है। हमेशा मुझे लड़ता है पर ख्याल भी मेरा बहुत रखता है। बात माने न माने मेरी मगर मुझे प्यार बहुत करता है। नौवीं कक्षा की छात्रा राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा, हिमाचल प्रदेश

बीते हुए कल  

अमित डोगरा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत घूम। तुमसे अपने हर दर्द का हिसाब लूंगा । अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत हंस तुमसे अपने हर आंसू का हिसाब लूंगा। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत सो तुमसे अपनी हर नींद का हिसाब लूंगा। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर अपनी झूठी शान पर मत इतरा, तुमसे अपने हर अपमान का हिसाब लूंगा। कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

तुम मुझ मैं

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। वक्त की दौड़ में वक्त की हौड़ में सब कुछ बहता चला जा रहा है। सिवाए मेरे हृदय में खनखनाती हुई तेरी स्थिर यादों के। वक्त के शोर में वक्त के हिलोर में सब जगह खामोशी का एक सन्नाटा बिखरे जा रहा है। सिवाए मेरे अंतर्मन में तेरी गुनगुनाती यादों के। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश

मेरी माँ

शिनम धीमान, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। घुटनों से रेंगते-रेंगते कब पैरों पर खड़ी हुई, जाने कब बड़ी हुई माँ। काला टीका दूध मलाई आज भी सब कुछ तेरा वैसा ही है माँ। माँ ही माँ हर दिखती जगह कैसा प्यारा प्यार तेरा माँ। सीधी-साधी,भोली-भाली, सबसे अच्छी मेरी माँ हूँ। कितनी भी बड़ी हो जाऊं मैं आज भी तेरी बच्ची हूँ माँ। नौवीं कक्षा की छात्रा राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा, हिमाचल प्रदेश

वक्त का पहिया

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जा चुके है जो इस धरा से वो फिर लौट कर आएंगे। तेरे पास न सही मेरे पास तो जरूर आएंगे। देकर हाथ तेरा मेरे हाथ में फिर मुस्कुराएंगे। छोड़ चुके हैं जो अपने अनजान बनकर अनकही राहों में। वक्त का पहिया जरा पलटने तो दो वही फिर से हमें अपने गले लगाएंगे। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश

अनुभूति

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जिक्र नहीं इसका ये अर्थ नहीं, उनका अब हमें कोई फिक्र नही। जीवन की दौड़ में न भूले है न विसरे है उनको अंतर्मन की राहों में सिमरा है हर पल उनको। छोड़ा है बस उनके साथ चलना, मगर छोड़ा नही कभी उनका साथ निभाना। अनजान किया बस अपनी बहकती नजरों से मगर आज भी जान पहचान बनाये रखी है हृदय की गहरी अनुभूति में। युवा कवि और लेखक, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश