ज्ञान का उजाला

कुँवर आरपी सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

गुरू नानक देव जी ने जीवनभर लोगों को धर्म से प्रकाशित और ज्ञान का रास्ता दिखाया। गुरु जी ने अन्धश्रृद्धा में बंधे और भटके हुए लोगों को भी बन्धनममुक्त कर ज्ञान का नया उजाला दिखाया। एक दिन एक डाकू गुरू जी के पास आया और चरणों में माथा टेकते हुए बोला-मैं डाकू हूँ, अपने जीवन से तंग हूँ। मैं सुधरना चाहता हूँ, मेरा मार्गदर्शन कीजिये और मुझे अंधकार से उजाले की ओर ले चलिये। गुरू नानक देव जी ने कहा-बहुत सही निर्णय है। तुम आज से ही चोरी करना और झूठ बोलना छोड़ दो, सब सही हो जायेगा। डाकू उन्हें प्रणाम करके चला गया और कुछ दिनों बाद वह फिर आया और कहने लगा कि मैंने चोरी करने और झूठ बोलने से बचने का बहुत प्रयास किया, लेकिन भरसक कोशिश करने के बाद भी ऐसा कर न सका।
गुरू जी! कृपया आप कोई ऐसा उपाय बतायें कि मैं पाप मुक्त हो जाऊँ। गुरू नानक देव जी सोंचने लगे कि इस डाकू को सुधरने का क्या उपाय बताया जाय। अंत में उन्होंने उस डाकू से कहा कि जो तुम्हारे मन में आये वो करो, लेकिन दिन भर चोरी, डाका, झूठ बोलने के बाद शाम को लोगों के सामने अपने सारे कामों को बता देना। डाकू को यह उपाय आसान लगा। वह चला गया। इस बार डाकू पलटकर गुरू जी के पास नहीं आया, क्योंकि सारा दिन वह चोरी-चकारी करता और शाम को जिसके यहां चोरी की उसे और लोगों को सब कुछ बताने की बहुत कोशिश करता, लेकिन वह आत्मग्लानि और जगहंसाई के कारण ऐसा कर पाता। बहुत हिम्मत और कोशिश के बावजूद वह असफल रहा। अंत में मुँह लटकाये वह डाकू एक दिन वह गुरू जी के पास आया और हताशा से बोला-गुरू जी! उस उपाय को मैंने बहुत सरल समझा था, लेकिन वह तो बहुत कठिन निकला। अपने बुरे कर्मों को लोगो़ को बताने में बहुत लज्जा आती है, इसलिये मैंने बुरे काम करना ही छोड़ दिया है। गुरू नानक देव जी ने उसके सुधरने और उसको पाप मुक्ति का दुआ दी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जय शिवा पटेल संघ

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