बाद मुद्दत के

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

बाद मुद्दत के मुझे आईना नजर आया।
मेरा था और घर, याद अब वो घर आया।
जिनसे मिन्नत थी सर छुपाने की,
पास आया तो खंड़हर पाया।
बाद मुद्दत के मुझे आईना नजर आया।
मंजिलें रास्ते मिले इक जगह,
कोई ना कारवां इधर आया।
बाद मुद्दत के मुझे आईना नजर आया।
कल जहाँ थी हंसी अब आंसु हैं,
एक चेहरा ये कैसे कर पाया।
बाद मुद्दत के मुझे आईना नजर आया।
रेत की प्यास में तड़प है विनम्र”
तेरे सागर में कब लहर आया।
बाद मुद्दत के मुझे आईना नजर आया,
मेरा था और घर”याद अब वो घर आया।

ग्राम मझवार खास, चन्दौली उत्तर प्रदेश

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