स्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भावस्था की समुचित देखभाल से सुरक्षित प्रसव तक का है पूरा इंतजाम, योजना का लाभ उठाएं, जच्चा-बच्चा को स्वस्थ बनाएं


शि.वा.ब्यूरो, थानाभवन (शामली)। सुरक्षित प्रसव और जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग हरसंभव प्रयास में जुटा है। सरकार भी ऐसी योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुटी है ताकि गर्भवती को किसी भी तरह की मुश्किल का सामना न करने पड़े, क्योंकि हर गर्भवती का एक ही सपना होता है कि एक स्वस्थ और तंदुरुस्त बच्चा उसकी बांहों में हो । गर्भवती का यह सपना तभी साकार हो सकता है जब वह स्वास्थ्य विभाग की इन योजनाओं का लाभ उठाने को आगे आये और क्षेत्रीय आशा, एएनएम और चिकित्सक की सलाह को पूरी तरह से गाँठ बाँध ले।
प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य  (आरसीएच) के नोडल अधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि गर्भवती को सबसे पहले अपना पंजीकरण स्वास्थ्य केंद्र पर कराना चाहिए।  चार प्रसव पूर्व जांचें करानी चाहिए ताकि यदि कोई जटिलता है तो समय से उसका प्रबंधन हो सके । उच्च खतरे वाली गर्भावस्था का पता लगते ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता मातृ शिशु सुरक्षा कार्ड (एमसीपी) पर लाल बिंदी लगा देते हैं, जिसे देखकर चिकित्सालय में प्राथमिकता के आधार पर इलाज मुहैया कराया जाता है । हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी अस्पतालों में गर्भवती के लिए स्वास्थ्य जांच की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। साथ ही गर्भवती के लिए स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ आर्थिक सहायता की योजना भी सरकार ने चलाई हुई है। इनमें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से आर्थिक सहायता मिलती है। इसके अलावा हर महीने की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की विशेष सुविधा सरकारी स्तर पर उपलब्ध है।
नोडल अधिकारी बताते हैं कि इन सभी सुविधाओं को आम आदमी तक निःशुल्क पहुँचाने के लिए सरकार द्वारा जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और एम्बुलेंस  102 योजनायें चलायी जा रही हैं, जिसके तहत गर्भ धारण करते ही शीघ्र पंजीकरण, चार प्रसव पूर्व जांचें, उच्च खतरे वाली गर्भावस्था की पहचान और प्रबंधन तथा अस्पताल ले जाने सहित यह सभी सुविधायें निःशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही दवाईयाँ, बाकी आवश्यक सामग्री और आवश्यकता पड़ने पर रक्त भी निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के लिए 1400 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है ।
डॉ. सुशील कुमार के अनुसार यह सभी योजनायें आम जनता की भलाई के लिए ही हैं। यदि  इन योजनाओं का फायदा लेंगे और इनके महत्व को समझते हुए चिकित्सकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सलाह को मानें तो किसी भी अनहोनी से बच सकते हैं क्योंकि गर्भावस्था जोखिम भरी होती है। उन्होंने बताया कि जहाँ तक संभव हो प्रसव अपने सबसे पास के स्वास्थ्य केंद्र पर ही कराना चाहिए, जिसका निर्णय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ मिलकर पहले से ही कर लेना चाहिए। प्रसव होने के बाद तब तक महिला को अस्पताल से वापस घर नहीं जाना चाहिए जब तक चिकित्सक उन्हें घर वापस जाने को न कहें।
डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में पीएचसी व ब्लाक पर सीएचसी हैं। सामान्य प्रसव तो इन केन्द्रों पर हो जाते हैं, लेकिन यदि प्रसव में कोई जटिलता है तो यहाँ से महिला को जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है, इसके लिए एम्बुलेंस 102 की सुविधा उपलब्ध है। गर्भवती को एम्बुलेंस 102 के द्वारा ही उच्च स्वास्थ्य केंद्र जैसे मेडिकल कॉलेज जाना चाहिए, क्योंकि समय व्यर्थ नहीं होता है और चिकित्सक प्राथमिकता के आधार पर मरीज का इलाज करते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र थाना भवन के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. रवि शनिवाल ने बताया कि प्रसव पूर्व गर्भवती की जांच होना बहुत जरूरी है, ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके। उन्होंने बताया कि प्रसव से पूर्व हीमोग्लोबिन, शुगर, यूरिन जांच, ब्लड ग्रुप, एचआईवी, सिफलिस, वजन, ब्लड प्रेशर आदि की जांच की जाती है। इन्हीं जांचों से हाई रिस्क प्रेगनेंसी का भी पता चल जाता है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला को टीटी इंजेक्शन एवं आयरन की गोलियां दी जाती हैं, ताकि उनमें खून की कमी को पूरी किया जा सके। सभी गर्भवती के गर्भ की द्वितीय व तृतीय मास की जांच कम से कम एक बार स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में जरूरी है। उन्होंने बताया हर महीने की नौ तारीख को जिले में जिला अस्पताल के साथ-साथ सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि पहले ही जांच और चिकित्सा कर मातृत्व अस्वस्थता और शिशु-मातृ मृत्यु के मामलों में कमी लायी जा सकती है।

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