हरदौल लला चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

श्रावण शुक्ला पूर्णिमा, सोलह पैसठ जान।
भारतगढ़ दतिया जिला, हरदोला का आन।।
भारत भूमी जग से न्यारी।
वीरों की यह पालन हारी।।1
गढ़ टीकम में राज ओरछा।
जहां सिपाही लड़े मोरचा।।2
जीवन सुखिया रामहि राजा।
सबके मनके होते काजा।।3
 राजा वीरासिंह  बुन्देला ।
वीर साहसी शेर अकेला।।4
जिनके आठ पूत बलधारी।
बड़े जुझारा  राज अगाड़ी।।5
छोटे पूत लाल हरदौला।
न्यायी दानी भगत निराला।।6
बेटी कुंजा करुणा क्यारी।
हरदौला की बहिना प्यारी।7
जय हरदौला लाला प्यारे।
बहिन भानजा तुम्हें पुकारे ।।8
सत्य धरम औ न्यायी धीरा।
मां बहिनों के रक्षक  वीरा।।9
माह जुलाई सत्ताईसा।
जन्में लाला भरके चीखा।।10
मां कुंवरि के कोख से आये।
हंसते लाला सबको भाये।।11
धन्य गुमानी देवी माता।
बेटा तेरा जग का भ्राता।।12
बालपने मां स्वर्ग सिधारी।
भाभी चम्पा पालन हारी।।13
मां सा आंचल दूध पिलाया।
बड़े प्रेम से गोद खिलाया।।14
कंदुक खेले करे शिकारा।
सीख कृपाणा घोड़सवारा।।15
थोड़े दिन में भये जवाना।
लइ तलवारें तीर कमाना।।16
राज आगरा जुझार देखें।
नगर ओरछा लाला लेखें।।17
देख अकेला बैरी घेरा।
लाला मारे करते ढेरा।।18
खान महावत थरथर कांपे।
हरदोला का भय जो व्यापे।।19
आया समय बड़ा दुखदाई।
चुगलखोर ने चुगली खाई।20
चंपा संगे दोष लगाई।।
जुझारसिंह को शंका छाई।।21
सुनत वीर हरदौला आये।
मां चंपा विष पान कराये।।22
रामलला के दर्शन कीने।
वहीं पे अपने प्राणन दीने।।23
खबर फैलती ज्वाला जैसी।
छाया दुखड़ा मातम वैसी।।24
पहला पहर बड़ा दुखदाई।
लाला ने जब जान गंवाई।।25
हा हा कार मचा था भारी।
रोती  बहनें  प्रजा दुखारी।।26
दतिया में संस्कार कराया ।
लला नाम से ताल बनाया।।27
क्वार शुक्ला दसमी खासी।
संवत् सोलह सौ अटठासी ।।28
कुंजा बेटी ब्याह रचाई।
नौत भात ले ओरछ आई।।29
जुझारसिंह ने डांट भगाई।
रोवत रोवत मसान आई।।30
सुनके रूह लला बतराये ।
मेटी चिन्ता चीखट लाये।।31
आया शुभ दिन मंगलकारी।
लगन बेटी की भई तैयारी।।32
ठीक समय पर मामा आये।
मामेरा  आभूषण लाये।। 33
 दौड़ी दौड़ी सखियां आई।
हल्दी की सब रीति कराई।।34
मंडप नीचे दूल्हा आया।
बाल सखा को संग लिवाया।।35
रस गुल्ला सी बनी रसोई।
साग रायता पुरियां पोई।।36
देख अचंभा दूल्हा बोले।
अपना रूप तुरतही खोलें।।37
मामा दर्शन देव अगारी।
मै मरता हूॅं मार कटारी।।38
जब लाला ने देह दिखाई।
नर नारी सब दर्शन पाई।।39
पान बतासा भोग लगावे।
फिर लाला को नौत बुलाये।।40
तेइस साल पूरण करि, लाल गये सुर धाम।
शुभ काम सब पूरे करो, कहत हैं कवि मसान।।
अरज करती भानजियां, मामा आओ द्वार।
हम बहिनों का ब्याह है, कीजो बेड़ा पार।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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