एसडी कालेज ऑफ़ इन्जिनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी में नारी सशक्तिकरण विषय पर गोष्ठी आयोजित

शि.वा.ब्यूरो, मुजफ्फरनगर। एसडी कालेज ऑफ़ इन्जिनियरिंग एण्ड टैक्नोलोजी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधिक जागरूकता एवं नारी सशक्तिकरण विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि सिविल जज सीनियर डिविजन (डीएलएसए) व विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोनी एवं बतौर विशिष्ट अतिथि 1090 की एसोसिएट सदस्य डा0 बीना शर्मा रही। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया गया। उसके पश्चात महिला कल्याण प्रकोष्ठ की समंवयक पारूल गुप्ता ने बुके देकर अतिथियों का स्वागत किया।

गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि सलोनी रस्तोगी ने मध्यस्थता की आवश्यकता पर बल देते हुए परामर्श केन्द्र व लोक अदालत के बारे में बताया। उन्होने महिलाओं को उनके विधिक अधिकारों व कर्तव्यों से अवगत कराया, साथ ही महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों पर दी जाने वाली सजा के बारे में भी विस्तार से बताया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने कहा कि महिलाओं के प्रति सुधार के प्रति शुरूआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। यह हमारे समाज के लिये आवश्यक हो गया है कि प्रत्येक स्थान पर अपराधियों का बहिष्कार किया जाये तथा किसी भी प्रकार की अनैतिकता से दूर रहा जाये। उन्होंने कहा कि संस्कृति और समाज के विकास के लिये संपूर्ण मानवजाति को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सलोनी रस्तोगी ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आज जिला कारागार मे वीसी के माध्यम से जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया था, जिसमें अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकीम अहमद द्वारा 13 बन्दियों के मामलों का निस्तारण किया गया। उन्होंने बताया कि कल 07 मार्च को परिवार न्यायालयों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें वैवाहिक दम्पत्तियों को समझौते के आधार पर मामल निपटाने तथा उनका मिलन कराने का प्रयास किया जायेगा। उन्होने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शीघ्र व सस्ता न्याय उपलब्ध कराने हेतु निरन्तर प्रयासरत् है। बतौर विशिष्ट अतिथि डा0 बीना शर्मा ने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं को अपने प्रति हो रहे उत्पीड़न के विरूध आवाज उठाये। उन्होंने सभी हेल्पलाइन नम्बर जैसे 1090, 1076, 181, 112 एवं 108 आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने कहा कि सरकार द्वारा उनके हित में बनाये जा रहे कानूनों का दुरूपयोग न करने हुए अपने घर परिवार की अच्छी तरह से देख-भाल करे और बच्चो को अच्छें संस्कार दे। इसके साथ ही उन्होने कोरोना से बचाव के उपाय भी बताये और टीकाकरण से न डरने और उससे सम्बन्धित अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह भी दी।


गोष्ठी के मूल उददेश्यों पर प्रकाश डालते हुये संस्थान के अधिशासी निदेशक प्रो0 (डा0) एसएन चौहान ने कहा कि जागरूकता एवं जानकारी महिला सशक्तिकरण की आधारशिला है। आज समाज में विद्रुपताऐं एवं महिलाओं के प्रति असहिष्णुता बढ़ी है, जिसके कारण एवं निवारण खोजने आवश्यक है, ताकि भारतीय समाज में लिंग भेद के आधार पर किसी प्रकार का कोई भेदभाव न हो तथा सभी को समान अवसर, सुलभ जीवन एवं सुरक्षा की अनुभूति हो। उन्होंने कहा कि स्त्री के विभिन्न रूप है वह माता है, पत्नि है, बहन-बेटी है, परन्तु यह अफसोस की बात है कि स्त्री विभिन्न रूपों में केवल एक महिला न रहकर बल्कि कई बार अशोभनीय व्यवहार के साथ सामने आती है, जबकी ऐसा नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि इसपर विचार व मंथन की आवश्यकता है, ताकि महिलाऐं इस मर्म को समझे और जो समाज में उनके प्रति या उनके द्वारा अवांछित व्यवहार होता है, उससे बचा जा सके।
इस अवसर पर कालेज के प्राचार्य डा0 एके गौतम ने अगान्तुक अतिथियों व अन्य वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि हमें अपने शास्त्रों से सीख लेनी चाहिये। आदिकाल से भारत में कहा गया है कि यत्र नारीयंस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवताः।। यह बताने के लिये काफी है कि भारतीय समाज एक आदर्श समाज था आज से बिल्कुल जुदा। उन्होंने कहा कि  इसको पुनः स्थापित किया जाना समय की जरूरत है।


कार्यक्रम का संचालन डा0 प्रगति शर्मा ने किया। इस अवसर पर डा0 पीके पुंडीर, डा0 योगेश शर्मा, अभिषेक राय, डा0 नवीन द्विवेदी, डा0 नितिन गुप्ता, मनोज झा, निलाशुं गुप्ता, संगीता अग्रवाल, अलका अग्रवाल, शिवानी कौशिक, आकृति शर्मा, दीपा पुन्डीर, कोमल, रश्मि कपिल व आकांक्षा बंसल, विशाखा, सिमरन, स्वाती, आकाश, धीरज, गोपाल आदि उपस्थित रहे।

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