अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में सभी ने एक स्वर में स्वीकारा: हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए एकजुट आंदोलन की आवश्यकता

पूनम चतुर्वेदी शुक्ला, ऑस्ट्रेलिया। भारत के सभी हिंदी सवियों, हिंदी सेवी संस्थाओं विश्वविद्यालयों को एकजुट होकर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए आंदोलन करने की आवश्यकता है। यह बात डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो आशा शुक्ला ने रविवार 4 अप्रैल को मॉरीशस स्थित विश्व हिंदी सचिवालय महू इंदौर स्थित  डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में “हिंदी की प्रयोजनमूलकता : विविध आयाम” विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी में कही। प्रो. आशा शुक्ला…

हिंदी की प्रयोजनमूलकता : विविध आयाम विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी 04 अप्रैल को

डॉ. शैलेश शुक्ला, कर्नाटक।  विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस, डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महु (मध्य प्रदेश) न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाउंडेशन एवं सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी की प्रयोजनमूलकता : विविध आयाम विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी 04 अप्रैल को सुबह 11 बजे (भारत), सुबह 9:30 बजे (मॉरीशस) डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महु (मध्य प्रदेश) की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी। विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र के सान्निध्य में आयोजित वेब संगोष्ठी…

शिवपुराण से……. (282) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

नारदजी के प्रश्न और ब्रह्माजी के द्वारा उनका उत्तर, सदाशिव से त्रिदेवों की उत्पत्ति तथा ब्रह्माजी से देवता आदि की सृष्टि के पश्चात एक नारी और एक पुरूष का प्राकट्य………………. गतांक से आगे……….. इस चराचर त्रिभुवन में ये देवता आदि कोई भी तुम्हारा तिरस्कार करने में समर्थ नहीं होंगे। तुम छिपे रूप से प्राणियों के हृदय में प्रवेश करके सदा स्वयं उनके सुख का हेतु बनकर सृष्टि का सनातन कार्य चालू रखो। समस्त प्राणियों का जो मन है, वह तुम्हारे पुष्पमय बाण का सदा अनायास ही अद्भुद् लक्ष्य बन जायेगा…

भारत के इतिहास, संस्कृति तथा धार्मिक रीति रिवाजों से है पान का गहरा सम्बंध

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। पान का भारत के इतिहास, संस्कृति तथा धार्मिक रीति रिवाजों से गहरा सम्बंध है। आरम्भ में पान का केवल औषधीय एवं धार्मिक महत्व था। धीरे-धीरे जन सामान्य ने इसे मुख रंजक और मुख्य शोधक के रूप में अपना लिया। शिवपुराण में अनेक स्थलों पर ताम्बुल और पुंगीफल का इसी रूप में उल्लेख हुआ है। आदर-सत्कार के प्रतीक के रूप में पान का उल्लेख पुराणों में भी है। वात्सायन के कामसूत्र व रघुवंश आदि ग्रंथों ने ताम्बुल शब्द का प्रयोग है। कथा सरित्सागर तथा बृहत्कथा श्लोक में उल्लेख है…

भगवान शिव के 108 नाम

शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। १- ॐ भोलेनाथ नमः २-ॐ कैलाश पति नमः ३-ॐ भूतनाथ नमः ४-ॐ नंदराज नमः ५-ॐ नन्दी की सवारी नमः ६-ॐ ज्योतिलिंग नमः ७-ॐ महाकाल नमः ८-ॐ रुद्रनाथ नमः ९-ॐ भीमशंकर नमः १०-ॐ नटराज नमः ११-ॐ प्रलेयन्कार नमः १२-ॐ चंद्रमोली नमः १३-ॐ डमरूधारी नमः १४-ॐ चंद्रधारी नमः १५-ॐ मलिकार्जुन नमः १६-ॐ भीमेश्वर नमः १७-ॐ विषधारी नमः १८-ॐ बम भोले नमः १९-ॐ ओंकार स्वामी नमः २०-ॐ ओंकारेश्वर नमः २१-ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः २२-ॐ विश्वनाथ नमः २३-ॐ अनादिदेव नमः २४-ॐ उमापति नमः २५-ॐ गोरापति नमः २६-ॐ गणपिता नमः २७-ॐ…

शिवपुराण से……. (282) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

नारदजी के प्रश्न और ब्रह्माजी के द्वारा उनका उत्तर, सदाशिव से त्रिदेवों की उत्पत्ति तथा ब्रह्माजी से देवता आदि की सृष्टि के पश्चात एक नारी और एक पुरूष का प्राकट्य………………. गतांक से आगे……….. वह मूर्तिमती सायं-संध्या ही थी और निरन्तर किसी मंत्र का जाप करती रहती थी। सुन्दर भौंहों वाली वह नारी सौन्दर्य की चरम सीमा को पहुंची थी और मुनियों के भी मन को मोह लेती थी। इसी तरह मेरे मन से एक मनोहर पुरूष भी प्रकट हुआ, जो अन्यन्त अद्भुत था। उसके शरीर का मध्यभाग (कटि प्रदेश) पतला…

शिवपुराण से……. (281) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता, द्वितीय (सती) खण्ड

नारदजी के प्रश्न और ब्रह्माजी के द्वारा उनका उत्तर, सदाशिव से त्रिदेवों की उत्पत्ति तथा ब्रह्माजी से देवता आदि की सृष्टि के पश्चात एक नारी और एक पुरूष का प्राकट्य………………. गतांक से आगे……….. फिर वे ही प्रभु सगुण और शक्तिमान होकर विशिष्ट रूप धारण करके स्थित हुए। उनके साथ भगवती उमा विराजमान थीं। विप्रवर! वे भगवान शिव दिव्य आकृति से सुशोभित हो रहे थे। उनके मन में कोई विकार नहीं था। वे अपने परात्पर रूप में प्रतिष्ठित थे। मुनिश्रेष्ठ! उनके बायें अंग से भगवान् विष्णु, दायें अंग से मैं ब्रह्मा…

शिवपुराण से……. (279) गतांक से आगे…….रूद्र संहिता (प्रथम सृष्टिखण्ड़)

भगवान् शिव का कैलास पर्वत पर गमन तथा सृष्टिखण्ड़ का उपसंहार गतांक से आगे……….. मुने! तदन्तर श्रीविष्णु के साथ मैं तथा अन्य सब देवता और मुनि मनोवांछित वस्तु पाकर आनन्दित हो भगवान् शिव की आज्ञा से अपने-अपने धाम को चले गये। कुबेर भी शिव की आज्ञा से प्रसन्नतापूर्वक अपने स्थान को गये। फिर वे भगवान् शम्भू, जो सर्वथा स्वतंत्र हैं, योगपरायण और ध्यानतत्पर हो पर्वत प्रवर कैलास पर रहने लगे। कुछ काल बिना पत्नी के ही बिताकर परमेश्वर शिव ने दक्ष कन्या सती को पत्नी रूप में प्राप्त किया। देवर्षे!…

एकता तथा शांति की पौधशाला हैं विद्यालय

डाॅ. जगदीश गाँधी, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र। विद्यालय शांति की पौधशालाएँ हैं। इन्हीं पौधशालाओं में बच्चों के मस्तिष्क में बचपन से ही शांति रूपी बीज को बोने के साथ ही एकता रूपी खाद और मानवता रूपी पानी से सींचकर उन्हें विश्व नागरिक के रूप में तैयार किया जाता है। हमारा मानना है कि युद्ध के विचार सबसे पहले मनुष्य के मस्तिष्क में पैदा होते हैं, इसलिए मनुष्य को शान्ति की सीख देने के लिए हमें मनुष्य के मस्तिष्क में ही शान्ति के विचार रोपित करने होंगे, जिसके लिए सबसे श्रेष्ठ…

सौहार्द दिवस के रूप में मनेगा डॉ. सौरभ पाण्डेय का जन्मदिन

डॉ. शम्भू पंवार, नई दिल्ली। विश्व मे सर्वधर्म सम्भाव और समरसता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका‌ निभा रहे धराधाम इण्टरनेशनल के प्रमुख सौहार्द शिरोमणि डॉ. सौरभ पाण्डेय का जन्मदिन 31 मार्च को सौहार्द दिवस के रूप में मनाया जायेगा। यह निर्णय धराधाम इंटरनेशनल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में लिया गया। ऑनलाइन बैठक में दो दर्जन से अधिक देशों के धराधाम प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग लिया। बैठक में थाईलैंड से प्रेम प्रकाश पाण्डेय, मुंबई से त्रियोगी नारायण पाण्डेय, यूनाइटेड किंगडम से डॉ. सतनाम देवचार, केन्या से ग्लैडिज,  डॉ. एहसान अहमद, डॉ.…