कहां है

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अज़ल से तमन्ना हो जिसकी, वो मिलता फिर कहाँ है? दिल में तरबियत हो जिसकी, वो जहाँ में दिखता फिर कहाँ है? अश्कों से हो रुखसत जो, ख्वाबों में फिर वो रहता कहाँ है? जनाज़े कर दे जीते तन को जो, आम से खास फिर वो होता कहाँ है? जाम ए जख्म बेशुमार दिये हों जिसने, ज़हन में फिर वो पलता कहाँ है? तार ए दिल तर-ब-तर किये हों जिसने, मरहम लगाने से भी फिर वो संवरता कहाँ है? अज़ल से तमन्ना हो…

मलाल

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बात कई वर्ष पुरानी है, परन्तु आज भी याद आती है तो मन को कचोटती है। दीवाली से चार-पांच दिन पहले छोटी बहन का फोन आया था। दीदी! अम्मा आपको याद कर रही हैं, उनका आपसे मिलने का बहुत मन है। यदि अा सको तो भाई दूज पर घर अा जाना। उनकी तबियत भी कई दिन से ठीक नहीं है। मैंने घर पर फोन मिलाया, अम्मा से बात की। उनको समझाने की कोशिश की, कि इस बार मेरा जाना सम्भव नहीं हो पाएगा। सातवां…