नारी-पुरूष दोनों की अपनी कमज़ोरियाँ और शक्तियाँ है

प्रभाकर सिंह, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

यह कहना कि नारी महान है, करुणा और त्याग की मूर्ति है एक तरह से नारी को fictionalize करने के समान है । नारी और पुरूष के अलग- अलग गुण हो सकते हैं, लेकिन न स्त्री देवी है और न पुरुष ही खलनायक है। दोनों की अपनी कमज़ोरियाँ और शक्तियाँ है। बहुत सारे पुरुष भी धूर्त हैं तो स्त्रियाँ भी हैं। दुनिया की गाड़ी चलाने के लिए ज़रूरी है कि स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर उसे खींचे और ऐसा तभी होगा, जब स्त्री और पुरुष दोनों सशक्त और सक्षम हों। कोई एक दूसरे का शोषण न करे, कोई किसी को ग़ुलाम बनाने का प्रयास न करे।
माना की बायोलॉजिकल अंतर है जिसे  पुरुषों ने अपने फ़ायदे के लिए प्रयोग किया है और कर भी रहे हैं। स्त्रियाँ शिकार हुई हैं, लेकिन स्त्रियाँ ही क्यों, बहुत सारे लोग शिकार हुए हैं, जब  जाति, पंथ, विचारधारा या अन्य किसी आधार पर लोगों का लगातार शोषण किया गया है और इस शोषण में स्त्रियों ने भी उतना ही साथ दिया है और दे रहीं हैं। उदाहरण के लिए भारत में तथाकथित उच्च जातियों की कितनी स्त्रियाँ हैं, जो दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के प्रति सहानुभूति रखती हैं ?
 वैसे भी किसी का शोषण हुआ, इससे वह महान कहलाने का हक़दार तो नहीं हो जाता है। मेरा मानना है कि स्त्री को महान कहने के बजाय एक इंसान माना जाना स्त्री मुक्ति की ओर बड़ा कदम होगा। स्त्री और पुरुष दोनों को यह समझना ज़रूरी है कि दोनों इंसान हैं और इंसान होने के नाते एक दूसरे का अस्तित्व उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना जीने के लिए हवा और पानी। न स्त्री साधन है और न ही पुरुष बल्कि दोनों को साधनों का समुचित प्रयोग करते हुए एक साध्य की ओर अग्रसर होना है, जहाँ दोनों को आगे बढ़ने का एक समान अवसर होगा ,दोनों सुरक्षित होंगे और स्वतंत्र होकर भी एक दूसरे से बँधे रहेंगे।
प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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