किसान आन्दोलन और कथित किसान नेता की जमीनी हकीकत

मोहन लाल वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

किसान आन्दोलन 100 दिन पार कर चुका है। वार्ता की संभवना भी धुंधली होती जा रही है। गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड की शर्मनाक घटना के बावजूद राकेश टिकैत संसद के सामने 40 लाख ट्रैक्टर परेड के माध्यम विरोध प्रदर्शन की रणनीति बना रहे हैं। अब जटिल क्रोनोलाजी समझिये टिकैत के आंसू से आन्दोलन को संजीवनी तो मिली, लेकिन लाल किले किले में तोड़ फोड़ की घटना में नामजद होने पर सरकार को गिरफ्तार करने की धमकी देने के बावजूद सरकार अभी क्यों उन्हें ढील दे रही है? किसान आन्दोलन फुस्स हो चुका है, जो चन्दा अब आ रहा है, उसमें आन्दोलन चलाना कठिन होता जा रहा है। भाड़े के किसानों को दे कहां से ? ऊपर से सरकार ने MSP भुगतान का नया नियम ला कर एक तीर से तीन शिकार कर लिये हैं।

अकेले पंजाब में आढतियों की जेब में जाता था 1600 करोड़ रुपया

सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि कानून किसी कीमत पर वापिस नहीं होंगे। भारतीय खाद्य निगम ने पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में किसानों के दस्तावेज मांगे हैं कि यह पुष्टि करने के लिये कि बेचने वाला किसान ही है और उसके पास जमीन है तथा फसली के अनुसार उसकी गेहूं या चावल की कितनी उपज हो सकती है ताकी MSP की खरीद वास्तविक किसानों के खाते में सीधी जाये। बिचौलियों और आढतियों को अकेले पंजाब में 1600 करोड़ रुपया 2.5% के हिसाब से जाता था, अब वह सरकार की शुद्ध बचत है । यह किसानों के खाते में सीधा भेज कर और 6% जो यह बिचौलिये किसान से काटते थे और पैसा किसान के खाते में न आ कर इन के खाते में आता था। उसके बाद यह किसान को अपनी मर्जी से देते थे सब खत्म। किसान को पैसा सीधा खाते में और 6% अधिक।

यानी  पंजाब में 40% कोन्ट्रेक्ट फार्मिंग होती है

अब तलवारें किसानों और उनको बहका कर भड़काने वाले आढतियों के बीच खिंचेंगी, क्योंकि आढती एसोशियेसन केन्द्र सरकार के इस आदेश के खिलाफ कि पैसा सीधा किसान को न दिया जाये पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट गयी है। आढती एसोशियेसन हाईकोर्ट को बताया है कि आदेश वर्षों से चली आ रही परम्परा के अनुरूप नहीं है। यानि कांग्रेस द्वारा स्थापित परम्परा के अनुसार पैसा आढ़ती के खाते में आये और वह मर्जी से किसान को दे, क्योंकि पंजाब में 40% किसान स्वयं खेती नहीं करता। वह विदेश में रहता है तो भुगतान उसके खाते में जायेगा न कि उसके जो उसके लिये खेती कर रहा है और जिसके नाम पर जमीन है, उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। यानि आढतियों ने विदेश में बसे जमींदारों की हकीकत उजागर कर दी है। कृषि कानून वापिस लेने की जिद करने वाले अब उच्च न्यायलय में स्वयं कह रहे हैं कि पंजाब में 40% कोन्ट्रेक्ट फार्मिंग होती है। अब आढ़ती उच्च न्यायलय का मुकदमा लड़ने में पैसा खर्च करेगा या उन फर्जी किसानों को पालने में जो किसान रूप में उसी के मुकदमे में सरकार के साथ प्रतिवादी स्वत: ही बन गये हैं, क्योकि विरोध भुगतान उनके खातों में जाने का है। कहां तक चन्दा इकट्ठा करेंगे आढती, सप्लाई लाईन तो मोदी ने काट दी है। विदेशी फण्डिंग का गला सरकारी एजेंसियों ने पहले ही घोंट दिया है। आखिर अब कब तक आढती और कांग्रेस इस फुस्स किसान आन्दोलन को वैंटिलेटर पर जिन्दा रख पायेंगे। कांग्रेस को भी मोदी जी ने टिकैत द्वारा की जा रही महापंचायतों के माध्यम से निचड़वा दिया है, क्योकि लोग वही होते हैं, जो कांग्रेस या विपक्ष के समर्थक होते हैं और जिनकी संख्या गौण है। बाकी अधिकतर मुफ्त का बढिया शादी वाला खाना खाने महापंचायतों मे आते हैं।


इन सब बातों से खाली चौबारे वाले टिकैत भी अनभिज्ञ नहीं, वरना यह जानते हुये भी कि अनूपनगर मध्यप्रदेश में 2012, नोट करें 2012 (किसकी सरकार थी केन्द्र में) से गैर जमानती वारंट लम्बित है, इसके विरुद्ध वहां महापंचायत करने चले गये। अनगर्ल देशविरोधी प्रलाप और सब उकसाऊ गंवारू बातों के बाद भी जब केन्द्र ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया तो केवल इसका एक कारण है कि टिकैत को गिरफ्तार कर मोदी सरकार इन्हें हीरो बनने का मौका नहीं देना चाहती। सरकार ने इनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को गोबर में दफन करने का कार्य कर दिया है। पंचायत चुनाव से पहले केन्द्रीय मंत्री संजीव बालियन की जुड़ी अपार भीड़ ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।
मेरठ, उत्तर प्रदेश 

Related posts

Leave a Comment