ईश्वर! मेरी मम्मी का ख़याल रखना

डॉक्टर मिली भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मदर डे टू मम्मी इन हेवन… इन लविंग मेमोरी ओफ़ यू मम्मी… आज शब्द ही नहीं कुछ… आपको खोने का दर्द… काग़ज़ पर नहीं उकेर पाऊँगी आज… आप होतीं आज तो बात ही कुछ और होती… हर ख़ुशी में ख़ालीपन नही होता… हर दर्द से डर नहीं लगता… ईश्वर मेरी मम्मी का ख़याल रखना…..!! रावतभाटा, राजस्थान

“मां”

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। जब भी थकता हूं, तुम्हे ढूंढता हूं मां। जब भी हारता हूं, तुम्हे पुकारता हूं मां। तुम अब आती नहीं, तुम्हारी याद आती है। तुम अब बुलाती नहीं, तुम्हारी आवाज़ आती है। खोया था दुनियादारी में, पर तुम खास थी मां। न पहचान सका तुम्हारी कीमत, जब तुम पास थी मां। घूमता फिरता हूं, ढूंढ़ता फिरता हूं तुम कहीं दिख जाओ,मिल जाओ मां। हैरान होता हूं, परेशान होता हूं क्यूं रूठ गई हो? एक बार मान जाओ मां। कुछ तो मुझे बताओ मां एक…

पागल कौन

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। एक नगर में एक फकीर घूमा करता था। चीथड़ों में लिपटा उसका ढीलाढ़ाला और झुर्रियों से भरा बुढ़ापे का शरीर, कंधे पर पैबन्दों से भरा झोला लिये इधर उधर फिरता रहता। वह बार-बार थैले में से प्लास्टिक से बड़े जतन से लपेटी रंगीन कागज की गड्डियों को खोलता और दोबारा उसी तरह लपेटकर थैले में रख लेता। वह जहाँ से भी निकलता, रंगीन कागज़ देखकर उसे उठकर लेता और बड़ी सावधानी से उसे सीधा करके थैले से गड्डी निकाल कर उसमें उसे भी…

कहां है

रेखा घनश्याम गौड़, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। अज़ल से तमन्ना हो जिसकी, वो मिलता फिर कहाँ है? दिल में तरबियत हो जिसकी, वो जहाँ में दिखता फिर कहाँ है? अश्कों से हो रुखसत जो, ख्वाबों में फिर वो रहता कहाँ है? जनाज़े कर दे जीते तन को जो, आम से खास फिर वो होता कहाँ है? जाम ए जख्म बेशुमार दिये हों जिसने, ज़हन में फिर वो पलता कहाँ है? तार ए दिल तर-ब-तर किये हों जिसने, मरहम लगाने से भी फिर वो संवरता कहाँ है? अज़ल से तमन्ना हो…

मलाल

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। बात कई वर्ष पुरानी है, परन्तु आज भी याद आती है तो मन को कचोटती है। दीवाली से चार-पांच दिन पहले छोटी बहन का फोन आया था। दीदी! अम्मा आपको याद कर रही हैं, उनका आपसे मिलने का बहुत मन है। यदि अा सको तो भाई दूज पर घर अा जाना। उनकी तबियत भी कई दिन से ठीक नहीं है। मैंने घर पर फोन मिलाया, अम्मा से बात की। उनको समझाने की कोशिश की, कि इस बार मेरा जाना सम्भव नहीं हो पाएगा। सातवां…

साहित्य की साधना से शब्दों की जादूगर बनी अर्चना त्यागी

हवलेश कुमार पटेल, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। खेतीहर, लेकिन शैक्षिक पृष्टभूमि के परिवार में जन्मी अर्चना त्यागी द्वारा की जा रही साहित्य की सेवा शायद उनके खून में रची-बसी शैक्षिक अनुवांशिकता ही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद स्थित छोटे गांव महरायपुर में विद्यानंद विद्यार्थी व रामेश्वरी देवी की पुत्री रूप में जन्मी अर्चना त्यागी के दादा पृथ्वी सिंह व ताऊ जयनन्द त्यागी एडवोकेट छपार के जयभारत इंटर कालेज के लम्बे समय तक प्रबन्धक रहे हैं। अर्चना त्यागी के अनुसार पठन-पाठन, लेखन व रचनात्मक कार्यों में उनकी विशेष रूचि रहती…

हालात

अर्चना त्यागी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कराह रही है धरती नि शब्द आसमान है। प्रकृति के जुल्म से बेबस हर इंसान है। हर तरफ है चीख पुकार सिसकते लोगों की दरकार। जिसके दर पे होती थी फरियाद तालों में बंद वो भगवान है। चिंतन है जरूरी अब मनन भी ज़रूरी है। क्यों ऐसी हालत हुई ? किन कर्मों की सजा मिली है। छूटी हाथ से अब कमान है। रुकेगी कहां जाकर ये रोग की सुनामी। बस इलाज और दवा ढूंढ रहे सभी जा रही कितनी निर्दोष जान हैं। आओ मिलकर…

भगवान विष्णु के सप्तम अवतार हैं रघुकुल शिरोमणि श्रीराम

डॉ. राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। भगवान श्रीराम विष्णु के सातवें अवतार हैं। इन्हें श्रीरामचन्द्र भगवान के नाम से जाना जाता है। रामायण में वर्णित है कि इनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ जी के घर हुआ था। इनकी माता कौशल्या थी। श्रीराम के जन्म की कथा है कि  अयोध्या के सूर्यवंशी राजा चक्रवती सम्राट दशरथ ने पुत्र की कामना से एक यज्ञ कराया, जिसे कामेष्टि यज्ञ कहा जाता है। जिसके फलस्वरूप उनके पुत्रों का जन्म हुआ था। श्रीराम लक्ष्मण भरत शत्रुध्न चार भाई थे। हर वर्ष…

कोरोना का रोग

डॉ. राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कोरोना की मार से, बचे न कोई लोग। देखो बढ़ता जा रहा, कोरोना का रोग।। चेले मौज मना रहे, घर पर बैठे रोज। गुरुवर केवल कर रहे, मिलकर सारे खोज।। अपनी अपनी दे रहे, लोग मुफ्त में राय। कोरोना के नाम पर, जी भर पीते चाय।। लगा रहे कर्फ्यू सभी, जनसेवक मिल आज। रहें सुरक्षित लोग सब, कोरोना की गाज।। मित्र बनाकर के कहीं, करना दे वो घात। धोखे में रहना नहीं, समझ लीजिए बात।। मित्र सदा ही दे यहाँ, खुशियों का…

28वीं लेखन स्पर्धा में मायावी फागुन व जीवन में रंगों संग फगुनाई पहले स्थान पर

शि.वा.ब्यूरो, इंदौर (मप्र)। मातृभाषा हिन्दी और अच्छे सृजन को सम्मान देने के लिए हिंदीभाषा डॉट कॉम परिवार द्वारा मासिक स्पर्धा का आयोजन निरन्तर जारी है। इसी कड़ी में ‘फागुन संग-जीवन रंग’ विषय पर आयोजित स्पर्धा में पद्य वर्ग में गोपाल चन्द्र मुखर्जी ने और बोधन राम निषादराज ने जीत का रंग हासिल किया है। ऐसे ही गद्य वर्ग में डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ पहले तथा डॉ. पूनम अरोरा कड़े मुकाबले में दूजे स्थान पर आए हैं। सतत 28वीं स्पर्धा के परिणाम जारी करते हुए मंच-परिवार की सह-सम्पादक अर्चना जैन और…