रानी लक्ष्मीबाई चालीसा ( महिला दिवस पर विशेष)

डॉ. दशरथ मसानिया,  शिक्षा वाहिनी समाचार पत्र।

लक्ष्मी दुर्गा रूप थी,भारत की पहिचान।
सन सत्तावन में लड़ी,कहत हैं कवि मसान।।
ब्रह्मा ने जब जगत रचाया।
पुरुष नार को साथ बनाया।।1
मनु श्रद्धा का कर निर्माणा।
ता पीछे सब जगत चलाना।।2
सम अधिकारी हैं सब नारी।
फिर भी नर से  पड़ती भारी।।3
जय जय प्यारी लक्ष्मी बाई।
झांसी  की रानी  कहलाई।।4
उनिस नवंबर सन पैतीसा।
नगर भदेनी वाराणीसा।।5
राज मराठा बाजीरावा।
सैनिक मोरोपंत निराला।।6
इनके घर इक बेटी आनी।
खुशियां छाई मनु कहानी।।7
ज्योतिष ने रानी बतलाया।
सारे लक्षण सुता दिखाया।।8
मोरो पंता  सुता भवानी ।
भागीरथी कोख से आनी।।9
चार बरस में माता छोड़ा।
माया मोह जगत से तोड़ा।।10
पिता सुता को लाये बिठुरा।
बेटी मानी राव पेशवा।।11
मणिकर्णिका नाम पुकारा।
मनु मनोहर कहते सारा।।12
सुंदर सुघरा गौर छबीली।
वीर पराक्रम तन फुरतीली।।13
साहब नाना रावा वीरा।
बहिन छबीली खेंले तीरा।14
घोड़ सवारी संग पढ़ाई।
नाना के संग खेल लड़ाई।।15
लड़ती कुश्ती पड़ती भारी।
 राखे ढाल कृपाण कटारी।।16
बालपने की वीर कहानी।
इनकी गाथा सब जग जानी।।17
 गंगाधर के  संग  सगाई।
ब्याह हुआ फिर झांसी आई।।18
बजी बधाई खुशियां छाई।
राज महल में सखी बुलाई।।19
काना अरु मुंदरा भी आई।।
नारिन की इक फौज बनाई।।20
भाल कृपाण कटार सिखाया।
रानी ने बालक इक जाया।।21
तीन माह में स्वर्ग सिधाया।।
बाल निधन राजा मुरछाये।।22
गंगाधर ने प्राण गंवाये।
सकल राज में मातम छाया।।23
तब दामोदर गोद बिठाया।
फिर झांसी का राज चलाया।।24
डलहौजी मन में हरषाया।
विलय नीति काअवसर पाया।।25
वारिस बनके झांसी आया।
हड़प नीति का बाण चलाया।।26
 युद्ध क्षेत्र में वाकर आया।
 पूरा लश्कर तोपें लाया।।27
शत्रु देख रानी भर्राई ।
आंखन में भी लाली छाई।।28
बेटा पीठ के पीछे बांधा।
सिर पे कफन हाथ कृपाणा।।29
दुर्गा का फिर रूप बनाई।।
मारत काटत लड़ी लडाई।।30
वाकर घायल होकर भागा।
अंग्रेजों का टूटा तागा।।31
लड़त कालपी रानी आई।
वाकर की सेना घबराई।।32
रानी की सखियां भी मारे।
सैनिक मौतन घाट उतारे।।33
यमुना तट पर जीती रानी।
घोड़ा थककर यम को जानी।।34
आगे से फिर स्मिथ रण भेरा।
पीछे से ह्यूरोज ने घेरा।।35
अभिमन्यु सी पड़ी अकेली।
आजादी की पूरी चेली।।36
मरते दम तक हाथ न आई।
अपने सैनिक चिता जलाई।।37
जून सत्रहा सन अट्ठावन।
देश यज्ञ मे आहुत जीवन।।38
तेईस बरस अलख जगाया।
ज्ञान हौसला मान बढ़ाया।।39
हे जग देवी  जय महरानी।
तेरी महिमा कवी बखानी।।40
अबला से सबला बनी, झांसी की महरानि।
हमको राह दिखा गई, राखा देश सम्मानि।।
23, गवलीपुरा आगर, (मालवा) मध्यप्रदेश

Related posts

Leave a Comment