रोड़ लाईट

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

एक असहाय औरत!
रोड लाईट को सर पे उठाये
अपने आठ माह के बच्चे को
तन में दबाये..
अपने एक एक पग
अंगद के प्रण की तरह”
सम्हल कर जमाते हुये
डी.जे के कर्णभेदक अप्रिय
धुन के अश्लील नृत्य में मग्न
संम्भ्रांत समाज के घनघोर शिक्षित!
नशे की मद में चूर
उनकी घृणित  कुदृष्टि से
स्वयं और आने वाले नर्तक को
बचाने की जद्दोजहद।
अपने अभाव को कोसते
नर्तक भाडों के भीषण उमंग से
अपने अस्तित्व को बचाती,,
सार्थक जनन के खर्च को..
जोडने में अपने उर्जा को लगाती
गिर पडी कहाँ तक बच पाती।
असहाय धूमिल दृष्टि”
जिसने रची यह सृष्टि”
कोसती अपनी गरीबी को.
खून से लथपथ चीखती!
पर ये क्या..
आंख के अंधो की बारात
नाचती खिलखिलाती..
एक वृद्ध दृष्टिहीन के भरोसे”
इस नारी को जिसे कभी कभी..
श्रद्धा भी कहते हैं!
श्रद्धांजलि की जगह।।
ग्राम मझवार खास, चन्दौली उत्तर प्रदेश

Related posts

Leave a Comment