हिमाचल के युवा कवि राजीव डोगरा ‘विमल’ को मिला साहित्य श्री सम्मान

शि.वा.ब्यूरो, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश के युवा कवि और भाषा अध्यापक राजीव डोगरा ‘विमल’ को दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह के न्यूज़ वेब पोर्टल पर नियमित रचना प्रकाशन हेतु साहित्य श्री सम्मान देकर सम्मानित किया गया।सम्मान मिलने पर उनके पिता हंसराज माता सरोज कुमारी और बड़े भाई पीएचडी शोधकर्ता अमित डोगरा तथा स्कूल के मुख्याध्यापक प्रवेश शर्मा,रविंदर नरयाल खण्ड स्त्रोत केंद्रीय समन्वयक खण्ड कांगड़ा के बीआरसी कुल्लू के साहित्यकार तथा संस्कृति के संरक्षक राज शर्मा और शिमला के साहित्यकार रोशन जसवाल ने अत्यंत खुशी व्यक्त की तथा राजीव को…

मेरा भाई

सोनाल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मेरा भाई सबसे प्यारा सबका है वो राज दुलारा। वो मेरी जान है उस पर सबको गुमान है। जितना लड़ता है मुझसे उतना ही प्यार करता है मुझसे। उम्र में मेरे से छोटा  है अकल में थोड़ा खोटा है। इतना भी डराऊँ उसको मुझे न बिल्कुल भी डरता है। हमेशा मुझे लड़ता है पर ख्याल भी मेरा बहुत रखता है। बात माने न माने मेरी मगर मुझे प्यार बहुत करता है। नौवीं कक्षा की छात्रा राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा, हिमाचल प्रदेश

बीते हुए कल  

अमित डोगरा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत घूम। तुमसे अपने हर दर्द का हिसाब लूंगा । अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत हंस तुमसे अपने हर आंसू का हिसाब लूंगा। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर मत सो तुमसे अपनी हर नींद का हिसाब लूंगा। अरे! बीते हुए कल बेफिक्र होकर अपनी झूठी शान पर मत इतरा, तुमसे अपने हर अपमान का हिसाब लूंगा। कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

करसोग के बेलर गांव में विराजमान है महामाया पांगणा

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश की पावन भूमि का कण कण ईश्वरीय आभा से आलोकित है। हिमालय की तलहटी में स्थित हिमाचल वर्तमान में मानव सृष्टि के आदि पुरूष वैवस्वत मनु की वह स्थली है, जहां उतुंग पर्वत शिखर पर जल प्लावन के बाद सप्त ऋषियों सहित उनकी नाव को मत्स्यावतार धारी भगवान विष्णु ने नाव का बंधन किया था। यहीं हिमाचल के सुरम्य परिवेश में ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से मानव संस्कृति के आधार ग्रंथ वेदों का प्रणयन किया था। हिमाचल प्रदेश के हर…

तुम मुझ मैं

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। वक्त की दौड़ में वक्त की हौड़ में सब कुछ बहता चला जा रहा है। सिवाए मेरे हृदय में खनखनाती हुई तेरी स्थिर यादों के। वक्त के शोर में वक्त के हिलोर में सब जगह खामोशी का एक सन्नाटा बिखरे जा रहा है। सिवाए मेरे अंतर्मन में तेरी गुनगुनाती यादों के। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश

मेरी माँ

शिनम धीमान, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। घुटनों से रेंगते-रेंगते कब पैरों पर खड़ी हुई, जाने कब बड़ी हुई माँ। काला टीका दूध मलाई आज भी सब कुछ तेरा वैसा ही है माँ। माँ ही माँ हर दिखती जगह कैसा प्यारा प्यार तेरा माँ। सीधी-साधी,भोली-भाली, सबसे अच्छी मेरी माँ हूँ। कितनी भी बड़ी हो जाऊं मैं आज भी तेरी बच्ची हूँ माँ। नौवीं कक्षा की छात्रा राजकीय उच्च विद्यालय ठाकुरद्वारा, हिमाचल प्रदेश

वक्त का पहिया

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जा चुके है जो इस धरा से वो फिर लौट कर आएंगे। तेरे पास न सही मेरे पास तो जरूर आएंगे। देकर हाथ तेरा मेरे हाथ में फिर मुस्कुराएंगे। छोड़ चुके हैं जो अपने अनजान बनकर अनकही राहों में। वक्त का पहिया जरा पलटने तो दो वही फिर से हमें अपने गले लगाएंगे। भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश

कुमारसैन क्षेत्र की प्रतिष्ठित आदि शक्ति कचेड़ी

डा. हिमेन्द्र बाली, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। पश्चिमी हिमालय के मध्य हिमालय पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत हाटू पर्वत के अंचल में अवस्थित आदि शक्ति कचेड़ी कुमारसैन की प्रतिष्ठित शक्ति स्वरूपा देवी है। राष्ट्रीय मार्ग पाच पर ओडी नामक स्थान के दायीं ओर सघन देवदार के मनोहारी वन के मध्य स्थित देवी का सतलुज शिखर शैली में बना आदि मंदिर कुमारसैन के सलाट क्षेत्र के धर्म-आस्था के केन्द्र में है। समुद्र तल से लगभग साढ़े छ: हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित आदि शक्ति कचेड़ी का देवालय आगन्तुकों के निरन्तर शरणागति…

गहन निराशा और अंधकार से तारती हैं दस महाविद्याओं में से एकमां तारा(जयंती विशेष)

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जयंती चैत्र माह की नवमी तिथि तथा शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।इस वर्ष महातारा जयंती 21 अप्रैल 2021, के दिन मनाई जाएगी। चैत्र माह की नवमी तिथि तथा शुक्ल पक्ष के दिन माँ तारा की उपासना तंत्र साधकों  और उनके भक्तों के लिए सर्वसिद्धिकारक मानी जाती है। दस महाविद्याओं में से एक हैं भगवती तारा। महाकाली के बाद मां तारा का स्थान आता है। जब इस दुनिया में कुछ भी नहीं था, तब अंधकार रूपी ब्रह्मांड में सिर्फ देवी काली थीं। इस…

अनुभूति

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जिक्र नहीं इसका ये अर्थ नहीं, उनका अब हमें कोई फिक्र नही। जीवन की दौड़ में न भूले है न विसरे है उनको अंतर्मन की राहों में सिमरा है हर पल उनको। छोड़ा है बस उनके साथ चलना, मगर छोड़ा नही कभी उनका साथ निभाना। अनजान किया बस अपनी बहकती नजरों से मगर आज भी जान पहचान बनाये रखी है हृदय की गहरी अनुभूति में। युवा कवि और लेखक, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश