जख्म

कल्पना गांगटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। भरे नहीं कभी जो जख्म अपनों ने ही तो दिए हैं… शिकवा किसी से क्या करे वो सपनों में ही जो जीए हैं। दिल दुखे न किसी का हमसे तभी  होंठ भी सी लिए हैं। भरे नहीं कभी जो जख्म…………. भीगे- भीगे से नयन भी अब अश्क छुपाए हुए हैं, खोले क्या अब राज वो दिल में जो दबाए हुए हैं, भरे नहीं कभी जो जख्म…………. उन यादों को करे दूर कैसे मन में जो डेरा बसाए हुए हैं… छीन रहे हैं पंख वही…

मनुस्मृति में नारी की विस्मृति क्यों

प्रीति शर्मा “असीम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। इस तथ्य में कोई दो राय नहीं है कि भारतीय सभ्यता में नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है। नारी का सम्मान सर्वोपरि है। वह सारी सृष्टि की पालक और जीवन दायिनी है। तो ऐसे कौन से कारण रहे होंगे, जिन्होंने नारी के वर्चस्व पर सवाल उठाते-उठाते उसे दीन-हीन और संस्कारों के नाम पर बेडियों चीनू कल-कल पानी पी ले में बंधी हुई एक वस्तु बना दिया। उसके अस्तित्व को नकारते हुए उसे दूसरे दर्जे कि प्राणी घोषित कर दिया कि बुरे…

टीशु पेपर

कल्पना गांगटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। नन्हा यश कमरे में खेल रहा था उसी समय उसकी नज़र शैल्फ पर रखे पोस्टर कलर पर पड़ गई जैसे ही वह निकालने लगा कलर उसके हाथ से गिर कर फर्श पर बिखर गए। हड़बड़ी में समेटने की कोशिश में उसने अपनी शर्ट के साथ साथ हाथ और मुंह भी खराब कर दिए। यश की माँ नीलम भी कुछ आवाज सुनकर यश के पास दौड़ी आई। जब देखा कि बच्चा गंदा हो गया तो डांटते हुए बोली-क्या कर दिया, हैंडज भी गंदे और शर्ट…

प्रेरणा

प्रीति शर्मा “असीम “, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। तुम से प्ररेणा पा, नन्हे नन्हे कदमों से, इंसान ऊंचाईयों का, सफर तय कर जाता है। कितने बड़े बड़े , कामों को, पलों में कर जाता है। धरती से चांद तक की, दूरी तय कर जाता है। लेकिन हे ईश्वर……. तुम्हारे आगे खड़े होने पर, हर उड़ान को, बौनी ही पाता है । तुमसे प्ररेणा पा, नन्हे -नन्हे हाथों से, बंजरो को आबाद,  कर जाता है। समंदरों से पहाड़ों तक, पुलों को खींच आता है। दुनियां के दुर्लभ, संसाधनों को ढूंढ लाता…

बैल पूजा से जुडा़ है जाच्छ काण्डा का शकूरा देवोत्सव

डा. हिमेन्द्र बाली “हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सुकेत की प्राचीन राजधानी पांगणा के पर्वोत्तर में जाच्छ-चरखड़ी सड़क पर छोल गढ़ के अंचल में  काण्डा नामक स्थान पर नृसिंह भगवान का मंदिर सम्पूर्ण मण्डी-सुकेत क्षेत्र में पशु धन वृद्धि, रोग निवारण, भूत बाधा निवारण और फसलों की वृद्धि के लिए विख्यात है। नाचन निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत इस गांव का सांस्कृतिक परिदृश्य सनातन परम्परा का जीवंत उदाहरण है। काण्डा गांव में नृसिंह भगवान का पैगोडा मण्डपीय शैली का मंदिर बना है। मंदिर के समीपस्थ नृसिंह भगवान के वृषभ रूप गण…

सर्वमान्य है ग्राम पंचायत भरैड़ी के अराध्य धानेश्वर महादेव

विशाल सिंह भंडारी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ज़िला शिमला के उपखंड कुम्हारसेन (शांगरी-गढ़) में मान्यता प्राप्त देव है ग्राम पंचायत भरैड़ी के अराध्य देवता धानेश्वर महादेव। महादेव जी की 600 साल प्राचीन ऐतिहासिक कोठी भरैड़ी ग्राम में स्थिति है। जनश्रुति के अनुसार धानेश्वर महादेव जी अपने पांच भाईयों और एक लाडली बहन के साथ कैलाश-मानसरोवर से लगभग 7000 वर्ष पुर्व इस धरा पर अवतरित हुए थे। महादेव जी का मूल स्थान लवाण गाँव में है, जहाँ महादेव जी सहस्त्रों-वर्ष पुर्व धान के बीच से प्रकट हुए थे और तत्पश्चात आज…

वजूद

राजीव डोगरा ‘विमल’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। उड़ चुके हैं जो परिंदे वो फिर लौटकर आएंगे, मेरे पास न सही खुदा तेरे पास तो जरूर आएंगे। ये सारा जहान तेरा है, मुझ से न सही पर तुम से तो फिर से जरूर टकराएंगे। जब मिले तुमको तो पूछना ज़रा बैठकर, जान कर भी तेरे वजूद को तेरे ही इंसा को फिर क्यों तड़पा रहे थे ? जानकर भी कि ये धरती ये आसमा सब तेरा है फिर क्यों किसी का भाग्य विधाता बनकर बैठे थे? युवा कवि लेखक कांगड़ा, हिमाचल…

कुमारसैन क्षेत्र से शक्ति स्थलों का है गहरा व पुराना नाता

डा. हिमेन्द्र बाली हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। वैदिक वांडमय में शक्ति पूजा की व्यापक परम्परा रही है। मानव सृष्टि के आरम्भिक काल में भौतिक जगत की अतुल शक्तियों से अभिभूत होकर प्रकृति के विभिन्न रूपों के पूजन की परम्परा आरम्भ हुई थी। वैदिक काल में प्रकृति के विविध रूप जैसे नदी, पर्वत, जल, ऊषा, संध्या व अरण्य आदि देवियों की स्वच्छंद उपासना की परम्परा थी। हिमाचल का सम्पूर्ण क्षेत्र पुराणों में वर्णित पर्वतराज हिमालय के पांच खण्ड -नेपाल, कूर्मांचल, केदार, जालंधर और कश्मीर में से जालंधर खण्ड के अंतर्गत…

मेरा वजूद

मनमोहन शर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। तलाशता हूँ अपने ही वजूद को घनघोर वन में गुम सुई की तरह चल रहा था मुद्दत से वो साथ मेरे और मैं उसकी परछाई की तरह मुखौटे लिए फिरते वाशिंदो के शहर में कौन किसे पहचान सका? कभी इस वेश में कभी उस भेष में राग वश कभी द्वेष में छीनते चले सब मुझसे मेरा वजूद और मैं खो बैठा अपनी ही पहचान आईने में मेरे आसपास पड़े हैं ढेरों बेजान मुखौटे लूटाता रहा खुद को खुद ही से मैं जिनकी भाव भंगिमाओं…

सर्प दंश से मुक्ति प्रदान करते है मरोड़ा के माहूंनाग

डा. हिमेन्द्र बाली हिम”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हिमाचल प्रदेश के मण्डी जिले की तहसील करसोग के दक्षिण-पूर्व में वैदिक नदी सतलुज के दायें तट पर स्थित मरोड़ा गांव में नाग अधिपति माहूंनाग का शिखर शैली का मंदिर अवस्थित है। माहूंनाग महाभारत के महारथी सूर्यपुत्र महादानी कर्ण के अवतार हैं। कुंती के ज्येष्ठपुत्र कर्ण जब अपने अनुज अर्जुन के हाथों वीरगति को प्राप्त हुए तो श्रीकृष्ण ने पाण्डवपुत्रों को कर्ण के उनके सहोदर होने का रहस्योद्घाटन किया था। शोक संतप्त पाण्डवों ने अपने अग्रज का अंतिम संस्कार सतलुज और वैदिक…