एसडी कालेज ऑफ़ इन्जिनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में विचार गोष्ठी व काव्य पाठ आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। एसडी कालेज ऑफ़ इन्जिनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी में महिला प्रकोष्ठ द्वारा साप्ताहिक कार्यक्रम मिशन शक्ति के अंतिम सत्र व अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में महिला सशक्तिकरण केन्द्रित विचार गोष्ठी व काव्य पाठ का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं को स्वावलम्बी एवं सशक्त बनाने की दिशा में नारी शक्ति का समृद्ध स्वरूप प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक चिन्तक डा0 अ0 कीर्तिवर्धन, विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार रामकुमार शर्मा रागी, पंकज शर्मा, विनीत मित्तल, प्रतिभा त्रिपाठी एवं प्रसिद्ध कवि लक्ष्मी डबराल मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के अधिशासी निदेशक प्रो0 (डा0) एसएन चौहान, प्राचार्य डा0 एक0 गौतम आदि ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर किया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा0 अ0 कीर्तिवर्धन ने इस अवसर पर कहा कि आदिकाल से महिलाओं की स्थिति भारत ही नही यूरोप में भी विचारणीय रही है। भारत में फिर भी यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः की दार्शिनिक विचारधारा से प्रभावित रहा है। परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरूआत की परिस्थ्तिियां दर्शाती है कि यूरोप में महिलाओं को बहुत संघर्ष करना पड़ा था। फिर भी महिला व पुरूष एक गाड़ी के दो पहिये है उन्हे सामंजस्य रखना ही चाहिये। संस्थान के अधिशासी निदेशक प्रो0 (डा0) एसएन चौहान ने कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं को अपने विचारों क्रिया-कलापों एवं दैनिक गतिविधियों में बदलाव लाना होगा। आज विश्व में महिलाऐं अनेक उच्च पदों पर आसीन है। डा0 चौहान ने कहा कि दुनिया की आधी आबादी महिलाओं की है, परन्तु नाम केवल गिनीचुनी महिलाओं के ही लिये जाते है। शिक्षा, स्वास्थय एवं रोजगार मुख्य मुद्दे है। जब तक महिलाओं को शिक्षित, स्वस्थ व रोजगार युक्त नहीं बनाया जायेगा तब तक समस्या बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 59 प्रतिशत महिलाऐं ही साक्षर है। 78 प्रतिशत गर्भवती महिलाऐं एनिमिक है। केवल 8 प्रतिशत महिलाऐं ही संगठित क्षेत्र में रोजगार कर रही है, अतः महिलाओं को स्वयं आगे आना होगा। महिलाओं में किसी भी प्रकार के कौशल की कमी नहीं है चाहे वो कौशल विज्ञान से जुड़ा हो, व्यापार से जुड़ा हो या युद्ध से जुड़ा हो। जरूरत है महिलाओं के जागरूक हाने की और जो लोग उन्हे कमजोर समझते है उनके सामने सकारात्मक भूमिका सिद्ध करने की। उन्होने कहा कि आज के बहुआयामी व बहुउद्यमिता के युग में कोई भी समाज तब तक विकसित नहीं हो सकता जब तक समाज का आधा हिस्सा अर्थात महिलाऐं सक्रिय रूप से भूमिका नहीं निभाती। महिलाओं के प्रति पुरूषवर्ग को अपनी सोच बदलनी चाहिये। महिलाऐं कमजोर या आश्रित नहीं है बल्कि महिलाओं में सबको प्रश्रय देने की क्षमता है। वह माँ के रूप में, पत्नि के रूप में, बहन के रूप में, बेटी के रूप में पुरूष वर्ग को दिशा प्रदान करती है। डा0 चैहान ने कहा कि सतयुग से कलयुग तक बहुत सहा है, अब सूरत बदलनी चाहिये। कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें, ये राह बदलनी चाहिये।


विशिष्ट अतिथि के रूप में रामकुमार शर्मा रागी ने व्यंग्यात्मक शैली में अपनी प्रस्तुति दी। विनीत मित्तल ने ओजपूर्ण कविता पाठ किया। पंकज शर्मा ने महिला केन्द्रित सुन्दर गीत गाया। जिसके भाव थे कि महिला समाज की धुरी है। इस अवसर पर कालेज के प्राचार्य डा0 एके गौतम ने कहा कि महिलाऐं भारतीय समाज में प्राचीन काल से ही प्रतिष्ठित एवं पूजित रही है। प्राचीन काल में भारतीय समाज में नारी समाज की महत्ता इससे समझी जा सकती है कि भारत को भारत माता, नदियों को गंगा मैया व जमुना माता कहकर पुकारते है। समाज में परिवर्तन युवा पीढ़ी के द्वारा ही होता है, इसलिये महिला सशक्तिकरण के लिये युवा महिलाओं को आगे आना होगा। कार्यक्रम में डा0 प्रगति शर्मा, पारूल गुप्ता, अलका अग्रवाल, संगीता अग्रवाल, शिवानी कौशिक आदि उपस्थित रही।

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