आंतरिक दर्द

राजीव डोगरा “विमल”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मैं कभी-कभी
निशब्द हो जाता हूं।
समझ नहीं आता
क्या लिखूं.
और किसके बारे में लिखूं ।
जिनको देखकर
शब्दों के जाल बुनता था,
वो ही आज मुझे
निशब्द कर चलेगे।
जिनको सोच कर
मेरा अंतर्मन नए-नए
भावों को उद्वेलित करता था।
वो ही आज मुझे
भावों से हीन करके चलेंगे।
जिनके लिए मैं
समझदार बनता था,
वो ही आज मुझे
नासमझ मान कर
कही दूर चले गए।
युवा कवि लेखक कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

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