मेरा देश

हीरेण भट्टाचार्य ‘हीरूदा’, अनुवादक वाणी बरठाकुर ‘विभा’, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। मेरा देश प्राणों के प्राण मेरे गीतों के गान मेरा देश मेरा हर काम , हर सोच में इसी देश की हृदय में रचते शस्य- सुनहरे भविष्य के सपने । मेरे जीवन के रेशों रेशों में मेरी यौवन की तरंगों में उन सपनों की लहर देश देश देश में है । ऐसे ही कई देशों में मैं इधर-उधर घूम रहा हूँ कई मित्रों संग हाथों से हाथ मिला रहा हूँ कभी सागर तट पर कभी खजूर के नीचे नहीं…