चुनाव

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

चौतरफा आंधियां है उंगली सम्हालिये,
खतरा बहुत है बाहर शीशे में ढालिये”
चलता है इसका जादू एक हीं क्षण बस,
बाद के व्यवहार का अभ्यास ड़ालिये”
बैर जिसने पाला सालों तलक अकेले,
झुकती हुई नजर को हृदय से सम्हालिये,
बबूल के भी वृक्ष पे फल आ गये हैं आज,
पांव फिर भी जमीं पर देखकर उतारिये,
झुकना गलत नहीं है अवसर वगैर लेकिन”
उम्मीद में झुकते हुये सर को उभारिये,
बीत जायेगा ये दौर विनम्र”एक दिन,
कुछ दिनों की जय के अहं को न पालिये।
ग्राम मझवार खास, चन्दौली उत्तर प्रदेश

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