गांव

विनय सिंह “विनम्र”, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

मेरा गांव शहर से अच्छा है”
जमीन यहाँ अभी कच्चा है।
संवेदना यहाँ पर जीती है”
नहीं लहू किसी का पीती है।
उंची उंची मिनारों में
परिंदे बसते हैं शहरों में।
सिसक रही है मानवता
विस्तृत पत्थर के पहरों में।
संस्कार का दहन यहां है
चौतरफा चारित्रिक पतन यहाँ है।
यहाँ रिश्ते पल में बदलते हैं
सावन संग पतझड़ चलते हैं।
विकट अर्थ”की भूख यहाँ है
गावों को खुद में खींच रहा है।
ग्राम मझवार खास, चन्दौली उत्तर प्रदेश

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