क्षितिज चालीसा

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

हिन्दी पुस्तक क्षितिज का अध्ययन कीजे रोज।
आठ गद्य नौ पद्य हैं, नवमी का है भोज।।
समग्र शिक्षा हिन्दी आई।
पाठ्य क्षितिज की करो पढ़ाई।।1
दो बैलों की कथा सुनाई।
प्रेमचंद की रचना भाई ।।2
हीरा मोती सुंदर बैला।
करते है श्रम रखते मेला।।3
ल्हासा ओर यात्रा वरणा।
राहुल लेखा सुंदर करमा।।4
दुर्गम मारग तिब्बत देशा।
लेखक गये भिखारी वेशा।।5
उपभोगी संस्कृति रच श्यामा ।
पिसती जनता बढ़ते दामा।।6
विज्ञापन में झूठ बड़ाई।
गुणवत्ता भी बहुत गिराई।।7
सांवल सपनों याद सताई
जबिर संस्मरण है भाई।8
सालिमअलि पक्षी विज्ञानी।
सादा जीवन ऊंचे ज्ञानी।।9
चपला देवी रच रिपुताजा।
करुणामय बलिदानी गाथा।।10
नाना साहब पुत्री देवी।
मैना को भस्मी कर दीनी।।11
प्रेमचंद के फाटे जूते।
व्यंग्य विधा हरिशंकर लेखे।।12
मेरे बचपन के दिन भाये।
महदेवी ने अनुभव गाये।।13
बाल सखी थी सुभद कुमारी।
जिनसे सीखी कविता प्यारी।।14
रजत कटोरा पदक कमाया।
 देश प्रेम गांधी मन भाया ।।15
एक कुत्ता अरु इक मैना।
लिखे  हजारी सांचे  बैना।।16
गुरूदेव के दर्शन पाई।
जीव प्रेम की शिक्षा आई।।17
आठों पाठ गद्य के भाई।
पढ़ते लिखते मन हरषाई।।18
वाक्य भेद भी तुम पहिचानो।
मुहावरों का अर्थ  बखानो।।19
प्रत्यय उपसर और विलोमा।
तत्सम तद्भव शब्द खिलौना।।20
साखी एवं सबद सुहाई।
रचना कबिरा सरल बनाई।।21
निरगुण पंथ ज्ञान की धारा।
बीजक ग्रंथ कबीर उचारा।।22
ललदद लला कश्मीर विदुषी।
पाखंड तोड़े प्रेम  पियूषी।23
वाख चार हिन्दी अनुवादा।
आतम ज्ञानी जीवन सादा।।24
चार सवैया लिख रसखाना।
बालकृष्ण के चरित बखाना।।25
गोकुल ग्रामा महिमा गाई।
प्रेम वाटिका रास रचाई।।26
कैदी और कोकिला भाई।
माखनलाला कविता गाई।।27
कवि जेल में दुखी एकाकी।
कोयल स्वर भी भये उदासी।।28
ग्राम श्री प्रकृति रखवारे।
बोल सुमित्रा नंदन प्यारे।।29
खेतो फैली सुंदर हरियाली।
हंसती फसलें झूलें डाली।।30
गंगा की सतरंगी रेती।
देखी कवि तरबूजा खेती।31
चंद्र गहना लौटती बैरा।
केदरनाथा  कुशल चितेरा।।32
कृषक खेत में फसल उगाते।
मेहनत करके साख कमाते।।33
सर्वेश्वर के मेघा आये।
वर्षा पा के मन हरषाये।34
देखो बच्चों बादल छाये।
जैसे घर में जमाई  आये।।35
यमराजा की दिशा बखानी।
चन्दकांत देवतले वानी।।36
मां से सुनि यमराज कहानी।
संस्कृति पतन चहुं दिशि आनी।।37
बच्चे कामो पर है जाते।
राजश जोशी कविता गाते।।38
बाल श्रमिक की व्यथा बताई।
कवि की चिंता जायज भाई।।39
मसान कवि नवचार बनाई।।
काव्यखंड नौ कविता गाई।40
यह चालीसा जो पढ़े और गुने मन लाय।
नवमी हिन्दी विषय में अच्छे नम्बर पाय।।

23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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