….तो ये धर्म की लड़ाई नहीं है (शिक्षा वाहिनी के वर्ष 14, अंक 23, 30 दिसम्बर 2017 को प्रकाशित लेख का पुनःप्रकाशन)

सुनील वर्मा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

आज सारे देश में जाम लगा है। जहाँ देखो वहां लोग घुसे पडे हैं। धर्म, फर्जी इतिहास और फालतू के मुद्दे लेकर लोग सड़क से लेकर संसद तक जाम लगायें हुऐ हैं और मजे की बात है कि सरकार खुद इस वक्त पूरे देश में लगे इस राजनैतिक जाम के ट्रैफिक को संभालने की जगह खुद अंदर घुसकर रास्ता रोक के बैठ गई है। कुछ लोग बाहर बैठकर इसे खोलने की नसीहत भी दे रहे है और खुलने भी नहीं दे रहें है और केवल मजे ले रहे हैं, पर ये पता नहीं कि नुकसान किसका हो रहा है?
अब थोड़ा इतिहास पर नजर डालते हैं। मराठा सेना टीपू सुल्तान पर आक्रमण करने रंगपटनम् गई, पर किसी कारण वश लड़ाई तो टल गई, लेकिन लौटते समय एक मंदिर को तोड़ आई। वजह क्या थी, धर्म? शायद नहीं। वजह थी कि यह मंदिर टीपू सुल्तान के इलाके में था। अब जरा हल्दीघाटी का युद्ध पर नजर डालें तो पता चलता है कि सलीम का सेनापति कौन था, मान सिंह और मान सिंह कौन था हिन्दू या मुसलमान? महाराणा प्रताप का सेनापति कौन था, हकीम खानसूर और ये खानसूर कौन था, हिन्दु या मुसलमान? तो ये धर्म का लड़ाई कहाँ हुई? शिवाजी महाराज ने औरंगजेब का खजाना लूटने के लिए सूरत पर आक्रमण किया, लेकिन शिवाजी महाराज नें रास्ते में पडने वाली दरगाह और फादर एमंब्रोस पिन्टो के आश्रम को नुकसान न पहुँचाने की सख्त हिदायत भी दी थी। अब खजाना दिल्ली में और सेना सूरत में, वो लडाई कौन से धर्मो के बीच थी? कहते हैं शिवाजी महाराज की सेना में 18 मे से 14 सेनापति मुसलमान थे, फिर वो कौन से धर्म के खिलाफ लड़ रहे थे? शिवाजी जब अफजल खान से निहत्थे मिलने जा रहे थे, तब उनको किसने रोका था, उनके ही एक जासूस ने, जिसने उन्हें वाग नग दिया था और वो जासूस कौन था? उस जासूस का नाम था, रुस्तमे जमाल और जब शिवाजी महराज ने अफजाल खान पर वाग नग का इस्तेमाल किया था तो नीचे पडे अफजल खान के हाथ में तलवार देने वाला और कोई नही था, वो था अफजल का एक सेनापति, जिसका नाम था कृष्णा जी भास्कार कुलकर्णी और ये हिंदू ही था। तो धर्म की कौन सी लड़ाई हुई। धर्म की कोई लड़ाई अजादी के बाद तक भी नही हुई। 1947 की लड़ाई दो धर्मों के बीच थी या दो  डाईनेस्टीयों के बीच आप जरा सोचिए…?
दोस्तों! आजतक इस देश में सभी लड़ाईयां क्लदंेजपमेष् के बीच ही हुई हैं और अब भी क्या हो रहा देश में अभी भी लड़ाई तो इलाकों को लेकर ही तो है। मेरा गुजरात और तेरा बिहार, लेकिन अब इस तेरे-मेरे को धर्मों की लड़ाई में एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत परिवर्तित किया जा रहा है। धर्मों को खतरे में जानबूझकर कर धकेला जा रहा है। पुराने हिदुत्व को नये हिंदुत्व से खतरा होता जा रहा है और पुराने इस्लाम को नए इस्लाम से खतरा पैदा हो रहा है और ये नये वाला खतरा बहुत भयानक, खौफनाक, नृशंष और घृणित साबित होगा। इस देश के आधुनिक राजे-रजवाडों! पता नहीं क्यों तुम इन सब खतरों से आँखें मूंद कर बैठे हो? अरे बेवकूफो! राजपाट चलाने वालों अगर धर्म खतरों में रहेगा तो जनसंख्या पर नियंत्रण कैसे होगा? भारत की भूमि को मिडल ईस्ट की तरह तैयार किया जा रहा है। सरकारों का रिमोट कंट्रोल विदेशी ताकतों के पास है। ये जो दिनो-दिन भीड़तंत्र द्वारा हत्याएं, अराजकता, दंगों की खबरे देखते सुनते हो, ये सब इस नयी योजना की शुरुआत के लक्षण हैं। मिडिल ईस्ट में भी ऐसे ही शुरू हुआ था। जब यहाँ की धरती साफ हो जाएगी तो नए सिरे से बाजार की ताकतें यहाँ आएँगी और अपने मुताबिक इसे विकसित करेगीं क्या एक बार फिर से इसी बात का इंतजार हैं?

खतौली उत्तर प्रदेश (लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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