गद्य विधा के दोहे भाग 1

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

रामचंद्र आलोचना, चिंता तुलसीदास ।
भ्रमरगीत रस जायसी,साहित का इतिहास ।।1
नंद दुलारे वाजपी, अरु हजारी प्रसाद ।
हिंदी साहित्य भूमिका, ज्ञआलोचन संवाद ||2
परीक्षा नील देव है, बालकृष्ण के साथ।
काव्य प्रभा सारावली, जगन्नाथ परसाद ||3
 हिन्दी की आलोचना, माखन सा है ग्रंथ ।
रस मिमांसा लिख गये, शुक्ला रामाचन्द ।।4
 काव्य शास्त्र अनुभूति है, नगेन्द्र के विचार ।
कथा कविता प्रतिमान है, लिखते नामावार ।।5
 प्रगतिशील अरु मार्क वाद, शर्मा राम विलास ।
हिन्दी की आलोचना, गद्य विधा है खास ।6
कथा गद्य का रूप है, दादी नानी ज्ञान ।
 रेखाचित्रा लघु कथा, निबंध पत्र को जान।। 7
 नाटक अरू एकांकी अरू कहें उपन्यास।
डायरी अरु संस्मरणा, आतम कथा हि खास ।।8
यातरा वृतान्त अरू, भेटवार्ता आन।
जीवनियाँ आलोचना, गद्य विधा का ज्ञान ।।9
गद्य कसोटी कवी की, निबंध गद्य की जानि ।
 रामचन्द्र विद्वान ने, बात कही थी आनि ।।10
भारतेन्दु अरू कृष्णभट्ट, अरु नारायण बाल ।
महावीर बाबु सुंदर, चन्द्राधर सरदार ॥11
 पुत्रा पदम गुलाब अरू, रामचन्द विद्वान ।
हजारी विद्यानंद अरू, अमरत राम विलास.12
शरद हरी अरु.ज्ञान रवि, व्यंग विधा के साथ।
विद्या हजारि ललित रचे,नारायण रघुनाथ । 13
वृद्ध बुढ़ापा दांत भौ नारायण पहिचान ।
चिट्टे शिवशम्भू लिखे, बालमुकुन्द महान ।14
चिन्तामणी के भाग दो, बंध त्रिवेणी शान ।
 शुक्ला रामचन्द्र से, जग ने सीखा ज्ञान 15
प्रसाद हजारी कल्पलता, कटुज अशोका फूल।
 निबंध गद्य की माप है, बाको तू मत भूल ।16
 नदिया जैसी जो बहे, हरे जीव का क्लेश ।
 सरस सजीव चित्रण करे, कथा भाष संदेश ॥17
 शिव परसाद हिन्द की, सपना राजा भोज ।
लाल किशोरी इन्दुमति, विश्वनाथ विद्रोह ।।18
 चंद्राधर उसने कहा प्रेम पूस की रात।
 ठेस संवदिया रेणु की, ममता जय परसाद ।।19
 मानसरोवर की कथा, प्रेमचंद कहि बात ।
 परिन्द निर्मल की कथा, लंदन की इकरात।। 20
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

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