अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ज़िला स्तरीय महिला कवि सम्मेलन आयोजित

अनिल हारटा, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

भाषा एवम संस्कृति विभाग शिमला द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गेयटी थियेटर के कांफ्रेंस हॉल में ज़िला स्तरीय महिला कवि सम्मेलन का अयोजन कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डा० संगीता सारस्वत ने की। इस अवसर पर डेढ़ दर्जन से अधिक वरिष्ठ एवम नवोदित कवयित्रियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।
 कवि सम्मेलन सम्मेलन की शुरुआत डा० ममता मोक्टा की मां पर लिखी कविता “तु खुद की खोज में निकल…, पंक्तियों से हुई। इसके बाद जेनव ने यथार्थ का बखान करती- हवा तेज हो गई हैं कहीं आग जल न जाए। गर आग लग गई तो अब रख हो जाएगा….। निशा चौहान ने-मैं तुम्हारे बिना अधूरी, हर धड़कन को मेंने जो सुना तुम्हारी। वो धड़कन जो तुम्हारी थी  पर देती मुझे जिंदगी थी….। सुनाया।
 सुनीता ठाकुर नें- मेरा परिचय इतना सा की जगजीवन की तकदीर हूं मैं। प्यार लुटाकर मांगू भीख प्यार की  अकिंचन फकीर हूं मैं।। कविता पढ़ी।
 वन्दना राणा ने- किए हैं उजाले जिसने खुद को जलाकर उस सूरज  को चलो दिया आन दिखाते है ,नवनिता ने उठो लड़ो और आगे बढ़ोअपनी समस्याओं का खुद समाधान बनो।।कविता पढ़ी। डॉ. कुसुमलता ने- नारी होगी सशक्त तभी देश होगा सशक्त कविता पढ़ी।
 उमा  ठाकुर ने- सशक्तिकरण की राह पर हिमाचली महिलाएं विषय पर अपना लेख प्रस्तुत किया। शिवानी पांडे ने- कोरे कागज़ सी जिंदगी मेरी स्याही सा गहरा रंग तेरा। कभी उतार पाऊंगी मां जीवन रूपी कर्जा तेरा।। कविता सुनाई। कल्पना ठाकुर ने- तू जननी हैं तू सबला हैं तू करती है सृजन सभी कातू करती हैं पालन पोषण सभी का तू हैं विविध स्वरूपा।।
 रचना वर्मा ने- मेरा वजूद मेरी मां से हैं मेरी मां मेरा सकूं हैं और हिम्मत है।। साहिल वर्मा ने- जिम्मेवारियों का बोझ परिवार पे पड़ा तो ओटो रिक्शा, ट्रेन को चलाने लगी बेटियां।।
 रक्षा शर्मा ने- माथे पे बिंदी से सुहाती है नारी दुनियां में अनुपम हैं नारी स्वयं विपदा को सह रोती, अपने बच्चों को सूखे मे सुलाती। मार्मिक कविता पढ़ी। प्रियंका शर्मा ने-जिंदगी के हर सफर मे साथ देती हैवो हर किरदार निभाती है, जनाब! वो औरत है, जो जीना सीखाती है।। सुनाया।
दीप्ति सारस्वत ने- सुविधा और  सती प्रथा के यथार्थ पर मार्मिक काव्य पाठ  किया। कार्यक्रम मे बेहतर काव्य पाठ व मंच संचालन के लिए कल्पना गंगटा ने खूब तालियां बटोरी। अध्यक्षीय भाषण में डा० संगीता सारस्वत ने सभी  को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी और कोविड वैश्विक महामारी के चलते एक वर्ष के लंबे अंतराल के बाद औपचारिक कार्यक्रम मे बेहतर काव्य पाठ करने के लिए सब की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने सभी से निरंतर लेखन का आग्रह भी किया। इस अवसर पर ज़िला भाषा अधिकारी अनिल हारटा सहित संस्कृति निदेशालय से अलका कैंथला, सहायक निदेशक प्रकाशन कुसुम संघैक, सहायक निदेशक भाषा सरोज नरवाल, भाषा अधिकारी श्रेष्ठा ठाकुर, अधीक्षक ग्रेड2,डॉ० मस्त राम शर्मा, पूर्व सचिव हिमाचल संस्कृति अकादमी भी उपस्थित रहे।
जिला भाषा अधिकारी शिमला

Related posts

Leave a Comment