एसकेएस में बनेगा ऑक्सीजन युक्त 100 बेड का अस्पताल

रजत शर्मा, मथुरा। एसकेएस आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए 100 बेड तैयार कारवाए जा रहे हैं। यहाँ ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध होगी, इससे मरीजों को राहत मिलेगी। पिछले दिनों डीएम ने आईएमए के साथ बैठक में कोरोना वायरस के उपचार को लेकर विचार विमर्श किया था। इसके बाद आईएमए के उपलक्ष एवं सिटी हॉस्पिटल के संचालक डॉ गौरव भारद्वाज एवं भाजपा नेता एसके शर्मा ने डीएम को 100 बेड का हॉस्पिटल तैयार करने को लेकर प्रार्थना पत्र दिया, इसके बाद सीएमओ डॉ रचना गुप्ता से भी मुलाकात…

लेखक के गांव की पाती

शि.वा.ब्यूरो, आगरा। जनपद के गांव रिहावली में पुनः जनजीवन सामान्य होने लगा है। बीती पन्द्रह अप्रैल को यहां चुनाव के दौरान भीषण दंगा हुआ था। दंगों के दौरान ही असामाजिक तत्वों ने प्राथमिक विद्यालय के कमरे की दीवार-जंगला तोड़ कर मतपेटिकायें लूट लीं थीं ।और मतपेटिकायें उसी रात पुलिस ने बरामद कर ली थीं, उसके बाद पुलिस ने गांव के ही करीब पैंतीस स्त्री-पुरुषों को गिरफ्तार करके जेल में ठूंस दिया था। औरतों के साथ दूध पीते मासूम बच्चे भी सलाखों के पीछे चले गये थे। पन्द्रह तारीख के बाद…

कलम

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सच को सच अब लिख नहीं पाती कलम सिस्टम के आगे आखिर कब तक गिड़गिड़ायेगी कलम तलवार की धार सा जो लिखे कलम तो टूटकर भी अमर हो जाएगी कलम दुनिया की किसी भी कीमत पर न बिचे कलम तो सदियों तक सूरज सी तपती रहेगी कलम सच को सच जब-जब लिखेगी कलम ढेरों मुकदमों से डराई जाएगी कलम एटम बम से भी हजार गुना ताकतवर है कलम अगर मौत की छाती पर क्रांति लिखती रहे कलम बडा गौरवमयी है इतिहास तेरा…

कोरोना की द्वितीय लहर: जरूरतें कम करें, धैर्य के साथ अपना व अपनों का ख्याल रखें

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। कोरोना की द्वितीय लहर ने ऐसा कहर बरपाया है कि चारों ओर त्राहिमाम-त्राहिमाम मची है। कोरोना की प्रथम लहर से भारत जीता था और इस बार भी महामारी से हम निश्चित ही फिर से जीतेंगे। प्रथम बार भारत में कोरोना ने इतना कहर नहीं ढाया था, जितना पुलिसिया अत्याचार व राजनेताओं की अदूरदर्शिता ने ढाया था। हमारे यहां के नीति निर्माताओं ने पिछले वर्ष की त्रासदी से कोई सबक नहीं सीखा। अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए तमाम मदारी वाली हरकतें करते…

जिम्मेदारी

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। लोग मर रहे हैं सांस-सांस के लिए तड़प रहे हैं चहुंओर भयावह मंजर है । जरा एक नजर तो घुमाओ हॉस्पिटल की ओर आत्मा चीत्कार करने लगेगी । अपनों की परवाह में तिल-तिल मरते अपने… क्या गरीब, क्या अमीर ? सबको करोना महामारी मौत के मुंह में धकेलती जा रही है । जिम्मेदार लोग जिम्मेदारी भूल मस्त हैं अपने बड़े-बड़े महलों में, नेता हो, अभिनेता हो, खिलाड़ी हो, धर्मगुरु हो, पूंजीपति हो, सबके सब मौन हैं। उन्हें समाज, देश से कोई लेना-देना…

मेरे गांव में

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। रोज सूरज उगता था एक जैसा… परन्तु आज अलग उगा है जिसमें कोई आकर्षण नहीं नजर आ रहा है फीका-फीका सा जो कल तक चलती थी शीतल मंद-मंद हवा मेरे गांव में, वो आज हो गई है बेहद जहरीली । कल हुए दंगों ने मेरे गांव में फैला दी है शमशानों सी काट खाने वाली शैतानी खामोशी सब कुछ थमा-थमा सा लग रहा है । देर रात तक सरकारी बूटों की आवाजों ने भोले भाले मेरे गांव के लोगों के हृदय की…

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। चारों ओर छुआछूत की बीमारी भारत में फैली थी, इंसानों ने इंसानों को अस्पृश्य मानकर भारत को नर्क बना दिया था। आदमी, आदमी का शोषण कर रहा था। कदम-कदम पर असमानता के पैने कांटे बिखरे पड़े थे। उसी कालखंड में 14 अप्रैल 1891 ई. को मऊ मध्य प्रदेश में एक प्रतिभावान बालक का जन्म हुआ, जिसे आगे चलकर दुनिया ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम से जाना और पहचाना। बताते हैं कि विद्यालय के समय से ही भीमराव को भी असमानता नामक…

गौरैया

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। घर-ऑंगन में जो फुदका करती थी, दाना चुंगकर ठंडा पानी पीती थी । कहॉं गई वो प्यारी नन्हीं सी गौरैया ? चीं-चीं, चूं-चूं हरदम करती थी, बरसात में पंख फैलाकर नाचा करती थी । कहॉं गई वो प्यारी नन्हीं सी गौरैया ? तिनका-तिनका इकट्ठा करती थी, सुंदर सा नीड़ निर्माण करती थी । कहॉं गई वो प्यारी नन्हीं सी गौरैया ? हरे-भरे पेड़ों पर आजाद फुदकती थी, कितनी चंचल ? पास आकर दूर चली जाती थी । कहॉं गई वो प्यारी नन्हीं…

होली आई

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। ब्रज में रंगों की हो रही बरसात गोप- गोपिका मिल खेल रहे होली साथ फाग मतवारौ मधुबन में मस्ती लायो रे बुड्ढों का बदला मिजाज फाग में फाग उत्सव ऐसा, धुआं उठ रहा बुझती आग में छाई मस्त बहार दिल हुए जवां रे बसंती रंगों के संग उड़े गुलाल गोरी के लाल-पीले हो रहे गाल खिले फूल पलास चमक उठे चेहरे रे प्यार-मोहब्बत संग मिल त्यौहार मनाओ गिले-शिकवे, मन के मैल सब मिटाओ पवन चली मस्त होली आई-आई रे त्याग-तपस्या का पैगाम…

जीवन बीमा (लघुकथा)

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। सामने पति की लाश पड़ी थी और पूनम चुपचाप गुमसुम सी निहारे जा रही थी। उसके आंसू न जाने कौन पी गया था। अभी उसके हाथों पर लगी मेहंदी का रंग भी फीका न पड़ा था कि एक भयानक रोड एक्सीडेंट में रमन को पूनम से हमेशा- हमेशा के लिए जुदा कर दिया। कुछ दिन बाद विधवा पूनम को उसके ससुराल वाले तरह-तरह के ताने मारने लगे। उपेक्षाओं की शिकार पूनम हृदय पर पत्थर रखकर सब  सहने लगी। एक दिन पूनम के…