संस्मरण

दिलीप भाटिया, शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

आज 15 अक्टूबर दिवंगत राष्ट्रपति अब्दुल कलाम सर की जयंती है। आज मुझे याद आ रहा है अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण जब 14 सितंबर 2006 हिंदी दिवस को उनके कर कमलों से मुझे विज्ञान भवन नई दिल्ली में केंद्रीय हिंदी संस्थान का आत्माराम पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण सदुपयोग पर समाज को सरल हिंदी में वार्ताओं आलेख विचार सूचना इत्यादि कई विधाओं में बोलने लिखने एवम् आकाशवाणी चित्तौड़गढ़ कोटा जयपुर शहडोल केंद्रों से परमाणु बिजली घर पर प्रसारित वार्ताओं एवम् साक्षात्कार के योगदान के कारण मुझे अपने जीवन का सर्वोच्च पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति से मिला था। पुरस्कार लेते समय करीब 30 सेकंड उनसे बात भी हुई थी। मेरा परिचय श्रोताओं को दिया जा रहा था, उसे सुनकर कलाम सर ने कहा कि तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो। उनसे पुरस्कार प्राप्त कर मुझे सीख मिली कि बस अपना कर्म करते रहना चाहिए, पुरस्कार सम्मान तो स्वतः ही समय आने पर प्राप्त होते रहेंगे। बाद में उनके निधन के पश्चात उपकार प्रकाशन आगरा की सामान्य ज्ञान दर्पण मासिक प्रतियोगिता पत्रिका के संपादक के अनुरोध पर एक लघु पुस्तिका भी उन पर लिखी, जो सितंबर 2015 अंक के साथ प्रकाशित हुई थी। 32 पृष्ठों की उनके जीवन पर मेरे द्वारा लिखी इस प्रकाशित पुस्तिका की पीडीएफ फाइल मेरे पास उपलब्ध है।                                                           

सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक अधिकारी राजस्थान परमाणु बिजली घर रावतभाटा राजस्थान 

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