अभीष्ठ फलदायक होता है महाशिवरात्रि को शिव का अभिषेक

डॉ. शम्भू पंवार, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। वर्ष में आने वाली बारह शिवरात्रि में से फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है, इसलिये इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को बड़े उत्साह और उमंग और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व आज 11 मार्च को है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस दिन सृष्टि का प्रारंभ हुआ था। महादेव की विशालकाय स्वरूप की उत्पत्ति एक अग्निलिंग के उदय से आरंभ हुई मानी जाती है। यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह हुआ था, इसलिए शिव पार्वती के मिलन के उत्सव के रूप में भी महाशिवरात्रि मनाई जाती। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर व्रत रखें और सृष्टि के रचयिता, देवो के देव महादेव की श्रद्धा व विधि विधान से पूजा करने से  भगवान शिव प्रसन्न होते है। भगवान शिव के प्रसन्न होने से साधक के कस्ट ओर दुखो का अंत होता है। महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का पर्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन महिलाओ को शिव और शक्ति एक साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए। कुंवारी कन्याऐ योग्य वर की और विवाहित महिलाएं संतान और पति की दीर्घायु की कामना से पूजा-अर्चना करती हैं। शिव और शक्ति की सयुक्त रूप से पूजा करने से साधक की मनोकामना पूर्ण होती है।
 महाशिवरात्रि के दिन अल सुबह उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर भगवान शिव का स्मरण करें एवं श्रद्धा से महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात भगवान शिव का ध्यान कर मन को शांत और एकाग्र चित्त रखना चाहिए। ब्रह्मचारी का भाव, स्वस्थ मन और पूरी श्रद्धा, आस्था व गरिमा के साथ बिल्व पत्र अर्पित करते हुए ॐ नमः शिवाय का मंत्रोचार से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। भगवान शिव भक्तों की सच्चे मन से की गई पूजा से खुश होकर उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश पुजारा के अनुसार महाशिवरात्रि के  दिन भगवान भोले नाथ का अभिषेक करना बहुत ही शुभ और फलदायक होता है।
पंडित मुकेश पुजारा बताते हैं कि अभिषेक का अर्थ यह है कि भगवान रुद्र का अभिषेक (स्नान) कराना यानी शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रोच्चार से अभिषेक करना या कराने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होते है। ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। सभी रोग, दोष व कस्ट समाप्त होते है। पारिवारिक सुख सम्रद्धि, संतान की प्राप्ति, यश, वैभव, मान, सम्मान एवं लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए अभिषेक करना विशेष फलदायक माना जाता है। ऐसे में इस दिन द्रव से पूजा करने से भगवान शिव की अधिक कृपा प्राप्त होती है।
ऐसा मानना है कि पारद शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो इसका फल तत्काल मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण ने अपने 10 सिरों को काटकर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया तथा सिरों को हवन में अर्पित कर दिए थे, जिसके फलस्वरूप रावण त्रिलोक विजयी हुए थे। भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग एवं शिवरात्रि, प्रदोष व श्रावण के सोमवार आदि पर्वो को अभिषेक करने से साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर, घी) से करना चाहिए। दूध, जल व अन्य कई तरल पदार्थों से किया जाता है।
मान्यता है कि द्रव, फल, गंगाजल सौभाग्यवृद्धि के लिए, गाय का दूध ग्रह शान्ति व लक्ष्मी प्राप्ति के लिए, गाय का घृत वंश वृद्वि के लिए, पंचामृत मनोकामना पूर्ति के लिए, गन्ने का रस यश व वैभव प्राप्ति के लिए, शहद ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए, सुगन्धित तेल भोग प्राप्ति के लिए और शक्कर मिले दूध बुद्धि व ज्ञान में वृद्धि के लिए शुभ होते हैं। ऐसे द्रव से पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।
पत्रकार एवं लेखक-विचारक सुगन कुटीर, चिड़ावा (झुन्झुनू) राजस्थान

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