मैं पैसा नहीं हूँ

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मैं पैसा नहीं
जो सबको प्यारा हो जाऊं
लाख बुराई हो पर मैं
पांच सितारा हो जाऊं
ठाट बाट के सब दर्पण
जिनके बिन झूठे लगते हैं
कागज की उस कश्ती का मैं
कैसे किनारा हो जाऊं
मैं ठहरा हुआ समंदर हूं
वह एक जगह रुकती हीं नहीं
उनके चक्कर में ऐ विनम्र”
मैं भी आंवारा हो जाऊं।
मैं पैसा नहीं
जो सबको प्यारा हो जाऊं।।
ग्राम मझवार खास, चन्दौली उत्तर प्रदेश

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