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अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। स्टाफ रूम से डायरेक्टर साहेब के कमरे की और बढ़ते हुए दिनेश सर बस यही सोच रहे थे कि आज़ स्कूल का आखिरी दिन है। सभी टीचर उनके लिए दुआ कर रहे थे, लेकिन वो अपने मन को लगभग आश्वस्त कर चुके थे कि उनका स्कूल से निकलना अब तय है। अपना त्यागपत्र भी उन्होंने लिख कर जेब में डाल रखा था। प्रिंसिपल ने उन्हें अपने कमरे में बुलाने के बजाय डायरेक्टर के कमरे में ही जाने का संदेश भेजा था। दिनेश सर खुद…

शिव

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। निर्गुण होकर भी जिसने गुणों का बखान किया है, तत्व का वह विशिष्ट ज्ञान शिव ही है। धतूरे और विष का जिसने पान किया है, सुध और बेसुध में वह सृष्टि का निर्माण शिव ही है।। अक्षर,शास्त्र,वेद और ब्रह्माण्ड का जिसने प्रतिपादन किया है, वर्तमान का वह साक्ष्य प्रमाण शिव ही है।। जीवन और प्रेम का जिसने गान किया है, अनंत काल तक चिरंजीवी वह भगवान शिव ही है।। मृत्युपर्यंत अनुभवों का जिसने चक्रज्ञान लिखा है, चिता में भस्म के व्याख्याता नारायण शिव…

औरत सहनशीलता की मूरत

अदनान सिलावट, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। औरत सहन शीलता की मूरत है। समाज के निर्माण मे महिलाओं का बड़ा योगदान है, मगर समाज इस बात को मानने से इंकार किये बैठा है। शायद इसका कारण भी महिलाओं की सहनशीलता है। समाज महिलाओं को लेकर बहुत सख्ती करता है। समाज में महिलाओं को लेकर कई नियम बनाये जाते हैं, मगर पुरुषों के लिये कोई सख्ती नही है। ये कहने में तो अच्छा नही लग रहा है, मगर ये हकीकत है कि जिस औरत (माँ) के कदमों के नीचे ईश्वर ने जन्नत…

समस्याओं की जननी

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कल तक जहां नजर आते थे खेत खलिहान। वहीं नज़र आते हैं आज केवल मकान।। हमारा देश जिन समस्याओं से जूझ रहा है, लगातार बढ़ रही जनसंख्या उसका मुख्य कारण है, परन्तु दुर्भाग्यवश हम छोटी-बड़ी हर समस्या के बारे में विचार करते हैं, समस्याओं की उत्पत्ति का कारण जानने की कोशिश नहीं करते हैं। सच तो यह है कि आजादी के बाद से ही हम जनसंख्या वृद्धि को रोकने में असफल रहे हैं। यह निरंतर बढ़ती ही जा रही है और इसमे सबसे बड़ी…

सादगी एक गहना है

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। दुनिया की चकाचौंध में खोकर हम एक आभूषण को पहनना भूलते जा रहे हैं। इसका नाम और महत्व दोनों हमें मालूम हैं, लेकिन यह वर्तमान समय में चलन में नहीं है। इस आभूषण का नाम है सादगी। प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को प्रभावी बनाने के लिए अपने आचार व्यवहार को पूरी तरह बदलने में लगा हुआ है। जीवन की दौड़ में आगे निकलने के लिए वह अपने प्राकृतिक स्वभाव को भी परिवर्तित कर लेता है। कुछ दूर जाने के बाद अहसास होता है कुछ…

धर्म से आहत हिंदुस्तान

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि चुनाव की सरगर्मी के साथ साथ धर्म के नाम पर सियासत तेज हो जाती है। सर्वधर्म समभाव का पालन करने वाले इस देश की आत्मा को हिंदू मुसलमान के नाम पर बांटने की कोशिशें रुकने का नाम नहीं लेती हैं। देश कोरोना से लड़ रहा है, कितने लोगों का रोजगार छिन गया है। लगातार बढ़ती महंगाई ने जीवन स्तर को नीचा कर दिया है। सामान्य नागरिक की परेशानियों का कोई अंत नहीं है, लेकिन ये नेताओं…

पापा की परी

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सपने तब तक अपने थे पापा जब तक घर में थे। खुशियों से रिश्तेदारी थी जब तक पापा की प्यारी थी। शहर, गांव और मोहल्ला लुटाते थे स्नेह, नहीं था गीला। सबसे बड़ा धन था, पापा की तनख्वाह छोटी छोटी खुशियों को मिलती थी पनाह। दूर होकर भी रहते थे पास पापा सभी दोस्तों को थे ख़ास पापा। फोन नहीं थे बस पाती थी पापा की सीख पहुंचाती थी। हिम्मत ही नहीं थी ना कहने की मजबूरी न थी कुछ भी सहने की। पापा…

गुलिस्ताँ

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मस’अला ये है कि दिल अब कहीं लगाये लगता नहीं है। ऐसे तो सब साथ ही हैं, पर उंगलियों पर एक भी नाम अब अखरता नहीं है।। छोटी गुफ्तगु में गुलशन होता था जो, वो दिल बहारों में भी अब खिलता नहीं है।। चेहरा, जिसकी रौनक जन्नत थी कभी, लाख वजहों से भी वो अब मुस्कुराता नहीं है। जो अपने थे, वो बिसर गये, पहले की तरह कोई रूह में बसर अब करता नहीं है।। कहने को बचे हैं सब अपने, पर सच…

किसका बेटा

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। आशीष अपने हाथ में खाने की थाली उठाए कच्चे कोठे की ओर बढ़ रहा था। मन में अजीब सी उथल पुथल चल रही थी। घर में मचे कोहराम ने मानसिक शांति भंग कर रखी थी। तीन दिन पहले उसके ताऊजी सुरेंद्र कुमार शहर से गांव में आए थे। वह भी छुट्टी लेकर आया हुआ था। उसके पिता नरेंद्र कुमार और उसके ताऊजी में किसी बात को लेकर मनमुटाव हुआ और बात बंटवारे तक पहुंच गई। ताऊजी अपना आधा हिस्सा मांग रहे थे। जमीन में,…

जीवन

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जीवन मे कुछ लोगों के होने से बेहतर है उनका ना होना। गुरुत्वाकर्षण की तरह, वो खींचते हैं तुम्हें नीचे की ओर। जितनी तुम्हारी क्षमता है, जितना आसान है तुम्हारे लिये मंजिल तक पहुँचना, वो उसे उतना ही मुश्किल बना देते हैं। बगावत करना आसान है, लेकिन मन को अपने निर्णय पर टिकाये रखना मुश्किल लगता है कभी-कभी। जीवन में जो सच देखते हुए भी हम अंजान बनते हैं, वही सच जब मुँहाने आकर खड़ा होता है समय की आंच से, तब मुश्किल…